बॉलीवुड (Bollywood) में जैज़(Jazz) संगीत का प्रभाव।

लखनऊ

 30-04-2021 09:40 AM
ध्वनि 1- स्पन्दन से ध्वनि

वस्तुतः अफ्रीकी-अमेरिकी और अन्य यूरोपीय देशों में संगीत की विभिन्न शैलियां वहां के आम लोगों में अति लोकप्रिय है, परन्तु संगीत की सभी शैलियों में जैज़ शैली का एक विशेष स्थान है। 19 वी सदी के अंत में अश्वेत अमेरिकी-अफ़्रीकी मूल के संगीतकारों द्वारा पहली बार जैज़ संगीत की उत्पत्ति की गयी। संगीत की इस शैली का निर्माण कई अन्य शैलियों जैसे ब्लूज़(Blues), रैगटाइम(ragtime), आध्यात्मिक संगीत और लोक संगीत की विभिन्न शैलियों के शक्तिशाली साहचर्यता से हुआ। सन 1920 के दशक में भारत में जैज़ का आगमन हुआ, और अपने आगमन के साथ ही होटल की पार्टियों, और बॉलीवुड में यह बेहद चर्चित संगीत शैली बनकर उभरी। 30 अप्रैल को प्रतिवर्ष जैज़ दिवस (Jazz Day)मनाया जाता है, इस मौके पर जानते हैं बॉलीवुड पर जैज़ संगीत के पड़ने वाले प्रभाव के बारे में।
बॉलीवुड में जैज़ संगीत 50 और 60 दशक के मध्य अधिक प्रसिद्ध हुआ। जब फ्रैंक फर्नांड(Frank Fernand), सेबस्टियन डिसूजा और एंथोनी गोंजाल्विस (Sebastian D’Souza and Anthony Gonsalves) जैसे कलाकारों ने जैज़ और भारतीय शास्त्रीय संगीत के साथ बेहतरीन जुगलबंदी की। लोगों में बढ़ती मांग को देखते हुए इस संगीत को हिंदी सिनेमा में प्रमुखता से इस्तेमाल किया जाने लगा। जैज़ संगीत की यह खास विशेषता है कि यह फिल्मों के अनुरूप बेहतरीन सामंजस्य बिठा लेता है, और गानों की शूटिंग के दौरान भी आसानी से फिल्माया जा सकता है। जैज़ संगीत शैली से जुड़े हुए कुछ मिथक भी सामने आते हैं, पहला यह है की इसे नृत्य (Dance) करने के अनुरूप होना चाहिए, परन्तु निखिल मावकिन Nikhil Mawkin (प्रसिद्ध हिंदी गायक) कहते है कि दुर्भाग्यवश बॉलीवुड के अधिकतर गानों को बेचने के परिपेक्ष्य में बनाया जाता है।

जैज़ संगीत के निर्माण में सैक्सोफोन(saxophone), ट्रम्पेट(trumpet), ट्रॉम्बोने(trombone), पियानो(piano), बास(bass), ड्रम(drums) और गिटार(guitar) आदि वाद्य यंत्रों का इस्तेमाल किया जाता है। इन वाद्य यंत्रों से निकलने वाली मधुर संगीत धुनों को लयबद्ध किये जाने पर अति मनमोहक जैज़ संगीत निकलता है। इस संगीत की विशेषताओं को भारत में प्रचारित करने का श्रेय नौशाद, ओपी नैय्यर, शंकर-जयकिसेन, लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल और आरडी बर्मन जैसे महान भारतीय संगीतकारों को भी जाता है। जिन्होंने हिंदी फिल्मों के माध्यम से जैज़ संगीत के कई प्रयोग किये और भारत इस संगीत शैली को प्रसारित किया, तथा इससे प्रभावित होकर हिंदी सिनेमा के इतिहास में कुछ बेहद यादगार नगमे (Songs ) भारतीय सिनेमा (Bollywood ) को दिए।
अपने शुरुआती सफर में कुछ बैंड (Music Band) जैज़ शैली के संगीत के क्षेत्र में अनेक संगीतकार उभरकर सामने आये, जिनका भारत में जैज़ के विस्तार में अहम योगदान था। जिनमे से कुछ निम्नवत हैं।
1. टेड वेदरफोर्ड, (Teddy Weatherford) - टेडी वेदरफोर्ड एक अमेरिकी जैज पियानोवादक और एक कुशल स्ट्राइड पियानोवादक थे। वेदरफ़ोर्ड का जन्म वर्जीनिया (Virginia) के पोकाहॉन्टास(Pocahontas) में हुआ था। और उसका पालन-पोषण वेस्ट वर्जीनिया के ब्लूफ़ील्ड (Bluefield) में हुआ था। 1915 से 1920 तक, वह न्यू ऑरलियन्स, लुइसियाना में रहे जहां उन्होंने जैज़ पियानो बजाना सीखा।
2. सेबेस्टियन डिसूजा (Sebastian D’Souza)- ये बॉलीवुड संगीत उद्योग में एक सफल गोयन संगीत निर्माता थे, जो की यूरोपीय शास्त्रीय संगीत अवधारणाओं के साथ भारतीय संगीत को संयोजित करने में माहिर थे।
3. एंथोनी गोंसाल्वेस (Anthony Gonsalves) - एक भारतीय संगीतकार, संगीत रचनाकार और शिक्षक थे। जिनका जन्म माजोर्डा (पुर्तगाली गोवा में मडगांव के पास) में हुआ था। पश्चिमी शास्त्रीय संगीत उनका जुनून था। गोंसाल्वेस ने हिंदुस्तानी रागों और ऑर्केस्ट्रा के लिए भी रचना कीं।


हिंदुस्तानी संगीत के अनुसार, इंसानी आवाज़ में अलग-अलग पिच सरगम होती है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति के मामले में 'सा' का उच्चारण भिन्न -भिन्न होगा इसके विपरीत पश्चिमी संगीत में "डु" निश्चित होगा। ठीक किसी गणितीय सिद्धांत की भांति। संगीत की इस जटिलता को वे ही लोग बेहतर समझ सकते हैं जो इस क्षेत्र में पूरी तरह से लिप्त हैं। जैज़ अपने समय का वहुचर्चित संगीत था। संगीतकार ध्रुव घाणेकर के अनुसार 'आजादी के बाद, कई एंग्लो इंडियन संगीतकार थे, जिन्होंने जैज संगीत का अध्ययन किया था और 50 के दशक में फ़िल्म संगीत बढ़ने और मुख्यधारा बनने के बाद, इनमें से बहुत से संगीतकार जो जैज़ संगीत को क्लबों और होटलों में प्रदर्शित करते थे। उन्होंने अपनी आय के पूरक के लिए इसे एक उद्योग के तौर पर देखना शुरू किया। और तब से आज तक जैज़ शैली में बॉलीवुड को कई सुपरहिट गाने दिए गए हैं।
संदर्भ
https://bit.ly/3vsMW9I
https://bit.ly/2PtyRJx
https://bit.ly/3eE3p3L
https://bit.ly/3nsFoRm
https://bit.ly/2QGM3LH

चित्र संदर्भ
1. वाद्ययंत्र का एक चित्रण (Unsplash)
2.वाद्ययंत्र का एक चित्रण (Unsplash)
3. होटल का चित्रण (Youtube )



RECENT POST

  • लखनऊ के तालकटोरा कर्बला में आज भी आशूरा का पालन सदियों पुराने तौर तरीकों से किया जाता है
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     28-06-2022 08:18 AM


  • जापानी व्यंजन सूशी, बन गया है लोकप्रिय फ़ास्ट फ़ूड, इस वजह से विलुप्त न हो जाएँ खाद्य मछीलियाँ
    मछलियाँ व उभयचर

     27-06-2022 09:27 AM


  • 1869 तक मिथक था, विशाल पांडा का अस्तित्व
    शारीरिक

     26-06-2022 10:10 AM


  • उत्तर और मध्य प्रदेश में केन-बेतवा नदी परियोजना में वन्यजीवों की सुरक्षा बन गई बड़ी चुनौती
    निवास स्थान

     25-06-2022 09:53 AM


  • व्यस्त जीवन शैली के चलते भारत में भी काफी तेजी से बढ़ रहा है सुविधाजनक भोजन का प्रचलन
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     24-06-2022 09:51 AM


  • भारत में कोरियाई संगीत शैली, के-पॉप की लोकप्रियता के क्या कारण हैं?
    ध्वनि 1- स्पन्दन से ध्वनि

     23-06-2022 09:37 AM


  • योग के शारीरिक और मनो चिकित्सीय लाभ
    य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला

     22-06-2022 10:21 AM


  • भारत के विभिन्‍न धर्मों में कीटों की भूमिका
    तितलियाँ व कीड़े

     21-06-2022 09:56 AM


  • सोशल मीडिया पर समाचार, सार्वजनिक मीडिया से कैसे हैं भिन्न?
    संचार एवं संचार यन्त्र

     20-06-2022 08:54 AM


  • अपने रक्षा तंत्र के जरिए ग्रेट वाइट शार्क से सुरक्षित बच निकलती है, सील
    व्यवहारिक

     19-06-2022 12:16 PM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id