औषधीय गुणों से भरपूर है सहजन का पौधा

लखनऊ

 04-12-2019 11:24 AM
पेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें

प्रकृति ने हमें वरदान के रूप में कई ऐसे पेड़-पौधे और जड़ी-बूटियां दी हैं जो हमारी कई स्वास्थ्य समस्याओं को दूर कर सकती हैं। ऐसा ही एक पौधा सहजन (वानस्पतिक नाम: ‘मोरिंगा ओलिफेरा’/Moringa oleifera) है, जो लखनऊ में काफी आम है। सहजन दक्षिण एशिया के क्षेत्रों के मूल निवासी ‘मोरिंगशिए’ परिवार का एक तेज़ी से विकसित होने वाला पेड़ है। यह भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के क्षेत्रों में मूल रूप से पाया जाता है। यह उष्ण कटिबंध में भी उगाया जाता है और औषधि बनाने के लिए इसके पत्ते, छाल, फूल, फल, बीज और जड़ लगभग सभी हिस्सों का उपयोग किया जाता है।

सहजन एक पर्णपाती पेड़ है जिसका कद 10-12 मीटर की ऊंचाई तक और तने का व्यास 45 सेमी तक पहुंच सकता है। वहीं छाल में एक सफेद-ग्रे रंग होता है और यह मोटे काग से घिरा होता है। इसकी टहनी में बैंगनी या हरी-सफेद छाल होती है। सहजन के पौधे में रोपण के बाद पहले छह महीनों के भीतर फूल आना शुरू हो जाते हैं। इसके फूल सुगंधित होते हैं, जो पांच असमान, पतले घने, पीले-सफेद पंखुड़ियों से घिरे होते हैं। ये फूल लगभग 1.0-1.5 सेमी लंबे और 2.0 सेमी चौड़े होते हैं।

सहजन का पेड़ मुख्य रूप से अर्द्ध-शुष्क, उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में उगाया जाता है, जो संयुक्त राज्य अमेरिका में यूएसडीए (USDA) कठोरता क्षेत्र 9 और 10 के अनुरूप है। यह मिट्टी की एक विस्तृत श्रृंखला को सहन कर सकता है, लेकिन थोड़ी तटस्थ से अम्लीय, अच्छी तरह से सूखी रेतीली या दोमट मिट्टी इसके लिए ज्यादा उपयुक्त होती है। साथ ही यह शुष्क क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है, क्योंकि यह महंगी सिंचाई तकनीकों के बिना वर्षा जल का उपयोग करके उगाया जा सकता है।

सहजन दुनिया के कुछ हिस्सों में एक महत्वपूर्ण खाद्य स्रोत है। क्योंकि यह सस्ता होने के साथ साथ आसानी से उगाया जा सकता है, और सूखे होने पर इसकी पत्तियों में बहुत सारे विटामिन और खनिज पाए जाते हैं, जिसके चलते भारत और अफ्रीका में कुपोषण से लड़ने के लिए सहजन का उपयोग किया जाता है। सहजन की फली वात व उदरशूल में पत्ती नेत्ररोग, मोच, शियाटिका ,गठिया, दमा, जलोधर, पथरी, प्लीहा रोग के लिए उपयोगी है। छाल का उपयोग शियाटिका, गठिया, यकृत आदि रोगों के लिए श्रेयष्कर है।

सहजन के विभिन्न अंगों के रस को मधुर, वातघ्न, रुचिकारक, वेदनाशक, पाचक आदि गुणों के रूप में जाना जाता है। सहजन की छाल में शहद मिलाकर पीने से वात व कफ रोग शांत हो जाते हैं। इसकी पत्ती का काढ़ा बनाकर पीने से गठिया, शियाटिका, पक्षाघात, वायु विकार में शीघ्र लाभ पहुंचता है। शियाटिका के तीव्र वेग में इसकी जड़ का काढ़ा तीव्र गति से चमत्कारी प्रभाव दिखता है।

वैज्ञानिकों द्वारा भी सहजन से होने वाले स्वास्थ्य लाभ की पुष्टि की गई है, जो निम्नलिखित है :-
1) सहजन बहुत पौष्टिक है :-
सहजन की पत्तियां प्रोटीन (Protein), विटामिन बी 6 (Vitamin B6), विटामिन सी, राइबोफ्लेविन (Riboflavin) और आयरन (Iron) सहित कई महत्वपूर्ण पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं।
2) सहजन प्रतिउपचायक में समृद्ध है :- सहजन विभिन्न एंटीऑक्सिडेंट (Antioxidants) से समृद्ध है, जिसमें क्वेरसेटिन (Quercetin) और क्लोरोजेनिक एसिड (Chlorogenic Acid) शामिल हैं। मोरिंगा पत्तियों का पाउडर (Powder) रक्त एंटीऑक्सीडेंट के स्तर को बढ़ा सकता है।
3) सहजन रक्तशर्करा के स्तर को कम करता है :- सहजन के पत्तों से रक्त शर्करा के स्तर में कमी आ सकती है, लेकिन किसी भी उपाय को करने से पहले अधिक शोध की आवश्यकता है।
4) सहजन रक्तवसा को कम करने में मदद करता है: - सहजन रक्तवसा के स्तर को कम कर सकता है और संभवतः हृदय रोग के जोखिम को भी कम करता है।

वैसे तो सहजन के पत्ते, फल, और बीज भोजन के रूप में खाने में संभवतः सुरक्षित हैं। वहीं इसके पत्ते और बीज दवा के रूप में कम समय के लिए मुंह से लिए जाने पर सुरक्षित हैं। सहजन के पत्ते वाले उत्पादों को 90 दिनों तक स्पष्ट सुरक्षा के साथ उपयोग किया जा सकता है और इसके बीज वाले उत्पादों को 3 सप्ताह तक स्पष्ट सुरक्षा के साथ उपयोग किया जा सकता है। लेकिन सहजन की जड़ और जड़ से बनी सामग्री का सेवन करना असुरक्षित पाया गया है क्योंकि इसकी जड़ों में एक विषैला पदार्थ स्पाइरोकिन (Spirochin) होता है। वहीं उपयुक्त दिए गए किसी भी उपाए को उपयोग करने से पूर्व चिकित्सक से सलह अवश्य लें।

संदर्भ :-
1.
https://en.wikipedia.org/wiki/Moringa_oleifera
2. https://bit.ly/33Ppt46
3. https://www.healthline.com/nutrition/6-benefits-of-moringa-oleifera
4. https://www.emedicinehealth.com/moringa/vitamins-supplements.htm
चित्र सन्दर्भ:-
1.
https://commons.wikimedia.org/wiki/Morus_nigra
2. https://en.wikipedia.org/wiki/Moringa_oleifera#/media/File:DrumstickFlower.jpg
3. https://en.wikipedia.org/wiki/Moringa_oleifera#/media/File:Moringa_flower_5.jpg
4. https://pixabay.com/pt/photos/planta-moringa-oleifera-superfood-2307261/
5. https://www.flickr.com/photos/jircas/36577424952



RECENT POST

  • मानव सभ्यता के विकास का महत्वपूर्ण काल है, नवपाषाण युग
    ठहरावः 2000 ईसापूर्व से 600 ईसापूर्व तक

     01-12-2020 10:22 AM


  • खट्टे-मीठे विशिष्ट स्वाद के कारण पूरे विश्व भर में लोकप्रिय है, संतरा
    साग-सब्जियाँ

     30-11-2020 09:24 AM


  • सोने-कांच की तस्वीरों में आज भी जीवित है, कुछ रोमन लोगों के चेहरे
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     29-11-2020 07:21 PM


  • कोरोना महामारी बनाम घरेलू किचन गार्डन
    पेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें

     28-11-2020 09:06 AM


  • लखनऊ की परिष्कृत और उत्कृष्ट संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है, इत्र निर्माण की कला
    गंध- ख़ुशबू व इत्र

     27-11-2020 08:39 AM


  • भारतीय कला पर हेलेनिस्टिक (Hellenistic) कला का प्रभाव
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     26-11-2020 09:20 AM


  • पाक-कला की एक उत्‍कृष्‍ट शैली लाइव कुकिंग
    द्रिश्य 2- अभिनय कला

     25-11-2020 10:32 AM


  • आत्मा और मानव जाति की मृत्यु, निर्णय और अंतिम नियति से सम्बंधित है, एस्केटोलॉजी
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     24-11-2020 08:40 AM


  • मानवता की सबसे बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धियों में से एक है, लेजर इंटरफेरोमीटर गुरुत्वीय-तरंग वेधशाला द्वारा किये गये अवलोकन
    सिद्धान्त I-अवधारणा माप उपकरण (कागज/घड़ी)

     22-11-2020 10:34 AM


  • लखनऊ की अत्यंत ही महत्वपूर्ण धरोहर शाह नज़फ़ इमामबाड़ा
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     22-11-2020 11:21 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.