कैसे हुआ सूटकेस का विकास ?

लखनऊ

 23-11-2021 11:18 AM
य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला

जब भी कोई व्यक्ति किसी स्थान की यात्रा करता है, या फिर एक स्थान से दूसरे स्थान में जाता है, तो एक चीज जो अक्सर उसके पास हो सकती है, वह है सूटकेस (Suitcase) ।सूटकेस एक ऐसी वस्तु है, जिसका उपयोग अनेकों वस्तुओं को एक साथ एकत्रित करने के लिए किया जाता है, ताकि उन्हें आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान में ले जाया जा सके।यह अक्सर गोल चौकोर कोनों के साथ कुछ हद तक सपाट,आयताकार बैग जैसा होता है।विनाइल,चमड़े या कपड़े के सूटकेस में धातु का फ्रेम हो सकता है।किंतु क्या आप जानते हैं, कि सूटकेस की शुरूआत कैसे हुई? तो चलिए आज सूटकेस के इतिहास और उसके विकास के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं। पहले के समय में सामान को एक स्थान से दूसरे स्थान में ले जाने के लिए प्रायः एक पेटी जैसी संरचना वाली वस्तु का इस्तेमाल किया जाता था, किंतु जैसे-जैसे लोगों में यात्रा का चलन बढ़ता गया, इस पेटी के विभिन्न रूप विकसित हुए जिनमें सूटकेस भी एक है।17वीं और 18वीं शताब्दी के दौरान, कला और साहित्य विशेष रूप से पूरे यूरोप (Europe) में लोगों के प्रवास को चित्रित करता है, तथा इन चित्रों में यह देखा जा सकता है, कि कैसे यात्री थैलों, ढीले बैगों आदि के साथ पैदल या घोड़ों पर यात्रा किया करते थे। भले ही ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी (oxford english dictionary) में "लगेज" (Luggage) शब्द को 1596 में जोड़ा गया हो, लेकिन लगेज का स्वर्ण युग वास्तव में 19वीं शताब्दी में आया। क्योंकि यात्रा धनी और शक्तिशाली लोगों की सामाजिक पूंजी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गयी थी तथा लोगों को एक ऐसी वस्तु की आवश्यकता थी, जो उनके ढेर सारे सामान को एकत्रित कर सके, ताकि यात्रा में उसे साथ ले जाने में आसानी रहे। यह स्थिति परिवर्तन उस समय के साहित्य में भी दिखाई देता है।इस बदलाव को लुइस वुइटन (Louis Vuitton) के उदाहरण से समझा जा सकता है,जो पेरिस (Paris) के एक युवा ट्रंक-निर्माता थे। इन्होंने दुनिया में सबसे अधिक पहचाने जाने योग्य लक्जरी ब्रांडों में से एक ब्रांड बनाने में मदद की। 1821 में जब युवा लुइस 16 साल की उम्र में पेरिस पहुंचे,तो वह बॉक्स-निर्माता मौसियर मारेशल (Monsieur Maréchal) के प्रशिक्षु बन गए। 17 वर्षों तक अपने शिल्प को निखारने के बाद, वुइटन ने आखिरकार अपना खुद का ब्रांड खोला, जिसका अपना प्रसिद्ध लोगो भी था। वुइटन को पहला स्लेटेड ट्रंक (slatted trunk) बनाने का श्रेय दिया जाता है, जिसका प्रयोग 19वीं शताब्दी की ट्रेनयात्रा के साथ अत्यधिक किया जाने लगा। यह ब्रांड अपने लगेज के ताले की मजबूती के लिए भी प्रसिद्ध था।1890 में वुइटन ने सार्वजनिक रूप से जादूगर हैरी हौदिनी (Harry Houdini) को अपने लगेज के ताले को तोड़ने का प्रयास करने के लिए चुनौती दी थी, हालांकि यह चुनौती स्वीकार नहीं की गयी! औद्योगीकरण के विकास के साथ 19वीं से 20वीं शताब्दी में स्टीमर यात्रा और चौड़े रेल मार्गों का विस्तार हुआ। अब लोग पहले से कहीं अधिक यात्रा कर सकते थे, तथा ट्रंक-निर्माता यात्रियों की इस नई पीढ़ी को और भी अधिक सुविधाओं के साथ लगेज उपलब्ध करवाने को तैयार थे। आज जिसे हम "सूटकेस" मानते हैं, उसका आविष्कार 20वीं शताब्दी के दौरान हुआ था। इसका उद्देश्य एक हल्का,कॉम्पैक्ट कैरियर लगेज तैयार करना था, जो प्रेस किए गए सूट को इस तरह खुद में समाहित करे,कि उसमें सिलवटें न पड़े।जेसी श्वेडर (Jesse Shwayder) नामक एक व्यवसायी ने 1900 के दशक की शुरुआत में अपने भाइयों के साथ एक छोटा व्यवसाय शुरू किया। भाइयों ने 1910 में श्वेडर ब्रदर्स (Shwayder Brothers) के रूप में ट्रंक निर्माण की एक दुकान खोली, जो बाद में सैमसोनाइट (Samsonite) कंपनी के नाम से जानी गयी। इस कंपनी ने 20 वीं शताब्दी में लगेज में कई नवाचारों को स्थान देने का प्रयास किया। लगेज के लिए वल्केनाइज्ड फाइबर (vulcanized fiber) और पॉलीप्रोपाइलीन (polypropylene) जैसी सामग्रियों का भी उपयोग किया जाने लगा। जैसे ही हवाई यात्रा की शुरुआत हुई वैसे ही लगेज क्षेत्र में भी नवाचार के एक नए युग की शुरुआत हुई। 1950 के दशक के उत्तरार्ध में जब दुनिया भर में लोग व्यावसायिक रूप से हवाई माध्यम से यात्रा करने लगे, तो यात्रियों को ऐसे सूटकेस की आवश्यकता महसूस हुई,जो ओवरहेड कंपार्टमेंट्स में फिट हो सकें तथा हवाई अड्डे के आसपास सुरक्षित रूप से व्यवस्थित हो। 20 वीं शताब्दी में लगेज क्षेत्र में सबसे महान आविष्कारों में से एक आविष्कार बर्नार्ड सैडो (Bernard Sadow) का था, जिन्होंने पहली बार 1974 में पहिएदार लगेज का पेटेंट कराया।द न्यू यॉर्क टाइम्स (The New York Times) के अनुसार,बर्नार्ड को इसका विचार तब आया जब वे अरूबा (Aruba) में पारिवारिक छुट्टी के बाद, भारी सूटकेस को खींच रहे थे। उन्होंने हवाई अड्डे पर एक कर्मचारी को पहियों वाली गाड़ी को धक्का देते हुए देखा जिस पर लगेज रखा था।उन्होंने बैग के लिए अलग-अलग पहिये बनाने का विचार तैयार किया और इसे सूटकेस के लिए भी लागू किया।इसकी उपयोगिता के बावजूद,यह विचार तुरंत आगे नहीं बढ़ा, क्यों कि कुछ लोग विशेष रूप से पहिएदार लगेज के विचार के विरूद्ध थे। हालांकि बाद में इस विचार को अपना लिया गया। लगेज के भविष्य के अगले चरण में स्मार्ट तकनीक जैसे उपकरण शामिल हैं, जिनकी सहायता से सामान को दूर से ट्रैक किया जा सकता है। रोबोटिक्स की ओर रुझान पूरे यात्रा उद्योग में देखा गया है, तथा कंपनियां ऐसे सूटकेस बनाने की तलाश में हैं, जिन पर उनका मालिक पूरी तरह से नजर रख सके। अपने छोटे 120 साल के इतिहास के दौरान आधुनिक लगेज को लगातार पुनर्निर्मित किया गया है।पॉली कार्बोनेट (polycarbonate) से बना पहला सूटकेस वर्ष 2000 में जर्मन (German) लगेज निर्माता रिमोवा (Rimowa) द्वारा बनाया गया था। पॉली कार्बोनेट के कई ग्रेड हैं। दोनों एक्रिलोनिट्राइल ब्यूटाडीन स्टाइरीन (acrylonitrile butadiene styrene - ABS), जो पॉली कार्बोनेट से सस्ता था, और पॉलीप्रोपाइलीन (polypropylene), जो पॉली कार्बोनेट से हल्का था, को पॉली कार्बोनेट के तुरंत बाद पेश किया गया था। 2004 स्पिनर (Spinner) शैली के पहिएदार सूटकेस भी पेश किए गए। भारत में भी सूटकेस से सम्बंधित कुछ नवाचार हुए हैं, जिनमें "मोल्डेड प्लास्टिक सूटकेस" शामिल है, जिसे 1974 में सफारी लगेज (Safari luggage) कंपनी द्वारा बनाया गया था।बॉम्बे सफारी इंडस्ट्रीज (इंडिया) में प्लास्टिक मोल्डेड लगेज के निर्माण के लिए 1974 में एक साझेदारी फर्म के रूप में शुरू हुई; यह कंपनी 1980 में एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी तथा 1986 में एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी बनी। इस कंपनी को सुमतिचंद्र एच मेहता द्वारा बढ़ावा दिया गया था।

सदर्भ:
https://bit.ly/3nHRJmE
https://bit.ly/3oQoFbL
https://bit.ly/3CST3rb
https://bit.ly/3xdZymR
https://bit.ly/3cEHOb8

चित्र संदर्भ

1. आर्किटेपल सूटकेस (archetypal suitcase) का एक चित्रण (flickr)
2. सूटकेस के साथ महिला को दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)
3. हाथों में सूटकेस पकड़कर गलियों में चलते व्यक्ति को दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)
4. पहिएदार सूटकेस के पेटेंट,को दर्शाता एक चित्रण (thumbnailer.cdn)
5. यात्रा के लिए इस्तेमाल किया जाने वाले एक विशिष्ट सूटकेस को दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)



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