जनसँख्या विस्फोट पर नकेल कसने का एक प्रयास, मिशन परिवार विकास

लखनऊ

 26-06-2019 12:27 PM
नगरीकरण- शहर व शक्ति

वर्तमान काल में यदि किसी समस्या ने पृथ्वी पर सबसे ज्यादा प्रभाव डाला है तो वह है जनसँख्या विस्फोट। जनसँख्या विस्फोट के कारण ही आज वर्तमान काल में जंगलों की कटाई, हिमनदों का पिघलना, भूगर्भ जल की अत्यधिक दुहाई, पर्यावरण में नुकसानदायक पदार्थों की अधिकता आदि हुयी है। चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे ज्यादा आबादी वाला देश है। एक समय पर भारत जंगलों और नदियों के देश के रूप में जाना जाता था परन्तु आज यहाँ की स्थिति मात्र इस लिए खराब हुयी है क्यूंकि यहाँ पर जनसँख्या अत्यधिक तेज़ी के साथ बढ़ रही है। भारत में सबसे ज्यादा आबादी वाला राज्य उत्तर प्रदेश है। जनसँख्या पर रोकथाम एक अत्यंत ही महत्वपूर्ण और ज़रूरी बिंदु है। समय समय पर कई ऐसी योजनाएं आयीं जिनका काम जनसँख्या पर रोक लगाने का था। उन्हीं योजनाओं में गर्भनिरोधक गोली, नसबंदी, निरोध आदि आते हैं। इन योजनाओं का यदि ज़मीनी स्तर पर अध्ययन किया जाए तो इनका प्रभाव तो पड़ा पर एक वृहद क्षेत्र में यह कारगर नहीं साबित हुईं।

जनसँख्या के इस फैलाव को रोकने के लिए वर्तमान में एक नयी योजना की शुरुवात की गयी जिसका नाम है ‘मिशन परिवार विकास’ । यह योजना देश भर के सबसे ज्यादा जनसँख्या घनत्व वाले 7 राज्यों (उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छतीसगढ़, झारखंड और असम) के 145 जिलों में कार्यरत है। ये 7 राज्य देश की 44% आबादी को अपने में लिए हुए हैं। ये 145 जिले ऐसे हैं जहाँ की जनन क्षमता 3 या 3 से अधिक है। चुने हुए जिले ऐसे हैं जहाँ पर सबसे ज्यादा प्रसव के दौरान नवजातों का निधन होता है। यदि गणितीय अध्ययन करके देखा जाए तो यह पता चलता है कि इन जिलों में करीब 25-30% गर्भवती महिला की और करीब 50% नवजातों की मृत्यु हो जाती है। इन दिए गए 145 जिलों में से 115 जिले ऐसे हैं जहाँ पर अधिक मात्रा में किशोर माताएं (अर्थात कम उम्र की माएं) निवास करती हैं।

जनसँख्या नियंत्रण के लिए चलाये गए इस अभियान में गर्भनिरोधक गोलियों के बारे में जानकारी देना एक अहम् बिंदु है। गर्भ निरोधक गोलियां अनचाहे गर्भ से निजात दिलाती हैं, तथा बच्चों के मध्य एक समय सीमा का भी निर्धारण करती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की एक रिपोर्ट से पता चला है कि विश्व स्तर पर गर्भनिरोधक गोलियों की वजह से प्रसव में बड़ी कमी आई है। पिछले कुछ दशकों के अध्ययन से पता चला है कि करीब 1965-70 के मध्य करीब 9% विवाहित महिलाएं ही गर्भनिरोधक उपायों का इस्तेमाल करती थीं जो कि 1985-90 के मध्य बढ़ कर 50% हो गया था और इसका प्रभाव यह पड़ा कि विकासशील देशों की जनसँख्या में कुल 6% की गिरावट देखने को मिली। गर्भनिरोध के प्रमुख उपायों में से एक कंडोम (Condom) है जो कि गर्भनिरोध के साथ ही साथ अन्य कई बीमारियों से भी लोगों को दूर रखता है। परिवार विकास योजना में गर्भनिरोधक गोलियों के अलावा अन्य गर्भनिरोध के उपायों के बारे में जानकारी देना और अस्पतालों में इन उपायों की उपलब्धता कराना निहित है। लखनऊ जो कि देश के सबसे ज्यादा आबादी वाले प्रदेश की राजधानी है, में भी इन उपायों को और वृहद स्तर पर ले जाने की आवश्यकता है।

संदर्भ:
1. http://pib.nic.in/newsite/PrintRelease.aspx?relid=151049
2. https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/1462719
3. https://bit.ly/31VV3NJ
4. https://www.bestcurrentaffairs.com/mission-parivar-vikas-launched/
5. https://bit.ly/2RzYyEU



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