विश्व एकता पर आधारित ‘बहाई’ धर्म तथा भारत में इसका उपासना गृह ‘लोटस टेंपल’

लखनऊ

 20-12-2021 10:26 AM
विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

बहाई (Bahaʼi)‚ अपेक्षाकृत एक नया धर्म है‚ जो सभी धर्मों के आवश्यक मूल्य तथा लोगों की एकता की शिक्षा देता है। बहाई शब्द का अर्थ है; प्रकाश का अनुयायी या महिमा का अनुयायी। इसे बहाउल्लाह (Bahaʼu’llah) द्वारा 19वीं शताब्दी में स्थापित किया गया था। यह शुरू में ईरान और मध्य पूर्व के कुछ हिस्सों में विकसित हुआ‚ जहां इसकी स्थापना के बाद से इसे लगातार उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है। बहाउल्लाह‚ बहाई धर्म के संस्थापक होने के साथ एक फारसी (Persian) धार्मिक लीडर थे‚ जो सभी जातियों‚ राष्ट्रों और धर्मों के बीच सार्वभौमिक शांति और एकता का समर्थन करते थे।
ऐसा अनुमान लगाया गया है‚ कि इस धर्म के 50 लाख से अधिक अनुयायी हैं‚ जो दुनिया के अधिकांश देशों और क्षेत्रों में फैले हुए हैं तथा उन्हें बहाई (Bahaʼis) के नाम से जाना जाता है। बहाई प्रतिवर्ष स्थानीय‚ क्षेत्रीय और राष्ट्रीय ‘आध्यात्मिक सभाओं’ का निर्वाचन करते हैं‚ जो धर्म के कार्यों को नियंत्रित करते हैं। हर पांच साल में सभी राष्ट्रीय ‘आध्यात्मिक सभाओं’ के सदस्य‚ यूनिवर्सल हाउस ऑफ जस्टिस (Universal House of Justice) का चुनाव करते हैं‚ जो दुनिया भर में बहाई समुदाय की‚ नौ सदस्यीय सर्वोच्च शासी संस्था है‚ तथा ‘बाब की श्राइन’ (Shrine of the Bab) के पास हैफा‚ इज़राइल (Haifa‚ Israel) में स्थित है। ‘बाब की श्राइन’ में बाब के अवशेष दफन हैं‚ जिसे बहाई लोगों द्वारा पृथ्वी पर‚ एकर (Acre) में ‘बहाउल्लाह की श्राइन’ के बाद‚ दूसरा सबसे पवित्र स्थान माना जाता है। बाब को बहाई का एक अग्रदूत माना जाता है‚ जिसने सिखाया कि भगवान जल्द ही यीशु (Jesus) या मुहम्मद (Muhammad) के समान एक पैग़ंबर भेजेंगे। 1850 में बाब को ईरानी अधिकारियों द्वारा मार डाला गया था। 1863 में बहाउल्लाह ने उस पैग़ंबर होने का दावा किया और अपने अधिकांश जीवन के लिए निर्वासन और कारावास का सामना किया। 1908 में बहाउल्लाह के बेटे‚ अब्दुल- बहा (Abdu’l-Baha) को कारावास से रिहा किया गया था‚ जिसके बाद उन्होंने यूरोप (Europe) और संयुक्त राज्य अमेरिका (United States) में शिक्षण यात्राएं कीं। ‘आध्यात्मिक सभा’ शब्द‚ अब्दुल-बहा द्वारा ही दिया गया था‚ जो बहाई धर्म को नियंत्रित करने वाली‚ निर्वाचित परिषदों को संदर्भित करता है‚ क्योंकि बहाई धर्म में कोई पादरी नहीं है। 1921 में अब्दुल-बहा की मृत्यु के बाद‚ धर्म का नेतृत्व उनके पोते शोगी एफेंदी (Shoghi Effendi) द्वारा किया गया। बहाई शिक्षाओं के अनुसार‚ सभी धर्म एक ही स्रोत से आते हैं‚ एक ही नींव रखते हैं‚ मानवता पर एक ही प्रकाश डालते हैं तथा ईश्वर एकल और सर्वशक्तिमान है। बहाउल्लाह ने सिखाया कि ईश्वर की अभिव्यक्ति के द्वारा धर्म एक व्यवस्थित और प्रगतिशील तरीके से प्रकट होता है। सामाजिक प्रथाओं और व्याख्याओं में भिन्नता होने के बावजूद भी बहाई प्रमुख धर्मों को मूल रूप से उद्देश्य में संयुक्त मानते हैं‚ वे सभी लोगों की एकता पर जोर देते हैं तथा जातिवाद और राष्ट्रवाद को स्पष्ट रूप से अस्वीकार करते हैं। बहाई शिक्षाओं के केंद्र में एक एकीकृत विश्व व्यवस्था का लक्ष्य है‚ जो सभी राष्ट्रों‚ नस्लों‚ पंथों और वर्गों की समृद्धिसुनिश्चित करता है। आधुनिक दुनिया में‚ कुछ लोग धर्म को एक असंबद्ध‚ खंडित और सांप्रदायिक ताकतों के समूह के रूप में देखते हैं‚ एक प्रतिस्पर्धी और अराजक कोलाहल जो शांति से अधिक संघर्ष तथा एकता से अधिक विभेद पैदा करता है। लेकिन बहाइयों के लिए‚ वह स्रोत जो उन सभी मानव निर्मित मतभेदों को पार करता है‚ वह एक निर्माता है। बहाई शिक्षाएं नए‚ तर्कसंगत और यहां तक कि कट्टरपंथी विचार पर भी ध्यान केंद्रित करती हैं‚ कि एक ईश्वर ने पूरे इतिहास में मानवता को एक आस्था दी है‚ जिसे प्रेम और ज्ञान को प्रकाश में लाने वाले परमेश्वर की अभिव्यक्तियों द्वारा अस्तित्व में लाया गया। बहाई अवधारणा‚ जिसे प्रगतिशील रहस्योद्घाटन कहा जाता है‚ बुद्ध‚ कृष्ण‚ अब्राहम‚ मोसेस‚ ईसा मसीह‚ मुहम्मद और अब बहाउल्लाह की शिक्षाओं को मानवता के लिए ज्ञान और मार्गदर्शन की एक अटूट श्रृंखला में जोड़ती है। दुनिया भर में शहरों‚ गांवों और कस्बों में‚ लाखों बहाई ऐसे समुदायों का निर्माण करने का प्रयास कर रहे हैं जो आध्यात्मिक और भौतिक रूप से समृद्ध हों। एक बेहतर दुनिया के निर्माण के लिए सभी लोगों के साथ हाथ मिलाकर‚ वे आराधना और सेवा पर केंद्रित गतिविधियों और कार्यक्रमों के माध्यम से एक नई सभ्यता की नींव रखने का प्रयास कर रहे हैं। बहाई धर्म के अनुयायियों के लिए ये प्रयास एक विशाल वैश्विक उपक्रम का हिस्सा हैं‚ जिसका व्यापक उद्देश्य मानव जाति का आध्यात्मिक और भौतिक एकीकरण है। बहाई विश्व का सबसे युवा धर्म है‚ भारत में बहाई हर बोधगम्य पृष्ठभूमि से आते हैं; अंडमान के जंगलों से लेकर मुंबई की ऊंची इमारतों तक‚ तमिलनाडु के समुद्र तट से लेकर सिक्किम के पहाड़ी क्षेत्रों तक। सामूहिक पूजा की सभाओं के लिए अपने घरों को खोलने के माध्यम से तथा बच्चों‚ किशोरों और वयस्कों की आध्यात्मिक शिक्षा की कक्षाओं के लिए‚ वे सामान्य भलाई के प्रति एकता‚ न्याय और समर्पण की विशेषता वाले सामुदायिक जीवन का एक स्वरूप तैयार करने के लिए अपने इलाकों के निवासियों के साथ विविध समायोजनों में सहयोग कर रहे हैं। जैसे-जैसे भारत का विशाल‚ प्राचीन और विविधतापूर्ण राष्ट्र इक्कीसवीं सदी में शानदार तरीके से प्रवेश कर रहा है‚ उसके सामने नए अवसर खुल रहे हैं। भविष्य के ये अवसर और चुनौतियाँ व्यक्तियों‚ संस्थानों और समुदायों की माँगों को एक जटिल तथा अत्यधिक परस्पर दुनिया में पनपने के लिए आध्यात्मिक परिपक्वता और बौद्धिक क्षमता के नए स्तरों पर लाती हैं। भारत का बहाई समुदाय‚ क्षमता निर्माण और सीखने की प्रक्रियाओं के लिए गहराई से प्रतिबद्ध है‚ जो देश की जनता को न्याय और एकता पर आधारित दुनिया बनाने के लिए आवश्यक आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से तैयार करेगा। बहाई उपासना गृह‚ सामुदायिक जीवन के दो परस्पर संबंधित पहलुओं; पूजा और सेवा को एक साथ लाता है। उपासना गृह‚ धर्म की एकता और इस विचार का प्रतीक है कि ईश्वर के दूतों या अवतारों की शिक्षाएँ अंततः एक वास्तविकता के द्वार हैं। पूजा और सेवा के बीच संबंध की दृष्टि के साथ‚ प्रार्थना कार्यों में तब्दील हो जाती है और कार्य आध्यात्मिकता से प्रभावित होते हैं। भारत के गांवों और मोहल्लों में सामुदायिक जीवन का एक स्वरूप तैयार किया जा रहा है‚ जिसमें पूजा और सेवा की ये विशेषताएं आपस में जुड़ी हुई हैं। भारत के नई दिल्ली में‚ बहाई उपासना गृह‚ जिसे ‘लोटस टेंपल’ (Lotus Temple) के नाम से जाना जाता है‚ बहाई जीवन के इन दो पहलुओं; पूजा और सेवा को एक साथ लाता है। उपासना गृह में एक केंद्रीय प्रार्थना कक्ष होता है‚ जिसमें 9 प्रवेश द्वार होते हैं‚ जो धर्म की एकता के प्रतीक तथा यह विचार कि ईश्वर के दूतों या अवतारों की शिक्षाएं अंततः एक वास्तविकता के द्वार हैं‚ को दर्शाता है। यह मंदिर अपने आप में बगीचों से घिरा हुआ है जो आगंतुक को उनकी भक्ति के लिए आध्यात्मिक रूप से तैयार करने का काम करता है। मंदिर में चल रही प्रार्थना और ध्यान से उत्पन्न भाव को दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) और उससे आगे के इलाकों में सामुदायिक निर्माण गतिविधियों की बढ़ती संख्या में भी प्रसारित किया जाता है। यह मंदिर अपने कमल के फूल के आकार के कारण‚ शहर का एक प्रमुख आकर्षण भी है। सभी उपासना गृहों की तरह‚ ‘लोटस टेम्पल’ भी सभी के लिए खुला रहता है‚ चाहे वह किसी भी धर्म या किसी अन्य योग्यता का हो। शोगी एफेंदी के अनुसार एक बहाई मंदिर बहाई धर्म का “मूक शिक्षक” (“silent teacher”) है। यह भवन 27 मुक्त खड़ी तथा संगमरमर से बनी “पंखुड़ियों” के आकार में बना है‚ जो तीन के समूहों में नौ पक्षों के रूप में व्यवस्थित है। इसमें नौ दरवाजे हैं‚ जो 34 मीटर से थोड़ा अधिक की ऊंचाई और 2‚500 लोगों की क्षमता वाले केंद्रीय हॉल में खुलते हैं। लोटस टेम्पल ने कई वास्तुशिल्प पुरस्कार जीते हैं और इसे कई समाचार पत्रों और पत्रिका लेखों में चित्रित भी किया गया है। 2001 की केबल न्यूज नेटवर्क (Cable News Network (CNN)) की एक रिपोर्ट ने इसे दुनिया में सबसे अधिक देखी जाने वाली इमारत के रूप में संदर्भित किया है।

संदर्भ:
https://bit.ly/3sbD5q4
https://bit.ly/3F1jRqX
https://bit.ly/3F2idW9
https://bit.ly/33EyRNP

चित्र संदर्भ
1. ‘लोटस टेंपल’ को दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)
2. बहाउल्लाह‚ बहाई धर्म के संस्थापक होने के साथ एक फारसी (Persian) धार्मिक लीडर थे‚ जिनको दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)
3. रिंगस्टोन प्रतीक अब्दुल-बहा द्वारा डिजाइन किया गया था, और, बहाई द्वारा पहने जाने वाले अंगूठियों पर पाया जाने वाला सबसे आम प्रतीक है, लेकिन इसका उपयोग हार, पुस्तक कवर और पेंटिंग्स पर भी किया जाता है। जिसको दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)
4. बहाई उपासना गृह, विल्मेट, इलिनोइस, दुनिया में सबसे पुराना बहाई उपासना गृह है। जिसको दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)
5. मंदिर के शीर्ष पर स्थित बहाई धर्म प्रतीक का आंतरिक दृश्यको दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)



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