क्या आप जानते हैं काफी पौष्टिक होते हैं कुछ शैवाल?

लखनऊ

 03-01-2020 10:00 AM
शारीरिक

यह आम है कि अधिकांश लोगों के समक्ष शैवाल का नाम सुनते ही बदबूदार तालाब या एक उपेक्षित मछली टैंक की छवियाँ सामने आ जाती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शैवाल जलीय जीवों का एक विविध समूह है जो प्रकाश संश्लेषण का संचालन करने की क्षमता रखते हैं। कुछ शैवाल के बारे में अधिकांश लोगों को पता होगा, उदाहरण के लिए, समुद्री शैवाल, तालाब तलछट या झीलों में शैवाल के फूल। साथ ही इनमें कई प्रोटीन (Protein) और अन्य पोषक तत्व भी पाए जाते हैं, जिस कारण से इनको कई क्षेत्रों में भोजन के रूप में खाया भी जाता है।

अधिकांश शैवाल जलीय आवासों में रहते हैं। ये जीव मीठे पानी की झीलों में या खारे पानी के महासागरों में भी पनप सकते हैं। साथ ही ये तापमान, ऑक्सीजन (Oxygen) या कार्बन डाइऑक्साइड (Carbon Dioxide) सांद्रता, अम्लता और मैलेपन को भी सहन कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, विशाल केल्प (Kelp) ध्रुवीय बर्फ की चादरों से 200 मीटर से अधिक नीचे पाए जाते हैं। साथ ही शैवाल भूमि पर जीवित रहने में भी सक्षम हैं। कुछ अनपेक्षित जगहों जैसे पेड़ के तने, जानवरों की छाल, बर्फ के किनारे, गर्म झरने और मिट्टी में मरुस्थलीय परतों में भी ये देखे जा सकते हैं।

ज्यादातर, शैवाल अपने विभिन्न विकास रूपों में स्वतंत्र रूप से रहते हैं, लेकिन वे सिलियेट्स (Ciliates), स्पंज (Sponge), मोलस्क (Mollusk) और कवक सहित विभिन्न गैर-प्रकाश संश्लेषक जीवों के साथ सहजीवी संबंध भी बना लेते हैं। ऐसे संबंध में एक लाभ यह है कि वे शैवाल को अपने आवास के क्षितिज को फैलाने में सक्षम बनाते हैं। साथ ही शैवाल प्रकाश संश्लेषण में सक्षम हैं और कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrate) और ऑक्सीजन उत्पन्न करने के लिए कार्बन डाइऑक्साइड और सूर्य की प्रकाश ऊर्जा का उपयोग करके अपने स्वयं के पोषण का उत्पादन करते हैं।

हालांकि, इनमें कुछ ऐसी प्रजातियां भी मौजूद हैं जिन्हें केवल बाहरी स्रोतों से अपना पोषण प्राप्त करने की आवश्यकता होती है क्योंकि वे परपोषित होते हैं। इस तरह की प्रजातियां कार्बनिक पदार्थों से पोषक तत्वों को प्राप्त करने के लिए कई प्रकार की परपोषित रणनीतियों को लागू करती हैं। इनके पोषक तत्वों के कारण इनकी अधिकांश जगहों में खेती की जाती है। खेती की जाने वाली अधिकांश शैवाल माइक्रोअलगे (Microalgae) की श्रेणी में आती हैं। मैक्रोअलगे (Macroalgae), जिसे आमतौर पर समुद्री शैवाल के रूप में जाना जाता है, के भी कई वाणिज्यिक और औद्योगिक उपयोग हैं, लेकिन उनके आकार और पर्यावरण की विशिष्ट आवश्यकताओं के कारण इनकी खेती करना आसान नहीं है।

वाणिज्यिक और औद्योगिक शैवाल की खेती के कई उपयोग हैं, जिनमें ओमेगा-3 फैटी एसिड (Omega-3 Fatty Acid) या प्राकृतिक खाद्य के रंग, उर्वरक, जैवप्लास्टिक्स, रासायनिक फीडस्टॉक (कच्चा माल), औषधीय और शैवाल ईंधन जैसे खाद्य सामग्री का उत्पादन शामिल है, और साथ ही इन्हें प्रदूषण नियंत्रण के साधन के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। खेती वाले जलीय पौधों का वैश्विक उत्पादन, समुद्री शैवाल के वर्चस्व के कारण, 1995 में उत्पादन मात्रा में 13.5 मिलियन टन से बढ़कर 2016 में 30 मिलियन टन हो गया। अधिकांश उत्पादक मोनोकल्चर (Monoculture) उत्पादन पसंद करते हैं और उपज की शुद्धता बनाए रखने के लिए काफी कुछ करते हैं। शैवाल की खेती में पानी, कार्बन डाइऑक्साइड, खनिज और प्रकाश सभी महत्वपूर्ण कारक हैं और अलग-अलग शैवाल की अलग-अलग आवश्यकताएं होती हैं।

पानी में शैवाल की वृद्धि के लिए बुनियादी प्रतिक्रिया कार्बन डाइऑक्साइड + प्रकाश ऊर्जा + पानी = ग्लूकोज़ (Glucose) + ऑक्सीजन + पानी है। इसे ऑटोट्रोफिक (Autotrophic) विकास कहा जाता है। प्रकाश के बिना भी कुछ प्रकार के शैवाल को विकसित करना संभव है। इस प्रकार के शैवाल शर्करा (जैसे ग्लूकोज) का उपभोग करते हैं। इसे हेटरोट्रॉफिक ग्रोथ (Heterotrophic Growth) के रूप में जाना जाता है।

क्या आप जानते हैं शैवाल की कई प्रजातियों को भोजन के लिए भी उपयोग किया जाता है :-
बैंगनी लेवर (Purple Laver) शायद सबसे व्यापक रूप से उगाए जाने वाला समुद्री शैवाल है। एशिया में इसका उपयोग जापान और कोरिया में किया जाता है। वेल्स में, इसका उपयोग लेवरब्रेड (Laverbread), एक पारंपरिक भोजन में किया जाता है, और आयरलैंड में इसे इकट्ठा करके और उबालकर जेली (Jelly) बनाई जाती है।
दुल्स, आयरलैंड और अटलांटिक कनाडा में बेची जाने वाली एक लाल प्रजाति है। इसे कच्चा, ताज़ा, सूखा या पालक की तरह पकाया जाता है।
स्पिरुलिना (Spirulina) एक नीला-हरा माइक्रोअलगे है जिसका पूर्वी अफ्रीका और पूर्व-औपनिवेशिक मेक्सिको में एक खाद्य स्रोत के रूप में उपयोग किया जाता है। स्पिरुलिना प्रोटीन और अन्य पोषक तत्वों में उच्च होता है। इसका भोजन के पूरक के रूप में और कुपोषण के लिए उपयोग किया जा सकता है।
क्लोरेला (माइक्रोअलगे) जापान में बहुत लोकप्रिय है। यह चयापचय दर पर संभावित प्रभावों के साथ एक पोषण पूरक के रूप में भी उपयोग किया जाता है।
सी लेट्यूस (Sea Lettuce) का उपयोग स्कॉटलैंड में किया जाता है जहां इसका सूप और सलाद में उपयोग किया जाता है।

संदर्भ:
1.
https://www.livescience.com/54979-what-are-algae.html
2. https://www.businessinsider.in/home/the-next-big-superfood-could-be-green-and-slimy/articleshow/38875069.cms
3. https://en.wikipedia.org/wiki/Algaculture
चित्र सन्दर्भ:-
1.
https://en.wikipedia.org/wiki/Laverbread#/media/File:Laver_and_toast.JPG
2. https://en.wikipedia.org/wiki/Porphyra
3. https://bit.ly/36wjUcQ
4. https://pixabay.com/no/photos/tang-stein-tuan-havet-salat-672981/



RECENT POST

  • लॉकडाउन के बाद बोर्ड गेम में देखी गई काफी वृद्धि
    हथियार व खिलौने

     07-08-2020 06:21 PM


  • बदलते समय की बदलती तकनीक - कृषि मशीनीकरण
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     06-08-2020 01:20 AM


  • नवाब शहर को मानवता, दया और प्रेम का संदेश देता है बडा इमामबाडा
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     05-08-2020 09:30 AM


  • क्या रहा लखनऊ की वनस्पतियों के अनुसार, अब तक प्रारंग का सफर
    शारीरिक

     04-08-2020 10:00 AM


  • अवधी खाने में दम देना
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     04-08-2020 08:45 AM


  • भाई बहन बदलते हैं एक दूसरे का जीवन
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     31-07-2020 04:08 PM


  • साँप गाँव शेटपाल
    रेंगने वाले जीव

     31-07-2020 05:33 PM


  • लखनऊ में स्थित चन्द्रिका देवी का भव्य मंदिर का महत्व
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     31-07-2020 06:01 PM


  • शाकाहार के विपरीत नहीं हैं इस्लाम धर्म की मान्यताएं
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     31-07-2020 06:14 PM


  • क्या रहा मनुष्य और उसके आविष्कारों के अनुसार अब तक प्रारंग और लखनऊ का सफर
    म्रिदभाण्ड से काँच व आभूषण

     30-07-2020 02:40 PM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.