इवान वास्तुकला का इतिहास

लखनऊ

 13-07-2020 04:34 PM
वास्तुकला 1 वाह्य भवन

विद्यमान आधारभूत और संस्कृतियों के बीच संपर्क की उपस्थिति के कारण इस्लामी कला और वास्तुकला रोमन (Roman), बीजान्टिन(Byzantine) और सासनियन(Sasanian) डिजाइनों से काफी प्रभावित थी। उदाहरण के लिए, दमिश्क की महान मस्जिद का निर्माण 8वीं शताब्दी ईसा पूर्व में रोमन क्रिश्चियन चर्च के स्थान पर किया गया था और इसमें एक ऊंचे तोरणपथ और रोशनदान के साथ एक गिरजे के बीच का भाग शामिल है। इस्लामिक वास्तुकला के विकास पर सासनियन साम्राज्य का भी जबरदस्त प्रभाव पड़ा था। हालांकि, सासनियों और मुसलमानों के बीच परस्पर क्रिया होने की वजह से कई बार यह निर्धारित करना मुश्किल हो जाता था कि कौन किसको प्रभावित कर रहा है।

इस्लामिक कला और वास्तुकला ने कई सासनियन सजावटी रूपांकनों का अनुकरण किया, जिनमें से एक इवान(Ivan) है। रामपुर में मौजूद इस्लामिक वास्तुकला में इवान के कई प्रमुख उदाहरण देखे जा सकते हैं। इवान वास्तुकला एक ऐसी कला को कहा जाता है, जिसमें एक आयताकार आँगन होता है जो कि आमतौर पर तीन तरफ दीवारों से घिरा हुआ रहता है और एक सिरे से पूरी तरह से खुला हुआ रहता है। इस प्रकार के वास्तु में जो प्रवेश द्वार पाया जाता है उसे ‘पिश्ताक (एक इमारत के पृष्ट भाग में मौजूद प्रवेशद्वार के लिए एक फारसी शब्द)’ नाम से जाना जाता है, जिसे आमतौर पर सुलेख गिरोह, चमकदार टाइलवर्क (Tilework) और ज्यामितीय डिजाइनों के साथ सजाया जाता है। इवान का समग्र रूप और विशेषताएं पैमाने, सामग्री या सजावट के संदर्भ में बहुत भिन्न हो सकती हैं।

फारसी में, इवान का अर्थ 'बरामदा, खुला गलियारा, दरवाजा या महल' है और अरबी भाषा में यह शब्द फारसी अवधारणा को अवतरित करता है। सासनियन वास्तुकला में, राजाओं के स्वागत के लिए स्मारक इवान को 'श्रोतागण कक्ष' के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। इस्लामी काल से इसका कार्य हमेशा चर्चा का एक स्रोत रहा है। यह अज्ञात है कि क्या इवान ने एक आधिकारिक कार्य किया था या यहां तक कि इन स्थानों को इवान कहा जाता था भी या नहीं।

हालाँकि, इवान का अनुकरण तुरंत नहीं किया गया था। उदाहरण के लिए, चार-इवान योजना का कार्यान्वयन जो इस्लामी मस्जिद डिजाइन में आदर्श बन गया, परंतु पहली शताब्दी ईसा पूर्व में इसके आविष्कार के लंबे समय बाद बारहवीं शताब्दी तक इसे पेश नहीं किया गया था। 11 वीं शताब्दी में ईरान में, हाइपोस्टाइल मस्जिद को चार-इवान मस्जिद में परिवर्तित किया जाने लगा, जिसके नाम से ही यह संकेत मिलता है, कि इसकी वास्तुकला योजना में चार इवान शामिल हैं।

इस्फहान में सी-ओ-सी पोल (Si-o-Se Pol) के पुल जैसे घरों, सामुदायिक स्थानों और नागरिक संरचनाओं सहित बारहवीं शताब्दी से पहले इवान का इस्तेमाल अक्सर गैर-धार्मिक वास्तुकला में किया जाता था। साथ ही अक्सर इमारतों के बाहरी हिस्से पर कई इवान को बनाया जाता था, ताजमहल के रूप में, इवान को अक्सर आंतरिक स्थानों और आंगनों के सभी या कई किनारों पर बनाया जाता था। एक इस्लामी धार्मिक संदर्भ में इस्तेमाल किए जाने वाले पहले विस्तृत इवान में से एक को 12 वीं शताब्दी के यरूशलेम के मंदिर माउंट पर अल-अक्सा मस्जिद में देखा जा सकता है।

चित्र सन्दर्भ:
1. मुख्य चित्र में रामपुर में स्थित हामिद मंजिल (रज़ा पुस्तकालय) में इवान वास्तु की संरचना को दिखाया गया है। (Wikipedia)
2. दूसरे चित्र में ईरान के इस्फ़हान में स्थित जामेह मस्जिद ए इस्फ़हान को दिखाया गया है, जो इवान वास्तु का महत्वपूर्ण उदाहरण है। (Pexels)
3. तीसरे चित्र में ताजमहल में इवान का उदाहरण दिखाया गया है। (Prarang)
4. चौथे चित्र में शेख लुत्फ़अल्लाह मस्जिद और उज़्बेकिस्तान के बुखारा में स्थित मीर ए अरब मदरसा को दिखाया गया है। (Wikimedia)
5. पांचवे चित्र में तेसिफ़ोन (Ctesiphon) में स्थित खंडर में तक़ कस्रा (Taq-Kasna) के मुख्य इवान को दिखाया गया है। (Publicdomainpictures)
संदर्भ :-
http://jfa.arch.metu.edu.tr/archive/0258-5316/1991/cilt11/sayi_1_2/5-19.pdf
https://en.wikipedia.org/wiki/Iwan
https://www.oxfordreference.com/view/10.1093/oi/authority.20110803100328853
https://www.khanacademy.org/humanities/art-islam/beginners-guide-islamic-art/a/common-types-of-mosque-architecture



RECENT POST

  • लखनऊ की वृद्धि के साथ हम निवासियों को नहीं भूलना है सकारात्मक पर्यावरणीय व्यवहार
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     19-05-2022 09:47 AM


  • एक समय जब रेल सफर का मतलब था मिट्टी की सुगंध से भरी कुल्हड़ की स्वादिष्ट चाय
    म्रिदभाण्ड से काँच व आभूषण

     18-05-2022 08:47 AM


  • उत्तर प्रदेश में बौद्ध तीर्थ स्थल और उनका महत्व
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     17-05-2022 09:52 AM


  • देववाणी संस्कृत को आज भारत में एक से भी कम प्रतिशत आबादी बोल व् समझ सकती है
    ध्वनि 2- भाषायें

     17-05-2022 02:08 AM


  • बाढ़ नियंत्रण में कितने महत्वपूर्ण हैं, बीवर
    व्यवहारिक

     15-05-2022 03:36 PM


  • प्रारंभिक पारिस्थिति चेतावनी प्रणाली में नाजुक तितलियों का महत्व, लखनऊ में खुला बटरफ्लाई पार्क
    तितलियाँ व कीड़े

     14-05-2022 10:09 AM


  • लखनऊ सहित विश्व में सबसे पुराने और शानदार स्विमिंग पूलों या स्नानागारों का इतिहास
    य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला

     13-05-2022 09:41 AM


  • भारत में बढ़ती गर्मी की लहरें बन रही है विशेष वैश्विक चिंता का कारण
    जलवायु व ऋतु

     11-05-2022 09:10 PM


  • लखनऊ में रहने वाले, भाड़े के फ़्रांसीसी सैनिक क्लाउड मार्टिन का दिलचस्प इतिहास
    उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

     11-05-2022 12:11 PM


  • तेजी से उत्‍परिवर्तित होते वायरस एक गंभीर समस्‍या हो सकते हैं
    कीटाणु,एक कोशीय जीव,क्रोमिस्टा, व शैवाल

     10-05-2022 09:02 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id