कैसे रखे गए भारत एवं सम्पूर्ण विश्व में विभिन्न स्थानों के नाम?

लखनऊ

 10-05-2019 12:00 PM
विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

विश्वभर में नामकरण प्रणाली का एक विशेष महत्‍व है, क्यूंकि इसके द्वारा केवल पौधों और जीव जंतुओं को ही नहीं बल्कि पूरे विश्व की प्रत्येक वस्तु को भी नाम मिला है। चाहे वह भौतिक वस्‍तु हो या रासायनिक वस्‍तु हो। ठीक इसी तरह से आज विश्व का प्रत्येक क्षेत्र, क़स्बा, नगर आदि अपने विशेष नाम से प्रसिद्ध हैं। ये नाम इन्हें अपनी किसी विशेषता के आधार पर दिये गए हैं। नामकरण से जुड़े वैज्ञानिकों ने इन स्थानों का नाम वहाँ की विशेषता, गुण, या किसी व्यक्ति विशेष के नाम पर दिया है। इन स्थानों के नाम इनके इतिहास से भी सम्बंधित हो सकते हैं। देशों, नगरों, कस्बों के नामों से जुड़े इतिहास को जानना बहुत ही रूचिकर है। स्थानों के नाम, उनके मूल, और उनके अर्थों का अध्ययन टोपोनिमी (Toponymy) कहलाता है। स्थानों को नाम देने में भौगोलिक नामकरण प्रणाली और पारंपरिक नामकरण प्रणाली की महत्वपूर्ण भूमिका है।

भौगोलिक नामकरण प्रणाली
विश्व में भौगोलिक संदर्भ के आधार पर भी क्षेत्रों को नाम दिया गया है। किसी तरह की उलझन को रोकने के लिए नामकरण में सटीकता और स्थिरता की आवश्यकता होती है। भौगोलिक रूप से पहचाने जाने वाले नामों को स्थापित करने के लिए टोपोनिमिस्ट्स (Toponimists) संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञ समूह के सिद्धांतों और प्रक्रियाओं का उचित उपयोग करते हैं। किसी स्थान के नामकरण के लिये विशिष्ट भाषा, उच्चारण, और उत्पत्ति का प्रयोग किया जाता है।
पारंपरिक नामकरण प्रणाली
हर स्थान की नामकरण प्रणाली दूसरे से भिन्न होती है। स्थानों के नाम अक्सर विशेष लोगों, प्रशासनिक गतिविधियों, ऐतिहासिक घटनाओं या भौगोलिक विशेषताओं का उल्लेख करते हैं। अमेरिका जैसे कुछ देशों में, कुछ विशिष्ट विभाग या प्राधिकरण महत्वपूर्ण स्थानों के नामकरण के लिए उत्तरदायी हैं। यहाँ किसी भी जगह को नाम देने से पूर्व स्थानीय लोगों के साथ बातचीत जैसी प्रणालियाँ भी हैं। अमेरिका में जगह के नाम आसानी से अपनी उत्पत्ति के लिए जाने जाते हैं क्योंकि अधिकांश स्थानों का नाम उनके संस्थापकों या राजनेताओं के नाम पर रखा गया है, जैसे कुछ स्थानों वाशिंगटन डीसी (जॉर्ज वाशिंगटन), क्लीवलैंड (जनरल मूज़ेज़ क्लीवलैंड), डेनवर (जेम्स डब्ल्यू डेनवर) आदि का नाम यहां के मुख्य लोगों के नाम पर रखा गया है। इंग्लैंड में अधिकांश स्थानों के नाम उन नदियों के नाम पर रखे गए हैं, जिन पर उनका निर्माण हुआ था। इनमें से कुछ शहरों ने नदियों के नाम बदलने के साथ-साथ शहरों के नाम भी बदल दिये। उदारहण के लिए केम्ब्रिज को शुरू में ग्रोंटाब्रिक (Grontabricc) (ग्रांता नदी पर एक पुल होने के कारण) नाम दिया गया था, लेकिन नदी का नाम बदलकर कैम होने पर इसका वर्तमान नाम केम्ब्रिज रख दिया गया।

सामान्यतः वर्तमान में स्थैतिक प्रक्रियाओं (Toponymic processes) के आधार पर स्थानों को नाम दिया जाता है, जिसमें स्थानों के पूर्व नामों का संक्षिप्तिकरण, समिल्लन और पूर्व नाम से प्रतिस्थापन किया जाता है। स्थान के नामों को अक्सर उनके अर्थों की व्याख्या करने के लिए विशेषज्ञों की आवश्यकता होती है। स्थैतिक प्रक्रियाओं के लिये मुख्य समस्याएं निम्न्लिखित हैं:
• भाषा
• तत्व का क्रम
• अनुवाद
• झूठे सादृश्य
• अज्ञात कारण
• तत्वों के बीच विभ्रान्ति
• एकाधिक अर्थ

भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश में हजारों गाँवों, कस्बों, और शहरों के नामों की उत्पत्ति को मुख्य रूप से 3 प्रमुख अवधियों में बांटा जा सकता है –
औपनिवेशिक युग/ब्रिटिश राज्य
यह काल 1498 में कालीकट में पुर्तगाली खोजकर्ता, वास्को डी गामा के आगमन के साथ शुरू हुआ। कोचीन और गोवा को कुछ वर्षों बाद व्यापार का प्रमुख केंद्र बनाया गया। प्राचीन व्यापारियों ने कोचीन (Cochin) को कोसिम (Cocym) या कोच्चि (Kochi) के रूप में मलयालम शब्द 'कोचु अज़ी' (kochu azhi) से संदर्भित किया था, जिसका अर्थ है छोटी खाड़ी। गोवा को पहले गोमंत (Gomanta) या गोवराष्ट्र (Govarashtra) के रूप में जाना जाता था, जिसका अर्थ है 'चरवाहों का देश'। इसी प्रकार श्रीलंका को भी कई नामों से जाना जाता था, लेकिन पुर्तगाली इसे सिलाओ (Ceilao) कहते थे, जिसे बाद में अंग्रेजों ने सीलोन (Ceylon) में बदल दिया। इसी प्रकार शिमला का नाम हिन्दू देवी श्यामला देवी के नाम पर रखा गया।

इस्लामिक काल:
भारत में यूरोपीय लोगों के आने से पहले वर्ष 1200 से 1700 की अवधि में इस्लामी शासकों (मुग़लों, लोदियों, सैयदों, तुगलकों, खिलजियों) का वर्चस्व था। इस काल में जो नगर निर्मित या परिवर्तित हुए थे, वे उनके नाम से फारसी, अरबी और उर्दू भाषा के शब्दों को दर्शाते थे। जैसे आबाद (फारसी शब्द) से भारत के कई शहरों के नाम रखे गये थे। जैसे तुगलकाबाद, फिरोजाबाद, शाहजहानाबाद, फैजाबाद, हैदराबाद, दौलताबाद, औरंगाबाद, इलाहाबाद, अहमदाबाद, मुरादाबाद, गुलशनाबाद आदि। इसी प्रकार कई उर्दू, अरबी, फ़ारसी शब्दों जैसे फतेह, हिसार, किला, शहर, बाग, गंज से फतेहपुर, हिसार, किला राय पिथोरा, बुलंदशहर, करोल बाग, दरियागंज जैसे नाम शहरों और कस्बों को दिये गये थे।

मध्यकालीन और प्राचीन भारत
भारत में वर्ष 1200 से पहले तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम के अलावा संस्कृत और इससे रूपांतरित भाषाएं (प्राकृत, पाली, और अपभ्रंश) बोली जाती थी तथा इन शब्दों का प्रयोग शहरों या कस्बों को नाम देने के लिये किया जाता था। प्राचीन महाकाव्यों महाभारत और रामायण का कस्बों और गांवों के नामों पर एक चिरस्थायी प्रभाव था। भारत के 3,626 गाँवों के नाम भगवान राम, 3,309 के नाम भगवान कृष्ण, 367 के नाम हनुमान, 160 के नाम लक्ष्मण, 75 के नाम सीता इत्‍यादि के नाम पर रखे गये हैं। महाभारत से संबंधित नगर हस्तिनापुर का नाम राजा हस्तिन के नाम पर पड़ा, जो कौरवों और पांडवों के पूर्वज थे। पांडवों के नाम पर पांडुप्रस्थ या पानप्रस्थ (पानीपत), बागप्रस्थ या व्याघप्रस्थ (बागपत), तिलप्रस्थ (तिलपत), सोनप्रस्थ या स्वर्णप्रस्थ (सोनीपत) आदि नाम रखे गये।

भारत में स्थानों का नामकरण
भारत में जगहों के नाम आमतौर पर भारतीय भाषाओं के साथ-साथ पुर्तगाली, डच, अंग्रेजी और अरबी भाषा में भी हैं। भारत में अधिकांश जगहों के नाम प्रमुख भौगोलिक विशेषताओं, जैसे नदियों और झीलों के नाम पर और राजाओं या पौराणिक पात्रों के नाम पर रखे गये हैं। इस्लामी और ईसाई धर्म का प्रभाव भी स्थानों के नामकरण में देखा जाता है। कुछ नामों को आधिकारिक तौर पर देशी वर्तनी को प्रतिबिंबित करने के लिए बदल दिया गया है। यहाँ कई जगहों के नाम अंग्रेजी भाषा से भी रखे गये हैं। उदाहरण: वाशरमैनपेट, जॉर्ज टाउन आदि
। कुछ नामों में विभिन्न भाषाओं की भिन्नता है, जैसे ओर/ ओरु (Oor / Ooru) जिसे तमिल और मलयालम में ओर (Oor) के रूप में भी जाना जाता है, जबकि इसे तेलुगु और कन्नड़ में ओरु (Ooru) कहा जाता है।

कई राज्यों में किसी विशेष प्रत्यय को जोड़कर स्थानों को नाम दिया गया है:

भारत के कुछ शहरों को ऐतिहासिक कारण के आधार पर निम्नलिखित प्रकार से नाम दिए गए हैं:
• मुंबई: मुंबई का नाम मुंबा या महा-अंबा से लिया गया है, जो मूल समुदायों की संरक्षक देवी मुंबादेवी का नाम है, जिसका अर्थ मराठी में ‘मां’ होता है।
• हैदराबाद: हैदराबाद नाम का अर्थ है "हैदर का शहर" या "शेर का शहर"। यह हैदर (शेर) और आबाद (शहर) से लिया गया है। खालिफ अली इब्न अबी तालिब को सम्मानित करने के लिए यह नाम दिया गया था, जिन्हें युद्ध में अपने शेर जैसे साहस के कारण जाना जाता था।
• कोलकाता: कोलकाता का नाम बंगाली शब्द कोलिकाटा से लिया गया है, जो 'कालीक्षेत्र' अर्थात देवी काली की भूमि से संदर्भित है।
• वड़ोदरा: वड़ोदरा या वड़पतरा संस्कृत शब्द वड़ोदर से लिया गया है, जिसका अर्थ है "बरगद के पेड़ के बीच में"।
• श्रीनगर: श्रीनगर का नाम 2 संस्कृत शब्दों से लिया गया है- श्री, (महिमा या समृद्धि या माँ लक्ष्मी का एक नाम) और नगर (शहर)। इस प्रकार, श्रीनगर नाम का अर्थ है लक्ष्मी का शहर।
• चंडीगढ़: चंडीगढ़, देवी पार्वती के चंडी अवतार और गढ़ (किला) से लिया गया है।
• मैसूर: मैसूर का नाम महिशुरु से लिया गया है। संस्कृत में महिषा का अर्थ है भैंस। यह नाम पौराणिक राक्षस महिषासुर को संदर्भित करता है।

भाषा के आधार पर प्रत्ययों को जोड़कर स्थानों को नाम दिये गये हैं, जिसके कुछ उदाहरण निम्नलिखित हैं:

संदर्भ:
1. https://www.quora.com/How-did-towns-and-cities-in-India-get-their-names
2. https://www.worldatlas.com/articles/how-do-places-get-their-names.html
3. https://en.wikipedia.org/wiki/Place_name_origins#Types_of_place_name
4. https://en.wikipedia.org/wiki/Place_names_in_India
5. http://www.punditcafe.com/history/meaning-of-indian-city-names-origin-history-of-india-cities/
6. https://www.irfca.org/docs/place-names.html



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