अवध के नवाब की नवाबी मछलीनुमा नाव

लखनऊ

 12-10-2018 12:50 PM
उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

दुनिया भर के अधिकांश देशों में कई एतिहासिक वास्तु-कला देखने को मिलती है, जो संभवत: अपना एक अलग महत्व रखती है। इनमें से कई तो ऐसी होती हैं जिनको हमने देखा होता है, परन्तु उनके बारे में जानते नहीं हैं। ऐसी ही 19वीं शताब्दी के मध्य में फेलिस बियातो द्वारा एक मछली के आकार वाली शाही अवध नाव की तस्वीर खींची गई है।



इस नाव को संभवतः गाज़ी-उद-दीन हैदर के राज-दरबार के कलाकार रॉबर्ट होम द्वारा डिज़ाइन (Design) किया गया होगा। तस्वीर में इसके एक तरफ शटर वाली खिड़कियाँ दिखायी देती हैं, जो यात्रियों की गोपनीयता को देखते हुए बनाई गयी होंगी। कदाचित् इस विशाल, चमकदार नाव को गोमती मे चलता देख निश्चित रूप से राजाओं का भी मुँह खुला रह जाता होगा। इसकी लंबाई 37 फीट और चौड़ाई 2 फीट थी। होम ने हंस के आकार वाली नाव भी डिज़ाइन की, और दोनों को एक साथ 1818 में समुद्र में उतारा गया। मिल्ड्रेड आर्चर नामक एक विद्वान ने लिखा है कि, "कलाकारों का झुकाव ज्यादातर चांदी की गाड़ियां, मोर और हंस, मछली या मगरमच्छ के आकार वाली नौकाओं की तरफ था।"

सिर्फ नावों में ही नहीं मछली का स्वारूप अवध के विभिन्न क्षेत्रों में भी दिखाई देता है। सफदर जंग द्वारा गोमती के किनारे एक आधुनिक किला, मछली भवन, बनवाया गया था। इसमें 52 मछलियों की नक्काशी की गयी है। वहीं दूसरी ओर अवध के राज्य-चिह्न में भी दो मछलियाँ दिखाई देती हैं। तथा आज तक उत्तर प्रदेश सरकार के चिह्न में दो मछलियों का प्रयोग किया जाता है। साथ ही आज भी लखनऊ में कई पुरानी इमारतों पर ये दो मछलियाँ देखी जा सकती हैं (अधिक जानकारी के लिए क्लिक करें- http://lucknow.prarang.in/1805091280)। अवध और इन मछलियों का प्राचीन सम्बन्ध आप इस लेख में पढ़ सकते हैं- http://lucknow.prarang.in/1805191323



इस प्रकार अवध में जलीय और वन्य जीवों के स्वरूप को अपना प्रतीक मान कर मुगलों द्वारा इनका कई जगहों में उपयोग किया गया। साथ ही रॉबर्ट होम द्वारा भी मछली के स्वारूप को अपनी अन्य कई वास्तुकला में प्रयोग किया गया था।

संदर्भ:
1.https://commons.wikimedia.org/wiki/File:Chattar_Manzil.jpg
2.http://aestheteslament.blogspot.com/2011/09/home-away-from-home.html?m=1
3.http://www.milligazette.com/Archives/2004/01-15Aug04-Print-Edition/011508200496.htm
4.http://www.hubert-herald.nl/BhaAwadh.htm



RECENT POST

  • मधुमक्खी पालने वाले कैसे अमीर हो रहे हैं और हमारी नन्ही दोस्त मधुमक्खी किस संकट में हैं?
    पंछीयाँतितलियाँ व कीड़े

     13-05-2021 05:24 PM


  • अपनी नैसर्गिक खूबसूरती के साथ भयावह नरसंहार का साक्ष्य सिकंदर बाग
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     12-05-2021 09:29 AM


  • ग्रॉसरी उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री में सहायक हुई हैं,ई-कॉमर्स कंपनियां और कोरोना महामारी
    संचार एवं संचार यन्त्र

     10-05-2021 09:45 PM


  • शहतूत- साधारण किंतु अत्यंत लाभकारी फल
    पेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें बागवानी के पौधे (बागान)साग-सब्जियाँ

     10-05-2021 08:55 AM


  • आनंद, प्रेम और सफलता का खजाना है, माँ
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     09-05-2021 12:23 PM


  • मानव सहायता श्रमिक (Humanitarian Aid Workers)कोरोना काल के देवदूत हैं।
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     08-05-2021 09:05 AM


  • नोबल पुरस्कार विजेता रबीन्द्रनाथ टैगोर का संगीत प्रेम तथा लखनऊ शहर से विशेष लगाव।
    ध्वनि 1- स्पन्दन से ध्वनिध्वनि 2- भाषायें विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     07-05-2021 10:00 AM


  • नृत्य- एक पारंपरिक और धार्मिक अभ्यास
    ध्वनि 1- स्पन्दन से ध्वनिद्रिश्य 2- अभिनय कला द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     06-05-2021 09:25 AM


  • मछलीपालन का इतिहास: क्या मछलीघर में उपयोग होने वाली दवा कोविड-19 से संक्रमित लोगों के उपचार
    पर्वत, चोटी व पठारनदियाँसमुद्र

     05-05-2021 09:18 AM


  • ग्रामीण बेरोज़गारी के अँधेरे का रोशन चिराग बन सकता है मनरेगा (MGNREGA)
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     04-05-2021 10:15 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id