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अंतरिक्ष यात्रियों का भोजन कैसा होता है और भारत के गगनयान मिशन की तैयारी

लखनऊ

 11-09-2021 09:08 AM
स्वाद- खाद्य का इतिहास

अपनी आध्यात्मिक उपलब्धियों और सांस्कृतिक विरासतों के दम पर भारत सदियों से दुनिया को चौंकाता रहा है। लगभग “सवा सौ करोड़ से अधिक जनसंख्या होने के बावजूद भारत में 23% से 38 प्रतिशत जनसंख्या शाकाहारी है”। यह इसलिए ही सराहनीय है, क्यों की पूरी दुनियां के सभी शाकाहारी लोगों में लगभग 19% लोग अकेले भारत में रहते हैं। 2019 में एक सर्वेक्षण में पाया गया कि यहां के लगभग 63% लोग शाकाहारी अर्थात मांस संबधी भोज्य पदार्थों का सेवन न करने के इच्छुक हैं। हालांकि शाकाहारी होने की भी एक निश्चित सीमा है जिसमें मूल रूप से लोग किसी भी जीव हत्या से बचने के लिए और स्वास्थ संबंधी लाभों के लिए केवल जीव जंतुओं के मांस का सेवन नहीं करते, लेकिन जानवरों से प्राप्त उद्पादों जैसे- चमड़े, दूध और कभी-कभी अंडे को भी शाकाहार में शामिल कर दिया जाता है परंतु धीरे-धीरे लोग इससे एक स्तर ऊपर उठकर वीगन, (vegan) बनने की और तेज़ी से अग्रसर हो रहे है।
हम वीगनिस्म (veganism) के लिए "शुद्ध शाकाहार" शब्द का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। अन्य अवधारणाओं के विपरीत वीगनिस्म (veganism) में वजन को नियंत्रित करने तथा गंभीर बिमारियों से बचने के लिए जानवरों के मांस के साथ-साथ उनसे जुड़े किसी भी उत्पाद का सेवन करने से बचा जाता है। हालांकि यदि इसका पालन सही ढंग से नहीं किया गया तो शरीर के लिए ज़रूरी पोषक तत्वों के आभाव में स्वास्थ संबंधी गंभीर समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं। इसके अलावा वीगनिस्म (veganism) इस नैतिक विचारधारा पर भी आधारित है की, “मनुष्य को अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए जानवरों का शोषण नहीं करना चाहिए, और जो लोग इस विचारधारा का पालन करते हैं, उन्हें वीगन, (vegan) कहा जाता है।
वीगन, (vegan) लोग भोजन, कपड़े, मनोरंजन या दूसरों के बीच काम करने के लिए किसी भी प्रकार के पशु या पशु उत्पादों का उपयोग करने से परहेज करते हैं। ये प्रजातियों में अंतर नहीं करते हैं और सभी जानवरों को समान मानते हैं। हाल के वर्षों में न केवल पशु क्रूरता के कारण बल्कि पर्यावरण, एंटीबायोटिक प्रतिरोध (antibiotic resistance,), जूनोटिक रोगों और स्वास्थ्य पर संबंधित चिंताओं के कारण भी वीगनिस्म (veganism) को अपनाया जा रहा है।
आज यह पूरी दुनियां में सार्वभौमिक रूप से स्वीकार कर लिया गया है की, वीगन, (vegan) होना न केवल हमारे व्यक्तिगत स्वास्थ बल्कि पूरी पृथ्वी की सेहत में सुधार कर सकता है। प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज (Proceedings of the National Academy of Sciences) द्वारा किये गए एक अध्ययन के अनुसार “यदि दुनिया की अधिकांश जनसँख्या वीगनिस्म (veganism) अथवा हर मायने में शाकाहार को अपना ले, तो प्रतिवर्ष लगभग अनिश्चित और असमय होने वाली 8.1 मिलियन मौतों को रोका जा सकता है”। सकारात्मक रूप से वीगनिस्म (veganism) आज समाज की मुख्यधारा में शामिल होने लगा है, विदेशों में आज बेयॉन्से (Beyoncé), जे जेड (Jay Z) और बिल क्लिंटन (Bill Clinton) जैसी दुनियां की मशहूर हस्तियां लोगों को , वीगन बनने के लिए प्रेरित कर रहीं हैं। जीव हत्या से बचने के अलावा वीगन होना कई दूसरे लाभ भी प्रदान करता है। जैसे मांसहारी भोजन की तुलना में शाकाहारी भोजन में कैलोरी की मात्रा काफी कम होती है, अतः वीगनिस्म वजन घटाने के संदर्भ में भी लाभकारी साबित हो सकता है, इसलिए सब्जियां ही एक आदर्श आहार हैं।
वीगन उत्पाद को दर्शाने के लिए उपयोग किया जाने वाला प्रतीक
विशेषज्ञों के अनुसार वीगन लोगों को गंभीर बीमारी का खतरा कम होता है। प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस (Proceedings of the National Academy of Science) में प्रकाशित 2015 के एक रिपोर्ट के अनुसार, “पशु रहित वीगन भोजन उच्च रक्तचाप, टाइप -2 मधुमेह और हृदय रोगों से बचाने अधिक प्रभावी होता है”। हालांकि मांसाहार की तुलना में वीगन (शुद्ध शाकाहार) में कुछ महत्वपूर्ण पोषक तत्वों जैसे रोड्रिगेज कैल्शियम (calcium (Rodriguez)), ओमेगा -3 फैटी एसिड (omega-3 fatty acids), विटामिन बी -12 (vitamin B- 12) और फोलेट (folate) की कमी भी होती है, समय के साथ, इनके अपर्याप्त सेवन से हड्डियों और मांसपेशियों में कमजोरी आ सकती है। हालांकि कुछ पोषक तत्व जैसे विटामिन बी -12 केवल मांस, डेयरी और अंडे में पाया जाता है, लेकिन इनको प्राप्त करने के लिए शाकाहारी पौधे के दूध (सोया और अन्य), टोफू और पोषण खमीर का सेवन कर सकते हैं। फल, दालें- जिसमें सूखे मटर, राजमा, छोले, फवा बीन्स, ब्लैक बीन्स और एडज़ुकी बीन्स शामिल हैं। सब्जियां सदियों से दुनिया भर में कई संस्कृतियों का मुख्य भोजन रही हैं, इनमे प्रचुर मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है जो की मांस संबंधी उत्पादों का एक बेहतर विकल्प हो सकता है। पर्यावरण सुरक्षा के संदर्भ में भी वीगनिस्म बहुपयोगी साबित हो सकता है, उदाहरण के लिए प्रायः एक पाउंड गोमांस के उत्पादन में लगभग 1,600 गैलन पानी लगता है, अतः एक पाउंड पशु प्रोटीन के उत्पादन के लिए एक पाउंड अनाज प्रोटीन के उत्पादन की तुलना में लगभग 100 गुना अधिक पानी की आवश्यकता होती है। आज पर्यवारण पिछले दशकों की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण विषय है, इसलिए ये चीजें बहुत मायने रखती हैं।
हमारा देश भारत बड़ी संख्या में शाकाहारी आबादी के लिए जाना जाता है, और स्वास्थ्य संबंधी खतरों को समझते हुए कई (लगभग 63%) भारतीय आज शाकाहार अपनाने के इच्छुक हैं। कुछ समय पहले तक, शाकाहारी विकल्प मिलना अपेक्षाकृत कठिन माना जाता था, किंतु आज शाकाहार देश में अच्छी तरह से स्थापित है। डेयरी पारंपरिक भारतीय आहार में भारी भूमिका निभाती है। आज कई कंपनियां ऑल्ट मीट और ऑल्ट प्रोटीन (Alt Meat and Alt Protein) उत्पादों से मांसाहार का वैकल्पिक भोजन दे रही हैं। भारत में सुसंस्कृत मांस ( संवर्धित मांस जानवरों को तकलीफ पहुंचाए बिना उनकी कोशिकाओं के इन विट्रो सेल (vitro cell) द्वारा उत्पादित मांस है।) की लोकप्रियता बढ़ी है। भारतीय कंपनी क्लियर मीट (Clear Meat) ने प्रयोगशाला में चिकन कीमा विकसित किया है, जिसका दावा है कि यह पारंपरिक किस्म की तरह सस्ती है।
वीगन होना जीवन जीने का एक तरीका है, जिसके अंतर्गत जहाँ तक संभव हो सके भोजन, कपड़े, या किसी अन्य उद्देश्य के लिए जानवरों से किसी भी प्रकार का शोषण, और क्रूरता करने से बचाना चाहिए। सख्त शाकाहारी दर्शन जानवरों की वस्तु स्थिति को भी खारिज करता है, जिसका अर्थ है कि वीगन समाज , पशु-व्युत्पन्न उत्पादों जैसे फर, रेशम, चमड़े आदि का उपयोग नहीं करते हैं। इसका अर्थ मनोरंजन या काम के लिए जानवरों का उपयोग करने से खुद को दूर रखना भी है।
मांस से बचने की अवधारणा का विकास सबसे पहले प्राचीन भारतीय और पूर्वी भूमध्यसागरीय समाजों से हुआ था। भारत में, बौद्ध और जैन धर्म के अनुयायियों ने भी सदियों से भारत में एक प्रकार के वीगनिस्म (veganism) का समर्थन किया है, यहां तक हिंदू धर्म में कई जानवरों को देवता माना गया है। वीगनिस्म (veganism) ' शब्द अपने आप में व्यापक है, और इसे कई श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है। जैसे नैतिक वीगनिस्म (veganism) समाज , जानवरों को किसी भी प्रकार से आहात करने से बचने वाली जीवन शैली चुनते हैं। कच्चे खाद्य वीगनिस्म (veganism) समाज, खाने को बिना पकाए अपनी प्राकृतिक अवस्था में खाद्य पदार्थों जैसे फल, कच्ची सब्जियां, अंकुरित अनाज और फलियां, कच्चे मेवे, बीज, पौधे का दूध आदि का सेवन करते हैं। हमारे देश भारत के तकनीक-प्रेमी और युवा भारतीय स्वास्थ्य लाभ और नैतिक तर्क द्वारा वीगनिस्म (veganism) का समर्थन करते हैं। भारत में वीगनिस्म (veganism) की अवधारणा की शुरुआत का श्रेय महावीर, आचार्य कुंडकुंड और तमिल कवि वल्लुवर जैसे प्रारंभिक 'नैतिक वीगन' दार्शनिकों को जा सकता है। पवित्र हिंदू धर्म ग्रंथ भगवद गीता का एक उद्धरण "जब आप अपने दिल में हर जीवित चीज़ की पीड़ा महसूस करते हैं, तो वह चेतना है" के माध्यम से भी वीगनिस्म (veganism) की ऐतिहासिक जड़ों का पता लगाया जा सकता है। भारत में अधिकांश धर्म अहिंसा का प्रचार करते हैं, जो कि शाकाहार की विचारधारा भी है।
उदाहरण के लिए जैन व्यंजन पूरी तरह से लैक्टो शाकाहारी होते हैं और छोटे कीड़ों और सूक्ष्मजीवों को किसी भी तरह की चोट से बचाने के लिए अपने भोजन में भूमिगत सब्जियों जैसे आलू, लहसुन, प्याज आदि को भी शामिल नहीं करता है। भारत को अध्यात्मवाद की भूमि के रूप में जाना जाता है, जो किसी न किसी रूप में वीगनिस्म (veganism) से संबंधित है। हिंदू धर्म 'पवित्र गाय' को माँ का स्थान दिया जाता है, यह धारणा पशु को आहार का हिस्सा मानने की मानसिकता को ही ख़ारिज कर देती है।

संदर्भ
https://bit.ly/3k3ByOJ
https://bit.ly/3jZM5KJ
https://www.self.com/story/vegan-diet-pros-cons

चित्र संदर्भ

1. स्वादिष्ट वीगन व्यंजनों का एक चित्रण (wikimedia)
2. पौष्टिक वीगन व्यंजनों का एक चित्रण (flickr)
3. व्यापक रूप से एक वीगन उत्पाद को दर्शाने के लिए उपयोग किया जाने वाला प्रतीक का एक चित्रण (wikimedia)
4. बर्लिन में एक वीगन सुपरमार्केट का एक चित्रण (wikimedia)
5. गाय को माता के रूप में पूजती भारतीय महिलाओं का एक चित्रण (wpengine.netdna)



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