कैसे श्राप मुक्त हुए जय विजय

लखनऊ

 26-10-2020 10:35 AM
विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

भगवान विष्णु का निवास वैकुण्ठधाम कहलाता है।इसकी रक्षा दो द्वारपालक करते हैं- जय और विजय।भगवतपुराण में यह दिया हुआ है कि चार कुमार जिनके नाम सनानंद, सनाका, सनातन और सनतकुमार हैं , वे ब्रह्मा के मानसपुत्र हैं।मानसपुत्र का मतलब है ब्रह्मा के दिमाग़ की शक्ति से पैदा हुए पुत्र।वे दुनिया का भ्रमण कर रहे थे।एक दिन उन्होंने नारायण से मिलने की योजना बनाई।अपने तप की शक्ति के कारण वे चारों कुमार छोटे बच्चे लग रहे थे।लेकिन वह थे बड़ी उम्र के।जय-विजय द्वारपालों ने उन्हें बच्चा समझकर अंदर जाने से रोका।नाराज़ कुमारों ने उनसे कहा कि अपने भक्तों के लिए भगवान विष्णु हर समय उपलब्ध रहते हैं।साथ ही उन्होंने जय-विजय को श्राप भी दे दिया।


क्या था श्राप

नाराज़ कुमारों ने जय-विजय को श्राप दिया कि उनका देवत्व ख़त्म हो जाएगा।भूलोक पर मनुष्य के रूप में जन्म लेना होगा।साधारण जीवन जीना होगा।


भगवान विष्णु द्वारा दिए गए विकल्प

भगवान विष्णु वहाँ आ गए।जय-विजय ने उनसे कुमारों के श्राप से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना की।विष्णु भगवान ने कहा कि श्राप वापस नहीं हो सकता।जय-विजय के बहुत कहने पर विष्णु जी ने उन्हें दो विकल्प दिए।पहला विकल्प था सात जन्मों तक विष्णु भक्त के रूप में पृथ्वी पर निवास या तीन जन्मों तक विष्णु के शत्रु के रूप में पृथ्वी पर वास।इनमें से कोई भी विकल्प पूरा होने पर उनकी वैकुण्ठ में वापसी होगी।इसके बाद वह हमेशा के लिए वहाँ रह सकेंगे।जय-विजय सात जन्मों तक भगवान विष्णु से दूर नहीं रह सकते थे, इसलिए उन्होंने तीन जन्मों तक उनके शत्रु के रूप में जन्म लेने का विकल्प चुना।

कैसे शापमुक्त हुए जय-विजय

सतयुग में जय-विजय हिरण्यकश्यपु और हिरण्याक्षा के रूप में दक्ष प्रजापति की पुत्री दीति और संत कश्यप के यहाँ पैदा हुए।वरहा और नरसिम्हा ने उनकी हत्या की।त्रेता युग में अपने दूसरे जन्म में जय-विजय का जन्म रावण और कुम्भकर्ण के रूप में हुआ और भगवान राम के हाथों उनकी मौत हुई।द्वापर युग में अपने तीसरे जन्म में वे दंतावक्र और शिशुपाल के रूप में पैदा हुए और भगवान कृष्ण के हाथों मारे गए।ध्यान देने की बात यह है कि जय-विजय की ताक़त हर जन्म के साथ घटती जा रही थी।भगवान विष्णु को बार-बार उन्हें मारने के लिए अवतार लेना पड़ रहा था।


जय-विजय की स्वर्ग वापसी

भगवान विष्णु की आज्ञानुसार तीन लगातार जन्मों तक भूलोक में आते-आते जय-विजय धीरे-धीरे ईश्वर के नज़दीक होते गए।असुर से शुरू होकर राक्षस और फिर मनुष्य का जीवन जीकर वे वापस देवत्व के पास पहुँचे।इस प्रकार अंतिम रूप से हमेशा के लिए उनकी वैकुण्ठ वापसी हो गई।

सन्दर्भ:
https://en.wikipedia.org/wiki/Jaya-Vijaya
https://iskcondesiretree.com/profiles/blogs/story-of-three-births-of-jay-and-vijay-who-were-gatekeepers-of
http://www.kismatconection.com/blog/secret-ravana-previous-birth-interesting-tale-lord-vishnu/

चित्र सन्दर्भ:
पहला चित्र दिखाता है वैकुंठ के द्वारपाल संतों को प्रवेश करने से रोकते थे और उन्हें श्राप दिया गया था।(wikipedia)
दूसरी छवि से पता चलता है कि श्री विष्णु के शत्रु के रूप में पहले जन्म में, जया और विजया का जन्म हिरण्याक्ष और हिरण्यकश्यपु के रूप में सत्ययुग में हुआ था।(iskcondesiretree)
तीसरी छवि से पता चलता है कि अगले त्रेता युग में - जया और विजया रावण और कुंभकर्ण के रूप में पैदा हुए थे, और भगवान विष्णु द्वारा उनके रूपों में रामचंद्र और लक्ष्मण के रूप में मारे गए थे।(iskcondesiretree)
चौथी छवि से पता चलता है कि द्वापर युग के अंत में - जया और विजया का जन्म शिशुपाल और दंतवक्र के रूप में हुआ था और भगवान कृष्ण ने बलराम के साथ खुद को प्रकट किया और उन्हें मार डाला।(iskcondesiretree)


RECENT POST

  • सोने-कांच की तस्वीरों में आज भी जीवित है, कुछ रोमन लोगों के चेहरे
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     29-11-2020 07:21 PM


  • कोरोना महामारी बनाम घरेलू किचन गार्डन
    पेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें

     28-11-2020 09:06 AM


  • लखनऊ की परिष्कृत और उत्कृष्ट संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है, इत्र निर्माण की कला
    गंध- ख़ुशबू व इत्र

     27-11-2020 08:39 AM


  • भारतीय कला पर हेलेनिस्टिक (Hellenistic) कला का प्रभाव
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     26-11-2020 09:20 AM


  • पाक-कला की एक उत्‍कृष्‍ट शैली लाइव कुकिंग
    द्रिश्य 2- अभिनय कला

     25-11-2020 10:32 AM


  • आत्मा और मानव जाति की मृत्यु, निर्णय और अंतिम नियति से सम्बंधित है, एस्केटोलॉजी
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     24-11-2020 08:40 AM


  • मानवता की सबसे बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धियों में से एक है, लेजर इंटरफेरोमीटर गुरुत्वीय-तरंग वेधशाला द्वारा किये गये अवलोकन
    सिद्धान्त I-अवधारणा माप उपकरण (कागज/घड़ी)

     22-11-2020 10:34 AM


  • लखनऊ की अत्यंत ही महत्वपूर्ण धरोहर शाह नज़फ़ इमामबाड़ा
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     22-11-2020 11:21 AM


  • लखनऊ की दुर्लभ तस्‍वीरों का संकलन
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     21-11-2020 08:29 AM


  • वर्षों से शरणार्थियों को एक सुरक्षित आश्रय स्थल प्रदान कर रहा है, भारत
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     20-11-2020 09:30 PM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.