मुन्शी नवल किशोर लखनऊ में स्थित एक पुस्तक प्रकाशक थे। वे अलीगढ़ के ज़मीनदार पंडित जमुना प्रसाद भार्गवे के सुपुत्र थे। इनका जन्म 03 जनवरी 1836 में हुआ था और मृत्यु सन 1885, दिल्ली में हुआ था। इन्हें भारत का काक्सटन कहा जाता था। मान्यता है की विलियम काक्सटन ( सन 1422-1491) ने इंग्लैंड में सन 1426 में पहली बार मुद्रणालय शुरू किया और वे छापित किताबों के पहले खुदरा व्यापारी थे। ठीक उसी तरह माना जाता है मुन्शी नवल किशोर ने एशिया का पहला छापखाना सन 1858 में लखनऊ में शुरू किया वह भी मात्र 22 वर्ष की आयु में। आज लखनऊ का नवल किशोर प्रेस एंड बुक डिपो एशिया का सबसे पुराना मुद्रण और प्रकाशन व्यवसाय माना जाता है। इस छापखाने से तक़रीबन 5000 से भी अधिक किताबें मुद्रित और प्रकाशित की गयी हैं। अरबी, बंगाली, हिंदी, अंग्रेजी, मराठी, पंजाबी, पश्तो, संस्कृत, पर्शियन इन सभी भाषाओं में सन 1858 से लेकर 1885 तक क़िताबें प्रकाशित की गयी। मिर्ज़ा ग़ालिब और अलम्मा सईद शम्शुल्ला कादरी ये मुन्शीजी के कई प्रशंसकों में शामिल थे। अलम्मा सईद शम्शुल्ला कादरी जी ने अपनी कई क़िताबें इसी मुद्रणालय से छपवाई। शेख सदुल्लाह मसीह पानीपती द्वारा रामायण-ए- मसीह ये पर्शियन में लिखी रामायण भी यही से प्रकाशित की गयी थी। तुलसीदास की दोहावली, गोमती-लहरी, मार्कंडेय पुराण, दिवान-ए-ग़ाफिल, निति सुधार तरंगिणी आदि क़िताबें और ग्रन्थ यही से छापे गए। सन 2015 में मुन्शीजी के वारिसों ने दिल्ली स्थित रेखता इस संस्था के साथ मिलकर करीब 6000 क़िताबें जो यहाँ से प्रकाशित की गयी थीं उनका संरक्षण और अंकरुपण करने का जिम्मा उठाया है। सन 1970 में भारत सरकार ने मुन्शी नवल किशोर के कार्य को सरहाने के लिए डाक का टिकट बनवाया। 1. https://timesofindia.indiatimes.com/city/lucknow/Naval-Kishore-heritage-books-restored-Urdu-books-go-digital/articleshow/47020775.cms 2.https://archive.org/details/@navalkishorepress?and%5B%5D=subject%3A%22Naval+Kishor+Press+Publications%22&sort=&page=2 3. https://en.wikipedia.org/wiki/Munshi_Newal_Kishore 4. https://openlibrary.org/publishers/Munshi_Naval_Kishore
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