उत्तर प्रदेश पुरातत्व और लखनऊ

लखनऊ

 20-02-2018 12:54 PM
वास्तुकला 2 कार्यालय व कार्यप्रणाली

उत्तर प्रदेश भारत के सबसे ज्यादा घनी आबादी वाला राज्य है, यह राज्य प्राचीन काल से ही मानव बसाव के लिये अत्यन्त महत्वपूर्ण रहा था जिसका प्रतिफल यह हुआ कि यहाँ पर कई पुरात्त्विक स्थलों का निर्माण हुआ। आज उत्तरप्रदेश भारत के सबसे ज्यादा पुरातात्विक रूप से धनी प्रदेशों में से एक है। यहाँ के धरोहरों का रख-रखाव भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, प्रदेश पुरातत्व विभाग के अन्तर्गत आता है। जैसा की भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का निर्माण 19वीं सदी में किया गया था वहीं प्रदेश पुरातत्व विभाग का निर्माण भारत के आजादी के बाद हुआ। उत्तर प्रदेश के कई बहुमूल्य धरोहर प्रदेश पुरातत्व विभाग के अंतर्गत आते हैं। यदि प्रदेश पुरातत्व के निर्माण की प्रक्रिया को देखें तो निम्न बातें सामने आती हैं। स्वतंत्रता के बाद, तत्कालीन शिक्षा मंत्री डॉ संपूर्णानंद की अध्यक्षता में यू.पी. की सरकार द्वारा गठित समिति की सिफारिशों पर राज्य पुरातत्व विभाग की स्थापना 1951 में हुई। पुरातात्विक साहित्य प्रकाशित करने और पुरातत्व के बारे में जन जागरूकता बनाने के लिए, इस संस्था के लिए अनिवार्य मुख्य कार्य / उद्देश्य प्राचीन स्मारकों और स्थलों को संरक्षित करना, पुरातात्विक अन्वेषण करना था। आर्य नगर, लखनऊ में एक किराए की इमारत में पुरातत्व अधिकारी का कार्यालय स्थापित किया गया था। 1974 के दौरान विभाग का कार्यालय जवाहर भवन, लखनऊ के कार्यालय परिसर में स्थानांतरित कर दिया गया। श्रीनगर, गढ़वाल (उत्तरांचल अब उत्तराखण्ड) में पहली क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई की स्थापना की गई, जिसे बाद में अल्मोड़ा में स्थानांतरित कर दिया गया। लखनऊ का कार्यालय 150 वर्ष पुरानी इमारत में रोसन-उद-दौला कोठी में स्थानांतरित किया गया था। यह नवाब नसीरुद्दीन हैदर के मंत्री रोशन-उद-दौला द्वारा बनाया गया था। इसके बाद पौड़ी, झांसी, गोरखपुर, वाराणसी, आगरा और इलाहाबाद में अधिक क्षेत्रीय इकाइयां अस्तित्व में आईं। अपनी गतिविधियों को और अधिक प्रोत्साहन देने के लिए 1996 के दौरान इस संस्था की स्थिति को संस्कृति विभाग के तहत एक स्वतंत्र निदेशालय तक बढ़ाया गया। वर्तमान काल में यह विभाग उत्तरप्रदेश सरकार द्वार पारित किये गये बजट पर कार्य करता है। यदि उत्तरप्रदेश के पुरातत्व सम्बन्धित बजट देखा जाये तो यह संस्कृति विभाग के अंतर्गत आता है जिसमें संग्रहालय, पुस्तकालय व संस्कृति के लिये बजट का आवंटन किया जाता है। उत्तर प्रदेश के संस्कृति का बजट एक आधार पर ना चलकर प्रति वर्ष बदलता रहता है तथा संग्रहालयों व पुस्तकालयों का बजट तो निर्धारित है परन्तु पुरातत्व के बजट का जिक्र पूरे बजट में नही दिखाई देता है। बजट 2018-19 में यह राजस्व प्राप्तियाँ दर्शायी गयी हैं जिसके अनुसार संग्रहालयों, पुस्तकालयों व अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों से कुल 52 करोड़ की राशि प्राप्त हुई है। बजट के निर्धारण व उदासीनता के कारण उत्तरप्रदेश की कितनी ही राज्य संरक्षित इमारतों का रख-रखाव नही हो पा रहा है इस कारण कितने ही धरोहरों की हानि हो रही है। अकेले लखनऊ में ही 14 धरोहरें प्रदेश पुरातत्व के अन्तर्गत आती है तथा ये धरोहरे बड़ी संख्या में सैलानियों व पर्यटकों को आकर्शित करती हैं। ये धरोहरें लकनऊ में बड़ी संख्या में पर्यटन व नौकरी बढाने का कार्य करने का मद्दा रखती हैं। इसका सीधा उदाहरण ताजमहल से लिया जा सकता है। प्रथम चित्र में प्रदेश पुरातत्व द्वारा संरक्षित आलम बाग का पुराना चित्र दिखाया गया है, व द्वितीय चित्र में जिला विकास प्राधिकरण द्वारा संरक्षित हजरत महल के मकबरे को प्रदर्शित किया गया है। 1. बजट, 2018-19 2. बजट, 2017-18 3. http://archaeology.up.nic.in/protected_monuments.htm 4. http://archaeology.up.nic.in/introduction.htm



RECENT POST

  • खट्टे-मीठे विशिष्ट स्वाद के कारण पूरे विश्व भर में लोकप्रिय है, संतरा
    साग-सब्जियाँ

     30-11-2020 09:24 AM


  • सोने-कांच की तस्वीरों में आज भी जीवित है, कुछ रोमन लोगों के चेहरे
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     29-11-2020 07:21 PM


  • कोरोना महामारी बनाम घरेलू किचन गार्डन
    पेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें

     28-11-2020 09:06 AM


  • लखनऊ की परिष्कृत और उत्कृष्ट संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है, इत्र निर्माण की कला
    गंध- ख़ुशबू व इत्र

     27-11-2020 08:39 AM


  • भारतीय कला पर हेलेनिस्टिक (Hellenistic) कला का प्रभाव
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     26-11-2020 09:20 AM


  • पाक-कला की एक उत्‍कृष्‍ट शैली लाइव कुकिंग
    द्रिश्य 2- अभिनय कला

     25-11-2020 10:32 AM


  • आत्मा और मानव जाति की मृत्यु, निर्णय और अंतिम नियति से सम्बंधित है, एस्केटोलॉजी
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     24-11-2020 08:40 AM


  • मानवता की सबसे बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धियों में से एक है, लेजर इंटरफेरोमीटर गुरुत्वीय-तरंग वेधशाला द्वारा किये गये अवलोकन
    सिद्धान्त I-अवधारणा माप उपकरण (कागज/घड़ी)

     22-11-2020 10:34 AM


  • लखनऊ की अत्यंत ही महत्वपूर्ण धरोहर शाह नज़फ़ इमामबाड़ा
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     22-11-2020 11:21 AM


  • लखनऊ की दुर्लभ तस्‍वीरों का संकलन
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     21-11-2020 08:29 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.