फ्रीलांसरों और बिजनेस स्टार्टअप के लिये आकर्षण का केंद्र है सह-कार्यक्षेत्र (Co-Working Space)

लखनऊ

 24-05-2019 10:30 AM
नगरीकरण- शहर व शक्ति

वर्तमान में औपचारिक नौकरी की कमी के कारण युवाओं का रूख अनौपचारिक व्यवसायों की तरफ हो रहा हैं और इंटरनेट के युग में युवा घर बैठे ही ऐसे कई कार्य कर रहें हैं जो उनकी आय का स्रोत बन जाता है किंतु घर पर बैठकर अपने व्यवसाय के साथियों के साथ सामंजस्य स्थापित करना बहुत कठिन है, और इस लिये आज कई सह-कार्य क्षेत्र (Co-Working Space) उपलब्ध हैं जहां आप अपने साथियों के साथ बैठ कर कार्य कर सकते हैं। सह-कार्य को सहकर्मी कंपनियों के लिए एकस्व-निर्देशित, सहयोगी, लचीली और स्वैच्छिक कार्य शैली के रूप में परिभाषित किया जाता है। इसके लिये एक कार्य क्षेत्र उपलब्ध कराया जाता हैं जिसमें कई लोग एक ही कार्य स्थल को साझा करते हैं किंतु गतिविधियां स्वतंत्र होती हैं। यह किसी विशेष संगठन द्वारा नियोजित नहीं किया जाता। सह-कार्य क्षेत्र उन समस्याओं से निजात दिलाता है जो कई फ्रीलांसरों (Freelancers) ने घर पर कार्य करते समय महसूस की है हालांकि कार्य स्थल के लिये कुछ पैसे भी खर्च करने पड़ते हैं। कई स्थानों पर यह नि:शुल्क भी उपलब्ध है। यह घर पर कार्य करने वाले कर्मियों, स्वतंत्र अनुबंधकों और स्वतंत्र वैज्ञानिकों के लिये आकर्षण का केंद्र है।

सह-कार्य क्षेत्र में कुछ कमियां हैं जो कार्यालय व्यापार केंद्र (Business Centres) को थोड़ा प्रबल बना देती हैं जैसे सह-कार्य क्षेत्र के लिये आपके प्रति माह लगभग 20,000-25,000 रुपये खर्च होंगें जबकि कार्यालय व्यापार केंद्र में लगभग 14,000-17,000 रुपये प्रति माह में ही आप साझा कार्यालय स्थान प्राप्त कर सकते हैं। कार्यालय व्यापार केंद्र आपको वर्ष में 345 घंटे का उपयोग प्रदान कर सकता है जबकि ऐसी पेशकश करने वाले सह-कार्य केंद्र कम ही हैं। सह-कार्य स्थानों में ग्राहक और सदस्यों के साथ निजी बैठक के लिए के लिए सार्वजनिक बैठक कक्ष प्रदान किया जाता है।जबकि कार्यालय व्यापार केंद्र में आप ग्राहक को अपना वास्तविक कार्यालय दिखाये बिना ही उन्हें बुक किए गए बैठक कक्ष में ले जा सकते हैं। कई सह-कार्य क्षेत्र आपको प्रतिष्ठित व्यावसायिक पता उपलब्ध नहीं करा पाते जो ग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण होता है। कार्यालय व्यापार केंद्र न केवल आपको एक मुख्य व्यवसाय पता देता है बल्कि आपके मेल और कूरियर पैकेज को तब भी आप तक पहुंचा देता है जब आप शारीरिक रूप से वहां उपस्थित नहीं होते।

जहाँ विश्व में सह-कार्य क्षेत्रविकास तेजी से हो रहा है वही भारत भी इसमें पीछे नहीं है। आंकड़ों के अनुसार पूरे भारत में इसकी मांग इतनी तेजी से बढ़ रही है कि 2020 तक लगभग 13 मिलियन लोग सह-कार्य क्षेत्र से जुड़ जाएंगे। बेंगलुरु, मुंबई, दिल्ली एनसीआर और लखनऊ सहित कई प्रमुख शहर सह-कार्य क्षेत्र के मुख्य केंद्र के रूप में उभरे हैं। भारत के करीब 5200 बिजनेस स्टार्टअप इसे अपना रहें हैं तथा लगभग 46% कार्य बल इससे जुडा हुआ है। सह-कार्य स्थान केवल स्टार्ट-अप और फ्रीलांसरों तक ही सीमित नहीं है बल्कि बड़ी-बड़ी पूर्व स्थापित कपनियां भी इससे प्रभावित हो रहीं हैं।एपीजे बिजनेस तथा अवंता इंडिया समेत कई रियल एस्टेट कम्पनियां (Real Estate Company)चेन्नई, गुरुग्राम, कोलकाता, मुंबई, नवी मुंबई, पुणे, दिल्ली और अन्य स्थानों में साझा सेवायुक्त कार्यालय स्थान प्रदान कर रहींहैं। लखनऊ में भी इसका विस्तार देखने को मिल रहा है। इनक्युस्पेज़ (Incuspaze) गोमती नगर, क्यूवर्की को-वर्किंग स्पेस(Qworky Co-Working Space) इंद्रानगर, क्यूवर्की लेवेना साइबर हाइट्स (Qworky Levana Cyber Heights) गोमती नगर, क्वेस्ट जंक्शन (Quest Junction) इंद्रानगर, मिल्लेन्निअल वर्क्स (Millennial Worx), लखनऊ बिजनेस सेंटर (Lucknow Business Center) रायबरेली रोड़ आदि सह-कार्य‌ क्षेत्र फ्रीलांसरों और बिजनेस स्टार्टअप को लुभा रहे हैं।

अभी तक केवल बिजनेस स्टार्टअप ने ही इन क्षेत्रों में रूची दिखाई थी लेकिन आने वाले वर्षों में बड़े उद्यम भी इसका उपयोग करते नजर आएंगे। एमेजोंन (Amazon) और स्टारबक्स (Starbucks) जैसे कुछ बड़े नाम इस प्रवृत्ति का नेतृत्व कर रहे हैं। इनका मानना है कि पारंपरिक कार्यालय के बाहर युवा, ऊर्जावान और समान विचारधारा वाले लोगों के साथ कार्य करने से नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। पारंपरिक उद्योग भी सह-कार्य स्थानों के तरफ आकर्षित हो रहे हैं जिससे परंपरागत क्षेत्र जैसे कि बैंकिंग, बीमा, विनिर्माण इत्यादि इन सह-कार्य क्षेत्रों की वृद्धि को बढ़ावा देंगे। यह विकल्प नवीनतम सुविधाएं जैसे कि फास्ट वाईफाई (Fast WiFi), कॉन्फ्रेंस रूम (Conference Room), स्नैक बार (Snack Bar), गेमिंग ज़ोन (Gaming Zone), आदि भी उपलब्ध करवा रहा है।पेंट्री (Pantry), मीटिंग रूम (Meeting Room), इंटरनेट (Internet), प्रिंटिंग (Printing), तकनीकी सहायता जैसी साझा सुविधाएं भी इनके पैकेज (Package) का हिस्सा हैं। इन सब कारणों से भविष्य में सहकार्य-स्थानों के बड़े पैमाने पर विस्तारित होने की संभावना बहुत अधिक दिखाई दे रही है।

संदर्भ:
1. https://en.wikipedia.org/wiki/Coworking
2. https://bit.ly/2VJdnFM
3. https://yourstory.com/2019/01/co-working-future-trends-watch-india-year
4. https://bit.ly/2JWKRhu
5. https://bit.ly/2Fjy1WS
6. https://www.coworker.com/india/lucknow



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