भारत में कैसे मनाया जाता है धार्मिक और मौसमी बदलाव का प्रतीक पर्व , मकर संक्रांति?

लखनऊ

 14-01-2022 02:45 PM
विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

हमारी भारतीय संस्कृति एवं पावन तीज-त्यौहार हमारे पूर्वजों द्वारा दी गई ऐसी बहुमूल्य धरोहरें हैं, जिन्हें हम जितना अधिक बांटते हैं, वह उतनी ही अधिक विस्तार करती हैं। उदाहरण के तौर पर हजारों वर्षों से मनाएं जा रहे भारतीय त्योहारों के बारे में दुनियां जितना अधिक जान रही है, वह उतनी ही तीव्रता के साथ हमारे पारंपरिक तौर तरीकों और त्योहारों को अपना रही है। प्रमाण के रूप में होली एवं दीपावली हमारे समक्ष हैं, जिनकी विशिष्टता और संपन्नता के कारण इस पर्व को दुनिया ने हाथों-हाथ अपना लिया, और खूब प्रेम दिया। लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा की मकर संक्रान्ति जैसे लोकपर्व भी धीरे-धीरे अपनी लोकप्रियता का दायरा बढ़ा रहे हैं।
मकर संक्रांति, उत्तरायण, माघी या बस संक्रांति को बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल में पौष संक्रांति के रूप में तथा नेपाल में माघ संक्रांति के रूप में भी जाना जाता है। यह त्यौहार सूर्य देवता को समर्पित है। जहाँ सम (न) क्रांति का अर्थ है, 'स्थानांतरण'। दरअसल इस दिन को सूर्य के संक्रमण दिवस के रूप में माना जाता है, क्यों की यहां से सूर्य हिंदू कैलेंडर में उत्तर की ओर बढ़ते है। यह त्योहार साल में केवल एक बार उस दिन मनाया जाता है, जिस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जो ग्रेगोरियन कैलेंडर (Gregorian calendar) के अनुसार साल के पहले माह जनवरी के महीने से मेल खाता है। हालाँकि लीप वर्ष (leap year) में एक दिन जुड़ने के कारण मकर संक्रांति की तिथि थोड़ी भिन्न हो सकती है। आमतौर पर यह 14 जनवरी के दिन मनाया जाता है, लेकिन लीप वर्ष पर यह 15 जनवरी को पड़ता है। मकर संक्रांति से जुड़े उत्सवों को असम में माघ बिहू, पंजाब में माघी, हिमाचल प्रदेश में माघी साजी, जम्मू में माघी संग्रांद या उत्तरायण, हरियाणा में सकरात, मध्य भारत में सुकरत, तमिलनाडु में पोंगल, जैसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है। इसे गुजरात में उत्तरायण, और उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड में खिचड़ी संक्रांति या घुघुती, बिहार में दही चुरा, ओडिशा में मकर संक्रांति और कर्नाटक, महाराष्ट्र, गोवा, पश्चिम बंगाल में पौष संक्रांति भी कहा जाता है।
भारत के अलावा विदेशों में भी इसे विभन्न नामों से संबोधित किया जाता है, जैसे:
१.माघ संक्रांति (नेपाल),
२.सोंगक्रान (थाईलैंड),
3.थिंगयान (म्यांमार),
४.मोहन सोंगक्रान “Môha Sángkran”(कंबोडिया)
पूरे भारत में मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी के साथ सूर्य देवता की पूजा की जाती है। यह एक सामूहिक और परिवार के साथ मिलकर मनाया जाने वाला उत्सव है। इस अवसर पर घरों में रंगीन सजावट की जाती है, ग्रामीण बच्चे घर-घर जाते हैं, गाते हैं और अनेक स्थानों पर मेले, नृत्य, पतंगबाजी, अलाव और दावतें आयोजित की जाती हैं। हर बारह साल में, हिंदू मकर संक्रांति के दिन, दुनिया की सबसे बड़ी सामूहिक तीर्थयात्रा में से एक कुंभ मेले का आयोजन किया जाता हैं। जहाँ इस मेले में अनुमानित 40 से 100 मिलियन लोग शामिल होते हैं। इस मेले में वे सूर्य की प्रार्थना करते हैं, गंगा नदी और यमुना नदी के प्रयाग संगम पर स्नान करते हैं। आदि गुरु शंकराचार्य को इस परंपरा का उद्घोषक माना जाता है। किसानों के लिए मकर संक्रांति पर्व विशेषतौर पर अच्छी उपज के लिए प्रकृति को धन्यवाद देने का अवसर होता है। शुरुआत में मकर संक्रांति मनाने का मूल उद्द्येश्य उत्तरायण की शुरुआत को चिह्नित करना था, उत्तरायण अर्थात जब सूर्य उत्तर की ओर बढ़ना शुरू कर देता है। मकर संक्रांति 1500 साल पहले शीतकालीन संक्रांति को चिह्नित करता था। लेकिन समय के साथ, पृथ्वी की धुरी में धीमी गति से परिवर्तन के कारण, तिथियां मेल नहीं खाती हैं। इस दिन देशभर में एक दूसरे को मिठाईयां बांटी जाती है, जिसके पीछे यह अवधारणा है कि लोग आपस में होने वाले किसी भी झगड़े या समस्या को भूलकर आनंद और शांति से रहें। साथ ही गुड़ और तिल की मिठाई का उपयोग करने का दूसरा कारण यह है कि वे गर्म भोजन हैं और सर्दियों में खाने के लिए लाभप्रद होते हैं। व्यंजनों के अलावा पतंगबाज़ी के संदर्भ में भी यह त्योहार विशेष तौर पर बच्चों में खासा लोकप्रिय है। मकर संक्रांति की सुबह-सुबह पारंपरिक पतंगबाजी भी की जाती है। यह भी मान्यता है कि इस दिन धूप में बैठने से सर्दी के मौसम में हमारे शरीर में होने वाले संक्रमण, बीमारी या खराब बैक्टीरिया मर जाते हैं। मकर संक्रांति का मौसमी और धार्मिक दोनों स्तरों पर काफी महत्व है। इसे हिंदू कैलेंडर के सबसे शुभ दिनों में से एक माना जाता है। इस शुभ दिन पर, सूर्य मकर या मकर राशि में प्रवेश करता है, जो सर्दियों के महीनों के अंत और लंबे दिनों की शुरुआत का प्रतीक है। साथ ही यह माघ महीने की शुरुआत का भी प्रतीक है। मकर संक्रांति के दिन से ही सूर्य उत्तरायण यात्रा शुरू करते है। इसलिए इस पर्व को उत्तरायण के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू पौराणिक कथा के अनुसार, संक्रांति को देवता माना गया है। दरअसल संक्रांति ने शंकरसुर नाम के एक राक्षस का वध किया था। मकर संक्रांति के अगले दिन को कारिदीन या किंक्रांत के नाम से जाना जाता है। इस दिन देवी ने किंकरासुर नामक राक्षस का वध किया था। द्रिकपंचांग के अनुसार, "मकर संक्रांति के 40 घंटों (भारतीय स्थानों के लिए लगभग 16 घंटे यदि हम 1 घटी अवधि को 24 मिनट के रूप में मानते हैं) के बीच का समय शुभ कार्यों के लिए अच्छा माना जाता है "हिंदू पंचांग संक्रांति की उम्र, रूप, वस्त्र, दिशा और गति के बारे में जानकारी प्रदान करते है। मकर संक्रांति की मुख्य गतिविधियों जैसे स्नान करना, भगवान सूर्य को नैवेद्य (देवता को अर्पित भोजन), दान या दक्षिणा देना, श्राद्ध अनुष्ठान करना और उपवास या पारण करना, आदि को पुण्य काल के दौरान सम्पन्न की जानी चाहिए। शास्त्रों के अनुसार, दक्षिणायन भगवान की रात या नकारात्मकता के संकेत का प्रतीक है, और उत्तरायण को भगवान के दिन का प्रतीक या सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। चूंकि इस दिन से सूर्य उत्तर की ओर अपनी यात्रा शुरू करते है, इसलिए लोग पवित्र स्थानों पर गंगा, गोदावरी, कृष्णा, यमुना नदी में पवित्र डुबकी लगाते हैं और मंत्रों का जाप आदि करते हैं। हालाँकि आम तौर पर सूर्य सभी राशियों को प्रभावित करता है, लेकिन माना जाता है की धार्मिक दृष्टि से सूर्य का कर्क और मकर राशि में प्रवेश अत्यंत फलदायी होता है। मकर संक्रांति से पहले सूर्य दक्षिणी गोलार्द्ध में होता है, इसी कारण भारत में शीतकाल में रातें लंबी और दिन छोटे होते हैं। मकर संक्रांति पर मौन, हल्दी कुमकुम समारोह ब्रह्मांड में आदि-शक्ति की तरंगों को आमंत्रित करता है। भौगोलिक भिन्नता के साथ ही संक्रांति की गतिविधियां एवं नाम बदल जाते हैं जैसे: 1. असम: असम में इसे माघ बिहू या मगहर दोमाही (মাঘৰ মাহী) भी कहा जाता है, यह असम, में मनाया जाने वाला एक फसल उत्सव है, जो महीने में कटाई के मौसम के अंत का प्रतीक है। जिसमें एक सप्ताह तक दावत होती है। माघ बिहू के दौरान असम के लोग विभिन्न नामों से चावल के केक बनाते हैं। जैसे शुंग पिठा, तिल पिठा आदि और नारियल की कुछ अन्य मिठाइयाँ जिन्हें लारू या लस्करा कहा जाता है। 2. गुजरात: मकर संक्रांति को गुजराती में उत्तरायण कहा जाता है। गुजरात राज्य में एक प्रमुख त्योहार है जो दो दिनों तक चलता है। पतंग उड़ाने के लिए गुजराती लोग इस त्योहार का बेसब्री से इंतजार करते हैं। उंधियू (सर्दियों की सब्जियों का मसालेदार, बेक्ड मिश्रण) और चिक्की (तिल (तिल), मूंगफली और गुड़ से बनी) इस दिन विशेष त्यौहार व्यंजन हैं। 3. हरियाणा और दिल्ली: हरियाणा और दिल्ली ग्रामीण क्षेत्रों में "सक्रांत", पश्चिमी यूपी और राजस्थान और पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्रों के समान ही उत्तर भारत के पारंपरिक हिंदू अनुष्ठानों के साथ मनाया जाता है। इस दौरान लोग पवित्र नदियों में, विशेष रूप से यमुना में लोग स्नान करते हैं। लोग देसी घी से खीर, चूरमा, हलवा बनाते हैं और तिल-गुड़ (तिल और गुड़) के लड्डू या चिक्की बांटते हैं। महिलाएं अपने ससुराल वालों को "मनाना" नाम का उपहार देती हैं। 4. जम्मू और कश्मीर: जम्मू में, मकर संक्रांति को संस्कृत से व्युत्पन्न उत्तरायण के रूप में मनाया जाता है। कल्पिक रूप से, इस त्योहार का वर्णन करने के लिए 'उत्तरेण' या 'अत्तरानी' शब्द का भी इस्तेमाल किया जाता है। कश्मीर में मकर संक्रांति के अवसर पर विवाहित बेटियों के घर खिचड़ी और अन्य खाद्य सामग्री भेजने की भी परंपरा है। इस दिन पवित्र स्थानों और तीर्थों पर मेलों का आयोजन किया जाता है। 5. महाराष्ट्र: महाराष्ट्र में मकर संक्रांति के दिन लोग बहुरंगी हलवा ( चाशनी में लिपटे चीनी के दाने) और तिल-गुल के लड्डुओं का आदान-प्रदान करते हैं। सद्भावना के प्रतीक के रूप में तिल-गुल का आदान-प्रदान करते हुए लोग एक-दूसरे को बधाई देते हैं। 6.ओडिशा: इस त्योहार को ओडिशा में मकर संक्रांति के रूप में जाना जाता है, जहां लोग मकर चौला (ओडिया) तैयार करते हैं। यहां यह उन भक्तों के लिए खगोलीय रूप से महत्वपूर्ण है, जो महान कोणार्क मंदिर में सूर्य देव की पूजा उत्साह के साथ करते हैं, क्योंकि अब से सूर्य उत्तर की ओर अपना वार्षिक झुकाव शुरू करता है। 7. उत्तर प्रदेश: इस त्योहार को उत्तर प्रदेश में किचेरी के नाम से जाना जाता है, और इसमें स्नान की रस्म शामिल होती है। उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद और वाराणसी और उत्तराखंड में हरिद्वार जैसे इस पवित्र स्नान के लिए 20 लाख से अधिक लोग अपने-अपने पवित्र स्थानों पर एकत्रित होते हैं। (महामारी के दौरान यह बाधित हो सकता है।) 8.उत्तराखंड: मकर संक्रांति उत्तराखंड में एक बेहद लोकप्रिय त्योहार है। इसे राज्य के विभिन्न हिस्सों में उत्तरायणी, खिचड़ी संग्रांद, पुस्योदिया, घुघुतीया, घुघुती त्यार, काले कौवा, मकरैन, मकरैनी, घोल्डा, ग्वालदा और चुन्यार आदि विभिन्न नामों से जाना जाता है। उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में, मकर संक्रांति (घुघुती) बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है। यहाँ का प्रसिद्ध उत्तरायणी मेला प्रत्येक वर्ष जनवरी के महीने में मकर संक्रांति के अवसर पर बागेश्वर शहर में आयोजित किया जाता है। जानकारों के अनुसार बीसवीं शताब्दी की शुरुआत में भी, बागेश्वर में वार्षिक उत्तरायणी मेले में लगभग 15,000 लोग आते थे, और यह कुमाऊं मंडल का सबसे बड़ा मेला था।

संदर्भ
https://bit.ly/33vY9NR
https://bit.ly/3tt2354
https://bit.ly/31VHm6m
https://bit.ly/3noU05o


चित्र संदर्भ   
1. मकर संक्रांति के विभिन्न अनुष्ठानों को दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)
2. डूबते सूरज को दर्शाता एक चित्रण (flickr)
3. कुम्भ मेले के परिदृश्य को दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)
4. मकर संक्रांति के पारंपरिक व्यंजनों को दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)
5. माघ बिहू के दौरान असम के लोग विभिन्न नामों से चावल के केक बनाते हैं, जिनमे से एक को दर्शाता एक चित्रण (istock)
6. भारत के कई हिस्सों में पतंगबाजी मकर संक्रांति की परंपरा है। जिसको दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)
7. लड्डू और चिक्की को दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)
8. मकर संक्रांति अनुष्ठान को दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)
9 . तिल के लड्डुओं को दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)
10. महान कोणार्क मंदिर को दर्शाता एक चित्रण (flickr)
11. गंगा स्नान को दर्शाता एक चित्रण (flickr)
12. उत्तरायणी मेला, 2018 के दौरान बागेश्वर में बागनाथ मंदिर।को दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)



RECENT POST

  • लखनऊ के निकट कुकरैल रिजर्व मगरमच्छों की लुप्तप्राय प्रजातियों को संरक्षण प्रदान कर रहा है
    रेंगने वाले जीव

     22-01-2022 10:26 AM


  • कैसे शहरीकरण से परिणामी भीड़ भाड़ को शहरी नियोजन की मदद से कम किया जा सकता है?
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     21-01-2022 10:05 AM


  • भारवहन करने वाले जानवरों का मानवीय जीवन में महत्‍व
    स्तनधारी

     20-01-2022 11:46 AM


  • भारत में कुर्सी अथवा सिंहासन के प्रयोग एवं प्रयोजन
    घर- आन्तरिक साज सज्जा, कुर्सियाँ तथा दरियाँ

     19-01-2022 11:08 AM


  • केरल के मछुआरों को अतिरिक्त आय प्रदान करती है, करीमीन मछली
    मछलियाँ व उभयचर

     17-01-2022 10:52 AM


  • भगवान अयप्पा की उत्पत्ति की पौराणिक कथा, हमारे लखनऊ में दक्षिण भारतीय शैली में इनका मंदिर
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     17-01-2022 05:37 AM


  • स्नोबोर्डिंग के लिए बुनियादी सुविधाएं और प्रशिक्षण प्रदान करते हैं, भारत के कुछ स्थान
    हथियार व खिलौने

     16-01-2022 12:47 PM


  • कौन से हैं हमारे लखनऊ शहर के प्रसिद्ध, 100 वर्ष से अधिक पुराने कॉलेज?
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     15-01-2022 06:36 AM


  • भारत में कैसे मनाया जाता है धार्मिक और मौसमी बदलाव का प्रतीक पर्व , मकर संक्रांति?
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     14-01-2022 02:45 PM


  • लखनऊ में बढ़ रही है, विदेशी सब्जियों की लोकप्रियता तथा खेती
    साग-सब्जियाँ

     13-01-2022 06:58 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id