जैविक विविधता और खाद्य सुरक्षा के उचित रखरखाव के लिए महत्वपूर्ण है जर्मप्लाज्म (Germplasm)

लखनऊ

 10-06-2020 10:40 AM
स्तनधारी

उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक राज्य है, लेकिन देश के अन्य राज्यों की तुलना में यहां जानवरों की औसत उत्पादकता कम है जिसका प्रमुख कारण राज्य में उच्च उपज वाले जर्मप्लाज्म (Germplasm) पशुओं की कमी है। जर्मप्लाज्म जीवित आनुवांशिक संसाधन जैसे - बीज या ऊतक हैं, जिनका पशु और पादप प्रजनन, संरक्षण और अन्य अनुसंधान में प्रयोग करने के उद्देश्य से रखरखाव किया जाता है। ये संसाधन बीज बैंकों में एकत्रित बीज संग्रह, नर्सरी में उगने वाले पेड़-पौधे, पशु प्रजनन कार्यक्रम या जीन बैंकों (Gene banks) में रखे गये पशु प्रजनन पंक्तियों आदि के रूप में हो सकते हैं। जर्मप्लाज्म का संग्रह मुख्य रूप से जैविक विविधता और खाद्य सुरक्षा के उचित रखरखाव के लिए महत्वपूर्ण है।

उच्च उपज वाले जर्मप्लाज्म (Germplasm) पशुओं की कमी के कारण उत्तर प्रदेश में 2013 में कामधेनु योजना शुरू की गयी। यह एक दुग्ध योजना है, जिसके अंतर्गत कामधेनु, लघु कामधेनु, और सूक्ष्म कामधेनु संस्करण को उत्तर प्रदेश सरकार के पशुपालन विभाग द्वारा शुरू किया गया। यह योजना उत्तर प्रदेश के बाहरी क्षेत्रों से लायी गयी 100 उच्च उपज देने वाली पशु इकाईयों की स्थापना के साथ शुरू हुई। इसके अंतर्गत उद्यमियों को ब्याज मुक्त ऋण और सब्सिडी (Subsidy) भी प्रदान की जाती है। योजना के माध्यम से राज्य में 50 मवेशियों की 100 और 25 मवेशियों की 1000 से अधिक दुग्ध फार्म (Farm) स्थापित की गयीं हैं। राष्ट्रीय दुग्ध विकास बोर्ड (National Dairy Development Board - NDDB) की राष्ट्रीय दुग्ध योजना (National Dairy Plan - NDP) उत्तर प्रदेश की इकाई के अंतर्गत आती है। वर्ष 2013-14 के दौरान, 241.939 लाख मैट्रिक टन (metric ton) (मैट्रिक टन = 1000 किलोग्राम) दुग्ध उत्पादन के साथ उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक राज्य बना था। कामधेनु योजना के मुख्य उद्देश्य उच्च गुणवत्ता वाले दुग्ध उत्पादक पशुओं के सृजन और पहुंच की सुरक्षा करना, अधिक उपज देने वाले जर्मप्लाज्म दुग्ध उत्पादक पशुओं की संख्या को बढाना, अधिक दूध देने वाले पशुओं की किसानों तक पहुँच सुनिश्चित करना, छोटे और सीमांत किसानों की सहायता सुनिश्चित करने हेतु लघु कामधेनु और सूक्ष्म कामधेनु योजना को अस्तित्व में लाना है।

राज्य में 5043 कृत्रिम वीर्यसेचन (Artificial insemination) केंद्र हैं जो किसानों के लिए गुणवत्तापूर्ण प्रजनन सेवाओं की आवश्यकता को पूरा करता है। कम उत्पादक देसी गायों का प्रजनन उच्च उत्पादन वाली विदेशी नस्लों जैसे होल्स्टीन फ्रेज़ियन (Holstein Friesian) और जर्सी बैलों (Jersey Bulls) द्वारा किया जाता है। राज्य में वर्ष 2002 से एक विस्तृत प्रजनन नीति प्रचलित है, जिसमें होलस्टीन फ्रेज़ियन बैल के साथ प्रजनन पर मुख्य जोर दिया जाता है। हालांकि अल्पविकसित क्षेत्रों में और लघु गाय प्रजनन पर जर्सी बैल के साथ प्रजनन को प्राथमिकता दी जाती है। इसके साथ ही स्वदेशी नस्लों के संरक्षण और प्रसार पर भी जोर दिया जाता है। भैंसों में प्रजनन मुर्राह और भदावरी जैसी देशी नस्लों द्वारा किया जाता है।

कृत्रिम वीर्यसेचन का संचालन बंध्यता प्रबंधन के साथ कृत्रिम वीर्यसेचन केंद्रों, गैर सरकारी संस्थानों आदि के द्वारा बंध्यता शिविरों के माध्यम से किया जाता है। राज्य में डीप फ्रोजन सीमेन (Deep frozen semen) स्टेशन चकगंजरिया, लखनऊ और बाबूगढ़, गाजियाबाद में स्थित हैं, जो गुणवत्तापूर्ण वीर्य ट्यूब (Tube) उपलब्ध कराते हैं और गुणवत्ता वाले बैल बनाए रखते हैं। प्राकृतिक प्रजनन सुनिश्चित करने के लिए, क्षेत्र में गुणवत्ता वाले बैल वितरित किए जाते हैं। बेहतर प्रजनन सेवाएं उत्तर प्रदेश पशुधन विकास बोर्ड (Uttar Pradesh Livestock Development Board - UPLDB) द्वारा सुनिश्चित की गई हैं। स्वतंत्रता के बाद पहली बार विभाग ने कामधेनु दुग्ध योजनाएं शुरू की हैं, जिसके तहत 100 गायों/भैंसों की 75 इकाईयाँ ब्याज उपबंध के साथ प्रस्तावित की गई थीं। योजना के लिए लक्ष्य को 75 इकाईयों से 425 इकाईयों तक बढ़ाने के लिए किसानों ने खासा उत्साह दिखाया है। 2500 इकाईयों के लक्ष्य के साथ छोटे किसानों के लिए 50 गाय/भैंस की लघु कामधेनु योजना भी शुरू की गई है।

चित्र सन्दर्भ:
1. मुख्य चित्र में दुधारू गायों का समूह है।
2. दूसरे चित्र में दुग्ध उत्पादन केंद्र में चारा कहती हुई गाय हैं।
3. तीसरे चित्र कामधेनु योजना का विज्ञापन है।
4. चौथे चित्र में दुग्ध उत्पादन के लिए मिनी कामधेनु डेरी का चित्रण है।

संदर्भ:
1. https://en.wikipedia.org/wiki/Germplasm
2. https://en.wikipedia.org/wiki/Kamdhenu_Yojna
3. http://www.animalhusb.upsdc.gov.in/en/major-activities



RECENT POST

  • मानवता की सबसे बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धियों में से एक है, लेजर इंटरफेरोमीटर गुरुत्वीय-तरंग वेधशाला द्वारा किये गये अवलोकन
    सिद्धान्त I-अवधारणा माप उपकरण (कागज/घड़ी)

     22-11-2020 10:34 AM


  • लखनऊ की अत्यंत ही महत्वपूर्ण धरोहर शाह नज़फ़ इमामबाड़ा
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     22-11-2020 11:21 AM


  • लखनऊ की दुर्लभ तस्‍वीरों का संकलन
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     21-11-2020 08:29 AM


  • वर्षों से शरणार्थियों को एक सुरक्षित आश्रय स्थल प्रदान कर रहा है, भारत
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     20-11-2020 09:30 PM


  • ईसाई धर्म के मुख्य संप्रदायों में से एक है, मेथोडिज्म
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     19-11-2020 10:18 AM


  • अमेरिका की सबसे बड़ी समस्‍या जैरिमेंडरिंग (Gerrymandering) पर एक नजर
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     18-11-2020 01:59 AM


  • भारतीय विकास में शुद्ध गणित की भूमिका
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     17-11-2020 08:45 AM


  • भारतीय संस्कृति और भाई दूज
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     16-11-2020 04:11 AM


  • पर्यटकों के लिए एक महत्वपूर्ण आकर्षण बन गया है, डुगॉन्ग
    मछलियाँ व उभयचर

     15-11-2020 08:54 PM


  • विश्व के विभिन्न हिस्सों में कैसे मनाई जाती है दिवाली
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     14-11-2020 03:33 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.