लखनऊ के पिक्चर गैलरी में मौजूद चित्र

लखनऊ

 09-02-2018 10:27 AM
द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

लखनऊ में हुसैनाबाद इमामबाड़े के घंटाघर के समीप 19वीं शताब्दी में बनी यह पिक्चर गैलरी है। जिसे अवध के तीसरे बादषाह मोहम्मद अली शाह ने सन् 1838 में बनवाया था। इसे बरदरी के नाम से भी जाना जाता हैं क्यूंकि इसके बारह दरवाज़े हैं| यह इमारत खासतोर पर शाही लोगों द्वारा छायावास के लिए इस्तेमाल करते थे| और ये भी कहा जाता हैं कि नवाबों के समय यहां पर इस इमारत में नवाबों की अलदात चलती थी। लेकिन नवाबों का राज्य खत्म होने के बाद इस इमारत को पिक्चर गैलरी में तबदील कर दिया गया।यहां लखनऊ के लगभग सभी नवाबों की तस्वीरें देखी जा सकती हैं। यह गैलरी लखनऊ के उस अतीत की याद दिलाती है जब यहां नवाबों का डंका बजता था।
पिक्चर गैलरी के सामने, हरे लॉन और पेड़ों से घिरा हुआ एक सुंदर तालाब है। पिक्चर गैलरी तक पहुंचने के लिए लगभग 30 सीढ़ियों को पार करना पड़ता है यहाँ पर उस वक़्त की तस्वीरें हैं जब न ही तो डीएसएलआर कैमरे हुआ करते थे नहीं प्लास्टिक पेंट और ऑइल कलर। फिर भी यहां पर जो तस्वीरें हैं वो सभी देखने लायक हैं। यहां पर जो तस्वीरें हैं उनको ऑइल पेंट या वाटर कलर से नहीं तैयार किया गया है बल्कि हीरे जवाहरात के पाउडर और फलों के रस से चित्रकारों ने इन दुर्लभ चित्रों को तैयार किया था। यहां प्रदर्शित नवाबों के चित्रों से उन दिनों में उनके द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले वेशभूषा और गहने की जानकारी मिलती है। यहां पर जितनी भी तस्वीरें हैं वह सब मूविंग पिक्चर हैं यानी अगर आप आसिफुद्दौला की जूती की तरह दाहें तरफ से देखेंगे तब भी वह आपके सामने रहेगी और अगर बाहें तरफ से देखेंगे तब भी जूती आपको एक दम अपनी तरफ ही दिखेगी। इसी तरह कुछ तस्वीरों पर सूरज की किरणें और चांद की रौशनी भी पड़ रही है जो एक अद्भुत दृश्य बना रही है और सुबह और शाम को रेखांकित कर रही है। इस पिक्चर गैलरी के सामने मीना बाज़ार हैं बरदारी में मस्जिद और हमाम(स्नान अनुभाग) भी हैं



RECENT POST

  • भारत में जैविक कृषि आंदोलन व सिद्धांत का विकास, ब्रिटिश कृषि वैज्ञानिक अल्बर्ट हॉवर्ड द्वारा
    भूमि प्रकार (खेतिहर व बंजर)

     20-05-2022 10:03 AM


  • लखनऊ की वृद्धि के साथ हम निवासियों को नहीं भूलना है सकारात्मक पर्यावरणीय व्यवहार
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     19-05-2022 09:47 AM


  • एक समय जब रेल सफर का मतलब था मिट्टी की सुगंध से भरी कुल्हड़ की स्वादिष्ट चाय
    म्रिदभाण्ड से काँच व आभूषण

     18-05-2022 08:47 AM


  • उत्तर प्रदेश में बौद्ध तीर्थ स्थल और उनका महत्व
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     17-05-2022 09:52 AM


  • देववाणी संस्कृत को आज भारत में एक से भी कम प्रतिशत आबादी बोल व् समझ सकती है
    ध्वनि 2- भाषायें

     17-05-2022 02:08 AM


  • बाढ़ नियंत्रण में कितने महत्वपूर्ण हैं, बीवर
    व्यवहारिक

     15-05-2022 03:36 PM


  • प्रारंभिक पारिस्थिति चेतावनी प्रणाली में नाजुक तितलियों का महत्व, लखनऊ में खुला बटरफ्लाई पार्क
    तितलियाँ व कीड़े

     14-05-2022 10:09 AM


  • लखनऊ सहित विश्व में सबसे पुराने और शानदार स्विमिंग पूलों या स्नानागारों का इतिहास
    य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला

     13-05-2022 09:41 AM


  • भारत में बढ़ती गर्मी की लहरें बन रही है विशेष वैश्विक चिंता का कारण
    जलवायु व ऋतु

     11-05-2022 09:10 PM


  • लखनऊ में रहने वाले, भाड़े के फ़्रांसीसी सैनिक क्लाउड मार्टिन का दिलचस्प इतिहास
    उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

     11-05-2022 12:11 PM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id