उच्‍च स्‍तरीय व दुर्लभ हिन्‍दी साहित्‍य को इंटरनेट पर बढ़ावा देने हेतु न्‍यूजीलैंड से जन्मी पत्रिका भारत दर्शन

लखनऊ

 28-12-2021 12:54 PM
ध्वनि 2- भाषायें

दुनिया की पहली ऑनलाइन हिंदी पत्रिका (भारत दर्शन) 1996 में शुरू हुई जो आज भी अपनी वेबसाइट (Website) पर नए मुद्दों को जोड़ रही है। इसका मुख्‍य उद्देश्‍य उच्च स्तरीय साहित्य व लेखन को बढावा देना व लुप्त होती हुई हिन्दी विधाओं को जीवित रखना है। इसकी शुरुआत न्‍यूजीलैंड(New Zealand) के ऑकलैंड (Auckland) से भारतीय मूल के एक पत्रकार रोहित कुमार ने अपनी निजी पहल पर की थी। इसके पश्चात भारत से “दैनिक जागरण” और तत्पश्चात “वेब दुनिया” इंटरनेट पर प्रकाशित हुए।
भारत दर्शन एक साहित्यिक पत्रिका है एवं हिन्दी भाषा के प्रचार और प्रसार में प्रयासरत है।समाचार से संबंधित पत्रिकाओं और समाचार पत्रों को छोड़कर, आज भी भारतीय हिंदी भाषा में कोई नई उपयोगी सामग्री नहीं बना रहे हैं। आइए हम न्यू ज़ीलैंड के रोहित कुमार हैप्पी के काम से प्रेरणा लें और भारत दर्शन वेबसाइट (Website) को सब्सक्राइब (subscribe) करें- https://bit।.y/3EyIIS4.
रोहित कुमार ‘हैप्‍पी’ न्‍यूजीलैंड में हिंदी न्‍यू मीडिया (new media) के माध्‍यम से हिंदीभाषा, लेखन व साहित्‍य के प्रचार-प्रसार हेतु प्रयासरत हैं। यह मूलत: कैथल (हरियाणा) से संबंध रखते हैं और कुरूक्षेत्र विश्‍वविद्यालय से स्‍नातकोत्‍तर हैं। यह हिंदी में कविता, गजल, कहानी और लघु-कथा विधाओं पर लेखन करते हैं। रोहित न्‍यूजीलैंड से प्रकाशित इंटरनेट पर विश्‍व की पहली हिंदी पत्रिका, भारत दर्शन का संपादन व प्रकाशन करते हैं व निरंतर हिंदी-कर्म में अग्रसर हैं। यह पत्रिका 1996 से इंटरनेट पर प्रकाशित हो रही है। भारत-दर्शन का मुद्रण पारंपरिक‘ऑफसेट प्रिंटिंग’ (offset printing) न होकर ‘डिजिटल’ (digital) था। पहला अंक ए5 (A5) के आकार का, ‘श्वेत-श्याम’ (Black on White) व 8 पृष्ठ का था। दूसरा अंक आते ही पत्रिका अत्‍यंत लोकप्रिय हो गयी थी। पाठक निरंतर और अधिक सामग्री का अनुरोध करने लगे थे। अत: पत्रिका में 4 और पृष्‍ठ जोड़ दिए गए। अब पत्रिका का तीसरा अंक 12 पृष्‍ठ का था। इसके पश्चात पत्रिका द्विमासिक के रूप में प्रकाशित होती रही। भारत दर्शन की गतिविधियां भी बढ़ गयी थीं। अभी तक यहां भारतीय समुदाय बंटा हुआ था। भारत का स्‍वतंत्रता-दिवस व गणतंत्र दिवस भी मिलजुल कर आयोजित नहीं होता था। 1997 में भारत दर्शन ने पहली बार सभी भारतीयों को भारतीय स्‍वतंत्रता दिवस की स्‍वर्ण जयंति समारोह में एक मंच प्रदान किया। इससे पहले केवल गुजराती समुदाय ही स्‍वतंत्रता दिवस मनाता था और सारा कार्यक्रम गुजराती में होता था।1997 में न्‍यूजीलैंड में रह रहे सभी समुदाय एक मंच पर आए और समारोह हिंदी में हुआ। अगस्‍त 1997 में भारत की स्‍वतंत्रता की स्‍वर्ण जयंती व भारत दर्शन की पहली वर्षगांठ पर इस अवसर पर भारत दर्शन का स्‍वतंत्रता-विशेषांक प्रकाशित किया गया। भारत दर्शन का यह अंक श्र्वेत-श्‍याम न होकर रंगीन था व इसके 16 पृष्‍ठ थे।
भारत दर्शन की यहां तक की यात्रा करते-करते अब भारत दर्शन का इंटरनेट संस्‍करण भी निकल चुका था। दिसंबर - जनवरी (1996-1997) से भारत-दर्शन का इंटरनेट संस्‍करण उपलब्‍ध करवाया गया। इसके साथ ही पत्रिका को इंटरनेट पर विश्‍व की पहली हिंदी साहित्यिक पत्रिका होने का गौरव प्राप्‍त हुआ और विश्‍वभर में फैले भारतीयों ने भारत दर्शन की हिन्‍दी सेवा की सराहना की। वर्तमान में भारत-दर्शन हिंदी न्‍यू मीडिया (new media) में अग्रणी है और इस समय इंटरनेट पर सर्वाधिक पढ़ी जाने वाली ऑनलाइन हिंदी पत्रिका है।लगभग 10 वर्षों तक भारत-दर्शन के दोनों संस्करण एक साथ चलते रहे। 2007 में इसका मुद्रित संस्करण स्थगित कर दिया गया और पूरी ऊर्जा के साथ इसका वेब प्रकाशन जारी रखा गया। यह पत्रिका इस समय इंटरनेट पर सर्वाधिक पढ़ी जाने वाली हिन्दी साहित्यिक पत्रिका है।
पहली बार न्‍यूजीलैंड में दीवाली मेले का आयोजन 1998 में महात्‍मा गांधी सेंटर में भारत- दर्शन व एक गैर भारतीय न्‍यूजीलैंडर (New Zealander) के सह आयोजन से आरंभ हुआ जो बाद में इतना प्रसिद्ध हुआ कि ऑकलैंड सिटी कांउसिल ने इसके प्रबंधन की जिम्‍मेदरी स्‍वयं उठा ली। इस मेले के आयोजन का उद्देश्‍य हिन्‍दी व अन्‍य भाषाओं का प्रचार करना था। न्‍यूजीलैंड में 1996-97 सबसे पहले हिंदी पत्रिका भारत दर्शन के प्रयास से एक वेब आधारित हिंदी टीचर आरंभ किया। यह प्रयास पूर्णत: निजी था। इसकी सराहना हुयी किंतु वांछित सहयोग नहीं मिला।90 के दशक में यह तकनीक व प्रौद्योगिकी उपलब्‍ध करवाना अपने आप में एक उपलब्धि थी। इंटरनेट आधारित हिन्‍दी टीचर विकसित करके भारत-दर्शन ने हिंदी जगत में एक नया अध्‍याय जोड़ा। आज इंटरनेट के माध्‍यम से हिंदी प्रचार-प्रसार में भारत दर्शन का ऑनलान हिंदी टीचर विशेष योगदान दे सकता है। भारत दर्शन का प्रयास है कि वह तकनीकी व प्रोद्योगिकी का उपयोग करके हिंदी शिक्षण में भी यथा संभव योगदान दे। आज न्‍यूजीलैंड में भारत दर्शन जैसी हिंदी पत्रिका के अतिरिक्‍त हिंदी रेडियो और टीवी भी हैं जिनमें रेडियो तराना और अपना एफ एम (FM) अग्रणी हैं।भारत दर्शन का प्रयास है कि उच्‍च स्‍तरीय लेखन व दुर्लभ हिंदी साहित्‍य को ऑनलाइन उपलब्‍ध करवाया जाए। इसके लिए भारत दर्शन पिछले 2 वर्षों से अन्‍य दो वेब साइट (Website) पर कार्य कर रहा है जिनमें कहत कबीर व साहित्‍य दर्शन सम्मिलित है।

संदर्भ:

https://bit.ly/3mx5Wld
https://bit.ly/3yXoS1k
https://bit.ly/3enXYX9
https://bit.ly/3ErK40A

चित्र संदर्भ   

1. न्यूजीलैंड से भारत-दर्शन हिंदी पत्रिका (पहला अंक - दूसरा संस्करण, अक्टूबर-नवंबर 1996) को दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)
2. भारत दर्शन वेबसाइट के मुख्य पृष्ठ को दर्शाता एक चित्रण (bharatdarshan.co.nz)
3. भारत दर्शन वेबसाइट के पृष्ठ पर कबीरदास के विवरण को दर्शाता एक चित्रण (bharatdarshan.co.nz)



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