भारत का इतिहास कैलेंडर के माध्यम से

मेरठ

 10-07-2018 03:01 PM
द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

क्या आपको याद है घर की एक दीवार पर, पंखे की हवा से लहराता वो कैलेंडर।हाँ वही, जो बचपन में चित्रों में हमारी रूचि जगाता था। हर महीने एक नया चित्र, और कुछ-कुछ में तो चित्र से सम्बंधित दो पंक्तियाँ भी। वास्तव में, समय के साथ कैलेंडरों में भी काफी बदलाव आये हैं और आज ये केवल एक उपयोगिता की वस्तु नहीं बल्कि एक कलात्मक वस्तु बन चुके हैं जो कि इन्हें लटकाने वाले के मिजाज़ के बारे में भी कुछ कह जाते हैं। तो आइये आज फिर एक बार अतीत का सफ़र करते हैं, कैलेंडर के माध्यम से।

शुरूआती कैलेंडर अधिकतर हिन्दू देवी देवताओं से प्रेरित थे। कैलेंडर के पुराने हो जाने के बाद भी लोग उसे फेंकते नहीं थे क्योंकि उसमें छपे चित्र से उनकी एक आस्था जुड़ी होती थी। तथा इस प्रकार के कैलेंडर काफी लोकप्रिय थे तथा आज तक भी बनाये जा रहे हैं।

1940 और 1950 के दशक में सभी देशवासियों के बीच देश प्रेम की भी एक लहर दौड़ रही थी। ऐसा हो ही नहीं सकता था कि कैलेंडरों में इस भावना को नहीं व्यक्त किया जाता तथा कई कैलेंडर पाए जाते थे जिनमें गांधी, नेहरु, बोस आदि के चित्र मिल जाते थे।

1960 के दशक में एक नए प्रकार से कैलेंडरों का प्रयोग एक बड़े पैमाने पर होने लगा, विज्ञापन। कंपनियों ने इस बात पर ध्यान दिया कि एक व्यक्ति दिन में कम से कम एक बार कैलेंडर की ओर तो ज़रूर देखता है और एक महीने तक वह एक ही पन्ना रोज़ देखता है। तो यदि उस एक पन्ने पर अपने उत्पादों के चित्र लगा दिए जाएँ तो वे ज़रूर एक बड़ी मात्रा में लोगों के दिमाग में बैठ जाएगा। कई भिन्न प्रकार के विज्ञापन ऐसे कैलेंडरों में देखने को मिल जाते थे, जैसे साईकिल, बीड़ी, वाशिंग पाउडर, चलचित्र (फिल्म) आदि।

समय के साथ ग्राहकों में भी एक जागरूकता आई कि यदि वे एक चित्र को महीने भर तक देखने वाले हैं तो यही बेहतर है कि वह चित्र उनका चित्त प्रसन्न भी करे। और इस तरह अब कई कैलेंडर में कलाकृतियाँ भी छपने लगीं तथा इनसे इन्हें खरीदने वाले के व्यक्तित्व के बारे में भी कई चीज़ें जानने को मिलती हैं।

संदर्भ:
1. http://www.tribuneindia.com/2004/20040104/spectrum/main1.htm

RECENT POST

  • आइए जानते है कैसे बिजली की आपूर्ति कुछ पक्षियों के लिए खतरा है ?
    पंछीयाँ

     09-12-2022 11:15 AM


  • रेत के अवैध खनन का परिणाम- विकास या विनाश?
    समुद्री संसाधन

     08-12-2022 11:26 AM


  • विश्व मृदा दिवस विशेष: क्यों है भारत में भूमि के स्वामित्व के अधिकार की अस्पष्टता ?
    भूमि प्रकार (खेतिहर व बंजर)

     07-12-2022 11:49 AM


  • मेरठ व् देश भर में छोटे वर्गों के आर्थिक सहायक रूप में लघु वित्त बैंकों की भूमिका -
    आधुनिक राज्य: 1947 से अब तक

     06-12-2022 10:36 AM


  • चावल की खेती से अधिक लाभ प्रदान कर रहा है झींगा पालन
    मछलियाँ व उभयचर

     05-12-2022 11:11 AM


  • इस रविवार हम आपके लिए कश्मीर की वादियों से लाल सोना लेकर आए हैं
    गंध- ख़ुशबू व इत्र

     04-12-2022 03:42 PM


  • क्या हैं श्री कृष्ण की छवि में निहित गहरे अर्थ
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     03-12-2022 10:30 AM


  • विश्व भर के पौराणिक ग्रंथों में पवित्र व् असाधारण माना जाने वाला “सोम” आखिर क्या है ?
    फंफूद, कुकुरमुत्ता

     02-12-2022 10:35 AM


  • क्या एंटीरेट्रोवाइरल दवाएं एचआईवी संक्रमण को जड़ से खत्म कर सकती है?
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     01-12-2022 11:50 AM


  • इंडियन स्विफ्टलेट पक्षी: जिसके घोसले की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में है लाखों में
    निवास स्थान

     30-11-2022 10:36 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id