पर्यावरण हितैषी बिजली वाले शमशान

मेरठ

 07-06-2018 01:31 PM
विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

हिन्दू धर्म में नदियों और घाटों का विशेष महत्त्व है। हिन्दू मान्यतानुसार हम पूर्णिमा, दशहरा, अमावास आदि पर गंगा स्नान गंगा घाट पर ही करते हैं। मनुष्य के मरने के बाद भी उसके मृतक शरीर को घाट पर ही ले जाया जाता है। इसे ‘शमशान घाट’ कहा जाता है, जहाँ मनुष्य के मरने के बाद, उसके मृतक शरीर को जलाया जाता है और उसकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की जाती है। जलने के बाद उसके शरीर की राख को गंगा में बहा दिया जाता है।

‘शमशाना’ (शमशान) शब्द की उत्पत्ति संस्कृत भाषा से हुई है। ‘अश्म’ शब्द ‘आसमान’ और ‘शाना’ शब्द ‘शयन’ (विश्राम) को दर्शाता है। सिख, जैन और बौद्ध धर्म को मानने वाले लोग मृतकों के अंतिम संस्कार के लिए ‘शमशाना’ शब्द का ही प्रयोग करते हैं।

लेकिन इस परंपरा के चलते हमें कई समस्याओं का सामना भी करना पड़ रहा है। कम आयु में मरने वाले बच्चों को हिन्दू मान्यतानुसार जलाया नहीं जाता है, बल्कि उन्हें नदी में बहा दिया जाता है। इसी प्रकार बहुत से जानवरों के मरने पर उन्हें भी पानी में छोड़ दिया जाता है। जिसके चलते जल-प्रदूषण तेजी से फ़ैल रहा है और ऐसे जल का सेवन करने से बीमारियाँ तीव्र गति से गाँव व शहरों में फ़ैल रही हैं।

इस समस्या को ध्यान में रखते हुए सरकार ने ‘इलेक्ट्रिक क्रीमेटोरियम’ (Electric Crematorium) अर्थात बिजली वाले शमशान की शुरुआत की है। इनमें शव को लकड़ियों के सहारे जलाने के बजाय बिजली द्वारा मृत शरीर को जलाया जाता है। गंगा नदी को साफ़ रखने के लिए यह अभियान जनवरी 1989 में ‘गंगा कार्य योजना’ (Ganga Action Plan) के तहत चलाया गया था, जिसके द्वारा हम अपने पर्यावरण को स्वच्छ रख सकें। इसके फायदे अनेक हैं – पेड़ों का बचाव (क्योंकि लकड़ी का उपयोग नहीं करना पड़ता), आर्थिक बचत, जल प्रदूषण में कमी, आदि। अतः समय आ चुका है जब हम अपने सालों पुराने अन्धविश्वास छोड़, आने वाले वर्षों तथा पीढ़ियों के बारे में सोच कर सही कदम उठायें।

1. https://en.wikipedia.org/wiki/Shmashana
2. https://www.mapsofindia.com/my-india/society/electric-cremation-vs-the-traditional-funeral-pyre

RECENT POST

  • प्रकृति की अनोखी कहानियां, अपने छोटे से जीवन में पारिस्थितिकी तंत्र को काफी लाभ पहुंचाती है अंजीर ततैया
    व्यवहारिक

     29-05-2022 01:46 PM


  • विश्व कपड़ा व्यापार पर चीन की ढीली पकड़ ने भारत के लिए एक दरवाजा खोल दिया है
    स्पर्शः रचना व कपड़े

     28-05-2022 09:14 AM


  • भारत में हमें इलेक्ट्रिक ट्रक कब दिखाई देंगे?
    य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला

     27-05-2022 09:23 AM


  • हिन्द महासागर के हरे-भरे मॉरीशस द्वीप में हुआ भारतीय व्यंजनों का महत्वपूर्ण प्रभाव
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     26-05-2022 08:28 AM


  • देखते ही देखते विलुप्त हो गए हैं, मेरठ शहर के जल निकाय
    नदियाँ

     25-05-2022 08:12 AM


  • कवक बुद्धि व जागरूकता के साक्ष्य, अल्पकालिक स्मृति, सीखने, निर्णय लेने में हैं सक्षम
    पेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें

     24-05-2022 07:35 AM


  • मेरे देश की धरती है दुर्लभ पृथ्वी खनिजों का पांचवां सबसे बड़ा भंडार, फिर भी इनका आयात क्यों?
    खनिज

     23-05-2022 08:43 AM


  • जमीन पर सबसे तेजी से दौड़ने वाला जानवर है चीता
    व्यवहारिक

     22-05-2022 03:34 PM


  • महान गणितज्ञों के देश में, गणित में रूचि क्यों कम हो रही है?
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     21-05-2022 11:18 AM


  • आध्यात्मिकता के आधार पर प्रकृति से संबंध बनाने की संभावना देती है, बायोडायनामिक कृषि
    भूमि प्रकार (खेतिहर व बंजर)

     20-05-2022 10:02 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id