इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IOT) तकनीक से बदलती रोजमर्रा की जिंदगी

लखनऊ

 16-01-2019 03:00 PM
संचार एवं संचार यन्त्र

इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स (Internet of Things (IOT)) तकनीक का ज़िक्र आपने काफी जगहों में सुना होगा, परंतु क्या आपको पता है इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स आखिर कहते किसे है और ये किस तरह से कार्य करती है? दरअसल इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स एक कंप्यूटिंग अवधारणा है जो रोजमर्रा की भौतिक वस्तुओं के इंटरनेट से जुड़े होने और अन्य उपकरणों को खुद को पहचानने में सक्षम होने के विचार का वर्णन करती है। अर्थात इसके तहत इंटरनेट से जुड़े खुद की सोच-समझ रखने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरण इंटरनेट के माध्यम से काम कर सकते हैं। इस शब्द को संचार की विधि के रूप में (Radio-frequency identification (RFID)) के साथ बारीकी से पहचाना जाता है, हालांकि इसमें अन्य सेंसर तकनीकों, वायरलेस तकनीकों या क्यूआर कोड भी शामिल हो सकते हैं।

इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स की परिभाषा कई तकनीकों जैसे कि वास्तविक समय विश्लेषिकी, मशीन लर्निंग (Machine Learning), कमोडिटी सेंसर (Commodity Sensor), और एम्बेडेड सिस्टम (embedded System), वायरलेस सेंसर नेटवर्क (wireless sensor network) आदि के अभिसरण के कारण विकसित हुई है। स्मार्ट उपकरणों के एक नेटवर्क की अवधारणा पर 1982 की शुरुआत में चर्चा की गई थी, इसमें कार्नेगी मेलन विश्वविद्यालय में एक संशोधित कोक वेंडिंग मशीन (Coke Vending Machine) को पेश किया गया था, जो इंटरनेट से जुड़ा पहला उपकरण बन गया था, ये मशीन अपनी वस्तुसूची की रिपोर्ट देने में सक्षम थी और इसमें डाले गये नये पेय पदार्थ ठंडे थे। इस क्षेत्र में उस समय तेजी आई जब बिल जॉय ने 1999 में दावोस की विश्व आर्थिक मंच में अपने "सिक्स वेब" (Six Webs) फ्रेमवर्क के एक भाग के रूप में डिवाइस टू डिवाइस (डी 2 डी) संचार की कल्पना को प्रस्तुत किया। इसके बाद इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स शब्द को केविन एश्टन द्वारा पहली बार इस्तेमाल किया गया था।

इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स के जरिए कई प्रकार के प्रौद्योगिकियों और उपकरणों को एक साथ जोड़ा जा सकता है। यह तकनीक नेटवर्किंग के विकास की बड़ी सफलता है, इस तकनीक का उपयोग सभी गैजेट्स और इलेक्ट्रोनिक उपकरणों को इंटरनेट के माध्यम से आपस में जोड़ने के लिये किया जाता है। इस तकनीक की मदद से जोड़े गये सभी स्मार्ट डिवाइस (smart device) एक दूसरे को डाटा भेजते तथा प्राप्त करते है और एक दूसरे को भेजे गये डाटा के आधार पर कार्य करते हैं। यह तकनीक ने आज के समय में काफी सफल और महत्वपूर्ण होती जा रही है। आने वाले समय में यह तकनीक लोगों की दैनिक जिंदगी को बेहद आसान बना देगी। जरा सोचिए यदि आपके घर पहुंचने से पहले आपके कमरे का एसी (AC) ऑन हो जाये तो या आपकी गाड़ी आपको सेंसर के माध्यम से किसी ऐसे मार्ग में बढ़ने से रोक से या चेतावनी दे जहां चक्रवात या कोई और आपदा आने की आशंका हो या आपका रेफ्रिजरेटर (refrigerator) आपको खत्म हो गयी किराने के सामान के बारे में संदेश भेजे तो, अब इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स के जरिए ऐसा किया जा सकता है। इंटरनेट ऑफ थिंग्स की मदद से आप सिक्योरिटी, संगीत, ऑटोमोबाइल (automobile), रसोई सभी यंत्र को एक-साथ जोड़ कर के कई काम कर सकते हैं।

2020 तक कितना हो जाएगा IOT यंत्रों का विस्तार?

गार्टनर की रिपोर्ट के अनुसार, 2020 तक 2000 करोड़ से अधिक इंटरनेट से जुड़ी यंत्र दुनिया भर में लग चुकी होंगी। वह एक बड़ी संख्या है और इसकी उपस्थिति हमारी दुनिया को स्थायी रूप से बदल देगी। इस संबंध में एचपी ने एक छोटा सा सर्वेक्षण किया, जिसमें उन्होंने इंटरनेट से जुड़े उपकरणों का अनुमान लगाया और परिणाम आश्चर्यजनक हैं:

इंटरनेट ऑफ थिंग्स कैसे आने वाले भविष्य में हमारे जीवन में बदलाव लाएगा :

1. स्मार्ट हाइवे (Smart Highways): इस हाइवे की खास बात यह है कि ट्रैफिक जाम या किसी सड़क दुर्घटना जैसी घटना हो जाने पर मार्ग की स्थिति ड्राइवर्स को सूचित हो जाएगी। स्मार्ट हाइवे में एक एकीकृत प्लेटफ़ॉर्म होगा जो ट्रैफ़िक सिग्नल (traffic signal), ट्रैफ़िक सेंसर (traffic sensor), वाहन गति और बोर्ड जीपीएस से डेटा को एकीकृत करेगा। ये लगातार ट्रैफिक पैटर्न, गति सीमा और प्रतिकूलताओं के बारे में ड्राइवर्स को अद्यतन (update) करता है।

2. स्वायत्त गाड़ियां: ऑटो पार्क (auto park) सुविधा वाली गाड़ियां पहले ही परिक्षण की अवस्था में हैं। दुनिया भर के कई शहरों ने चालक-रहित गाड़ी के परीक्षण के लिए हरी झंडी दे दी है। ये गाड़ियां इंटेलिजेंट सेंसर (intelligent sensor) से लैस होंगी, जिनमें वाहन डेटाबेस से वर्षों के डेटा को उपलब्ध कराया जायेगा और ये गाड़ियां ड्राइविंग अनुभव को जोखिम मुक्त और सुरक्षित बनाने के लिए लगातार खुद को अद्यतन करती रहेंगी।

3. रोगी की निगरानी: अस्पतालों और वृद्धाश्रमों में बुजुर्ग रोगियों की निगरानी इंटरनेट ऑफ थिंग्स का एक महत्वपूर्ण अनुप्रयोग है। इसके अंतर्गत रोगी की बेहतर निगरानी सुनिश्चित करने के लिए सभी आंकड़ों पर नजर रखी जा सकती है।

4. स्मार्ट होम्स (Smart Homes): इंटरनेट ऑफ थिंग्स उपकरणों से भरे एक पूरे घर को स्वचालित कर सकता है। घर के उपकरण इंटरनेट से जुड़े होते है और ये सेंसर की मदद से नियंत्रित किये जाते है, भले ही आप अपने घर से मीलों दूर हों।

5. स्मार्ट सिटीज (Smart Cities): इंटरनेट ऑफ थिंग्स से लोगों की रोजमर्रा में आने वाले परेशानियों को बहुत आसानी से हल किया जा सकता है। इससे अपराध, प्रदूषण, ट्रैफिक (traffic) की समस्या आदि से आसानी से निपटा जा सकता है।

6. पहनने वाले यंत्र: वर्तमान में पहनने योग्य यंत्र, सेंसर और सॉफ्टवेयर्स के साथ स्थापित किए जाते हैं जो उपयोगकर्ताओं के बारे में डेटा और जानकारी एकत्र करते हैं। उदाहरण के लिये घड़ी अब समय बताने तक ही सीमित नहीं रही है। आज बाजार में ऐसी कई घड़ी उपलब्ध हैं जिनसे अब सन्देश भेजना, फोन कॉल्स (phone call) और कई काम किये जा सकते हैं।

संदर्भ:

1. https://bit.ly/29C9HxU
2. https://bit.ly/2sueqLk
3. https://bit.ly/2DcwSAz
4. https://bit.ly/2bJjaoF


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