समुद्री स्तनधारियों का पारिस्थितिकी तंत्र में महत्व

लखनऊ

 30-11-2019 11:57 AM
समुद्री संसाधन

इस पृथ्वी पर विभिन्न प्रकार के जीव पाए जाते हैं उनमें से एक हैं स्तनधारी जीव। पूरे पृथ्वी पर सबसे बड़े से लेकर छोटे जीवों में स्तनधारियों की संख्या खूब है। प्रमुख वृहत स्तनधारियों की बात की जाए तो हाथी, गैंडा, दरियायी घोड़ा आदि हैं। ये तमाम जीव जमीन पर चलते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं की पानी में भी स्तनधारी जीव पाए जाते हैं?

इस लेख के माध्यम से आइये पढ़ते हैं जल में रहने वाले स्तनधारियों के बारे में उनकी विशेषताओं के बारे में और उनकी भूमिका के बारे में भी। समुद्री स्तनधारी मुख्य रूप से जलीय स्तनधारी होते हैं। ये समुद्र के पारिस्थितिकी तंत्र या जलीय पारिस्थितिकी तंत्र में रहने वाले होते हैं। इनमे यदि देखा जाए तो सील, व्हेल, मैनेट, समुद्री ऊदबिलाव और ध्रुवीय भालू आदि हैं। ये ऐसे जीव हैं जो की समुद्र या जल में उत्पन्न भोज्य का प्रयोग करते हैं और जल में रहना पसंद करते हैं। इन जीवों का जीवन काल अन्य जीवों से काफी भिन्न होता है और ये मुख्य रूप से अधिकाँश समय जल में ही बिताना पसंद करते हैं।

अब सील और सी लायन को ही देख लो वे अपना अधिकाँश समय जल में ही बिताते हैं परन्तु मैटिंग और ब्रीडिंग के समय वे जमीन पर लौट जाते हैं। वहीँ ऊदबिलाव और ध्रुवीय भालू पूर्ण रूप से जल पर आश्रित होते हैं लेकिन वे जमीन पर रहना पसंद करते हैं। जमीन पर पाए जाने वाले स्तनधारियों से पानी में पाए जाने वाले स्तनधारियों की संख्या अत्यंत ही कम है। समुद्र के अंदर के पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित बना कर रखने में जलीव स्तनधारियों की एक अहम् भूमिका होती है।

वर्तमान समय में मनुष्यों के ज्यादा समुद्र और पर्यावरण में हस्तक्षेप के कारण करीब 23 फीसद जलीय स्तनधारियों की प्रजाति को खतरा है। पहले समुद्री स्तनधारियों को भोजन और अन्य संसाधनों के लिए बड़ी संख्या में मारा जाता था जो की आज भी प्रचलित है। वहीँ वाणिज्यिक उद्योग के लिए भी इनका शिकार बड़ी संख्या में किया गया था। स्पर्म व्हेल की एक बड़ी आबादी को मध्यकाल में तेल के लिए मार दिया जाता था।

वाणिज्यिक शिकार ने जापानी समुद्र से एक बड़ी स्तनधारियों की प्रजाति को पूर्ण रूप से विलुप्त कर दिया। व्यवसाईक शिकार के कारण ही व्हेल और एलीफैंट सील की संख्या में बड़ी गिरावट देखि गयी है और कितने जगह पर ये विलुप्तता के कगार पर खड़े हैं। जैसा की इन स्तनधारियों का आकार वृहत होता है तो काफी हद तक ये समुद्र में बढ़ते हुए यातायात की वजह से भी दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं।

विभिन्न पर्यावरण के दुष्प्रभावों के कारण भी इनकी संख्या कम हो रही है जैसे की ध्रुवीय भालू को देखा जा सकता है। ये जीव पर्यटन के लिए भी महत्वपूर्ण हैं और ये नए दौर का पर्यटन माना जाता है। इस पर्यटन में मत्स्यपालन और जलीय कृषि से भी ज्यादा फायदा होता है। पर्यटन वर्तमान काल में एक बेहतर उद्योग के रूप में निकल कर सामने आ रही है।

इसमें चार्टर फिशिंग बोट यात्रा, समुद्री कश्ती पर्यटन, स्कूबा डाइविंग और बड़ी स्तनधारियों और जलीय जीवों को देखने का व्यवसाय शामिल है। भारत में भी बड़ी संख्या में ये स्तनधारी पाए जाते हैं जो की यहाँ पर पर्यटन का सुनहरा अवसर प्रदान करते हैं। भारत की समुद्री सीमा 8000 किलोमीटर के करीब है और यह विविधिताओं से भरी हुयी है अतः यहाँ पर इस व्यापार से एक बड़ी आर्थिक मजबूती प्राप्त हो सकती है।

सन्दर्भ:-
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https://en.wikipedia.org/wiki/Polar_bear
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https://pxhere.com/en/photo/783251
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