अन्धविश्वास के घेरे में आई ये नायाब और अनोखी छिपकली

लखनऊ

 02-09-2019 02:47 PM
रेंगने वाले जीव

समाज के लिए यदि कुछ सबसे अधिक हानिकारक है और समाज जिसके कारण अपनी अमूल्य संपदा को खर्च करने में ज़रा सा भी नहीं सोचता, वह है अंधविश्वास। अंधविश्वास मानवों का नुक्सान तो करता ही है परन्तु इसके साथ ही साथ यह अनेकों प्रजाति के जीवों को भी काल के गाल में समा देता है। भारत और आस-पास के अन्य देशों जैसे कि नेपाल, तिब्बत और भूटान में एक ऐसा सरीसृप पाया जाता है जो लोगों के अंधविश्वास के चलते अचानक ही विलुप्तता की कगार पर पहुँच गया है।

यह जीव है तक्षक या ‘टोकाय गेको’ (Tokay Gecko)। तक्षक एक प्रकार की छिपकली है जो कि करीब 40 सेंटीमीटर लम्बाई और 200 ग्राम वज़न तक की हो सकती है। यह छिपकली एशिया ही नहीं बल्कि विश्व की सबसे बड़ी छिपकली की प्रजाति है। ये जीव वर्षावनों में अपना निवास स्थान बनाते हैं तथा इनका घर मूलरूप से पेड़ों आदि के कोटरों और छालों के अन्दर होता है। ये जीव मानव निवासों में भी रहने लायक अपने आप को ढाल लेते हैं। मानव निवासों में ये जीव दीवारों आदि पर देखने को मिल जाते हैं। इन जीवों को यदि संरक्षण में रखा जाए तो ये करीब 18 साल तक और यदि ये अपने प्राकृतिक आवास में रहे तो 7-10 साल तक जीवित रह सकते हैं।

पिछले कुछ वर्षों से ये जीव अपने से जुड़े कुछ अंधविश्वास के कारण तेज़ी से समाप्त होने की कगार पर हैं। चीन और अन्य कुछ देशों में यह धारणा है कि तक्षक से बनी दवाइयों के सेवन से एड्स (AIDS) जैसी बिमारी से भी निजात पाया जा सकता है। यह एक कारण है कि बड़ी संख्या में लोग इस जीव के पीछे पड़े हुए हैं। आज एक वयस्क तक्षक की कीमत बाज़ार में करोड़ों रूपए की है। आये दिन विश्व बाज़ार में पकड़े गए जीवों में जिनकी तस्करी की जा रही थी, में तक्षक की संख्या बहुत ही ज़्यादा है। एड्स के अलावा यह भी माना जाता है कि इनसे घाव आदि पर भी आराम पाया जा सकता है। हांलांकि अब तक हुए प्रयोगों में यह सिद्ध हो चुका है कि तक्षक के मांस या किसी भी अंग से किसी भी प्रकार की बिमारी का इलाज संभव नहीं है। परन्तु मानव और उसके अंधविश्वास के कारण ही आज तक्षक को जंगल अधिनियम के अनुसार विलुप्त प्राय प्राणी III और IV में स्थान दिया गया है।

भारत में लगाये गए नकेल के कारण इस जीव के व्यापार पर असर पड़ने के अच्छे आसार मिलने का संकेत है। इस जीव की तस्करी की गंभीरता का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि इस जीव को खरीदने और बेचने के लिए तस्करों ने बकायदे फेसबुक पेज (Facebook Pages) और वेबसाइटें (Websites) बनायीं हैं। तक्षक को अंधविश्वास से बचाने के लिए लोगों को शिक्षित और जागरूक करने की कवायद करना एक ऐसा कदम हो सकता है जो इस जीव को फिर से जंगलों में बड़ी संख्या में स्थापित करने में सहायक हो सकता है।

संदर्भ:-
1.
https://bit.ly/2jYAUFW
2. https://www.dw.com/en/indian-geckos-are-in-high-demand-for-hiv-cures/a-16328544
3. http://www.conservationindia.org/gallery/tokay-gecko-the-million-rupee-reptile
4. https://bit.ly/2lTQWS1



RECENT POST

  • मछलियों के संरक्षण में सहायक हैं धार्मिक और प्रथागत मान्यताएं
    मछलियाँ व उभयचर

     26-10-2021 06:35 PM


  • जानवर बिल क्यों बनाते हैं
    स्तनधारी

     25-10-2021 12:18 PM


  • दुनिया के सबसे मेहनती जीवों में से एक चिंटियां
    निवास स्थान

     24-10-2021 10:17 AM


  • सिखों के महत्वपूर्ण प्रतीकों का इतिहास धार्मिक महत्व तथा आधुनिक परिभाषा
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     23-10-2021 05:54 PM


  • भारत के गंगा के मैदानी इलाकों में वायु प्रदूषण और इसका सर्दियों के मौसम से संबंध
    जलवायु व ऋतु

     22-10-2021 08:20 AM


  • हिमालय का उपहार होते हैं वसंत के फूल
    बागवानी के पौधे (बागान)

     21-10-2021 08:24 AM


  • लौकी की उत्पत्ति इतिहास व वाद्ययंत्रों में महत्‍तव
    साग-सब्जियाँ

     21-10-2021 05:41 AM


  • देश के आर्थिक विकास और वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं प्रवासी भारतीय
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     20-10-2021 08:20 AM


  • मौलिद ईद उल मिलाद अर्थात पैगंबर मुहम्मद के जन्मदिन की दोहरी विचारधारा
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     18-10-2021 11:43 AM


  • दुनिया के सबसे बदसूरत जानवर के रूप में चुना गया है, ब्लॉबफ़िश
    शारीरिक

     17-10-2021 11:58 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id