अहिक्षेत्र का किला

मेरठ

 12-03-2018 11:16 AM
वास्तुकला 1 वाह्य भवन

अहिक्षेत्र प्राचीन भारत के 16 महाजनपदों में से एक पंचाल की राजधानी थी। यह संभवतः प्राचीन भारत के सबसे बड़े और विकसित शहरों में से एक था। यहाँ से प्राप्त अवशेष यहाँ की अद्भुत वास्तुकला व मूर्तिकला को प्रदर्शित करते हैं। नई दिल्ली में स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय में रखी गयी गंगा और यमुना की मिटटी की मूर्तियाँ यहीं की खुदाई में प्राप्त हुयी थी। अहिक्षेत्र एक किलाबंद शहर था जिसके किले की दीवारे मिटटी के पके इंटों से बनायीं गयी है तथा यहाँ की दीवारे काफी मोटी हैं जो इस किले को अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करती हैं। यह किला आज भी अपने जीर्ण शीर्ण हालत में खड़ा हुआ अपने वैभव के काल को प्रदर्शित कर रहा है। यहाँ की किलेबंदी कुल लगभग तीन मील की है जो की त्रिकोणात्मक घेरे में है। इस किले के अन्दर कई ऊँचे टीले व जल के तालाब स्थित हैं जो की विभिन्न महलों व जल की उपलब्धता की तरफ संकेत करते हैं।

यहाँ का सबसे ऊँचा टीला कुल 75 फुट ऊँचा है। अहिक्षेत्र में सबसे पहले खुदाई का जिम्मा अलेक्जेंडर कर्निघम ने उठाया था और उन्होंने वहां पर खुदाई करवाई और कालांतर में फ्यूरर ने खुदाई को आगे बढाया। खुदाई में प्रयुक्त सामान आज भी अहिक्षेत्र में दिखाई दे जाते हैं और यह भी साफ़ होता है की किस पैमाने पर वहां पर खुदाई कराइ गई थी। बाद में सन 1940-44 में यहाँ पर कुछ चुने हुए स्थानों की खुदाई हुई जिसमें भूरी मिट्टी के ठीकरे मिले। जैसा की इस स्थान का नाम महाभारत में कई स्थानों पर दिखाई देता है, जिससे यह साफ़ हो जाता है की यह अवश्य ही महाभारत काल में एक विशाल शहर होगा। यहाँ से शुंग, कुषाण और गुप्तकाल की अनेक मुद्राएँ, पत्थर और मिट्टी की मूर्तियाँ मिलीं। बाद के काल के रहने के स्थान, सड़कें और मंदिरों के अवशेष भी मिले हैं। जो इस स्थान के लम्बे समय तक के प्रयोग को प्रदर्शित करती हैं तथा साथ ही साथ इस स्थान के महत्व की तरफ भी ध्यान आकर्षित करती हैं। अहिक्षेत्र अपनी परम पराकाष्ठा पर गुप्त काल में पंहुचा था जब यहाँ पर कई त्रिकोण आकार के मंदिर बने थे। चीनी चात्री युवान च्वांग ने यहाँ पर 10 बौद्ध विहार और नौ मंदिर देखे थे। अहिक्षेत्र का पतन 11 विं शताब्दी में हो गया था।

1.आर्केयोलाजिकल सर्वे ऑव इंडिया, भाग 1, कनिंघम
2.राइज एंड फाल ऑफ़ द इम्पीरियल गुप्ताज, अश्विनी अग्रवाल
3.इनसाइक्लोपीडिया ऑफ़ इंडियन जियोग्राफी, वॉल्यूम 1, सुबोध कपूर

RECENT POST

  • अन्य शिकारी जानवरों पर भारी पड़ रही हैं, बाघ केंद्रित संरक्षण नीतियां
    निवास स्थान

     25-06-2022 09:49 AM


  • हम में से कई लोगों को कड़वे व्यंजन पसंद आते हैं, जबकि उनकी कड़वाहट कई लोगों के लिए सहन नहीं होती
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     24-06-2022 09:49 AM


  • भारत में पश्चिमी शास्त्रीय संगीत धीरे-धीरे से ही सही, लेकिन लोकप्रिय हो रहा है
    ध्वनि 1- स्पन्दन से ध्वनि

     23-06-2022 09:30 AM


  • योग शरीर को लचीला ही नहीं बल्कि ताकतवर भी बनाता है
    य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला

     22-06-2022 10:23 AM


  • प्रोटीन और पैसों से भरा है कीड़े खाने और खिलाने का व्यवसाय
    तितलियाँ व कीड़े

     21-06-2022 09:54 AM


  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता गलत सूचना उत्पन्न करने और साइबरसुरक्षा विशेषज्ञों के साथ छल करने में है सक्षम
    संचार एवं संचार यन्त्र

     20-06-2022 08:51 AM


  • विस्मयकारी है दो जंगली भेड़ों के बीच का हिंसक संघर्ष
    व्यवहारिक

     19-06-2022 12:13 PM


  • कैसे, मौत से भी लड़ने का साहस दे रही है, मशरूम
    फंफूद, कुकुरमुत्ता

     18-06-2022 10:08 AM


  • उष्णकटिबंधीय पक्षी अधिक रंगीन क्यों होते हैं? मनुष्य भी कर रहे हैं प्रजातियों के दृश्य वातावरण को प्रभावित
    पंछीयाँ

     17-06-2022 08:10 AM


  • भारत के सात पवित्र तीर्थस्थल, दिव्य सप्तपुरियों का दर्शन, सर्वाधिक पूजनीय शहर है, वाराणसी
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     16-06-2022 08:47 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id