कुछ ऐसे होते हैं चिकनकारी के टांके

लखनऊ

 12-08-2018 10:55 AM
स्पर्शः रचना व कपड़े

भारत के विभिन्न क्षेत्रों में जाति, भूगोल, जलवायु और सांस्कृतिक परंपराओं के आधार पर वस्त्रों की भी काफ़ी भिन्नता है। यहाँ के वस्त्रों में भारतीय कढ़ाई, प्रिंट (Print), हस्तशिल्प, सजावटी, वस्त्र पहनने की शैलियों की विस्तृत विविधता शामिल है। भारत के पारंपरिक कपड़ों मे पश्चिमी शैलियों का मिश्रण भी हमें देखने को मिलता है। भारत में भारतीय कढ़ाई सबसे स्थायी कलात्मक परंपराओं में से एक है। यह भी क्षेत्र और वस्त्रों की शैली में भिन्न होती हैं। भारतीय कढ़ाई की बात हो रही हो और लखनऊ की चिकनकारी कढ़ाई का ज़िक्र ना हो, ऐसा संभव नहीं है।

उत्कृष्ट और जटिल चिकनकारी कार्य के लिए लखनऊ भारत का मुख्य केंद्र है। ऐसा माना जाता है कि मुगल सम्राट जहांगीर की पत्नी नूर जहां द्वारा इसे भारत में पेश किया गया और मुगल साम्राज्य के दौरान ही इसने लोकप्रियता हासिल की। इसमें मलमल, रेशम, शिफॉन, नेट इत्यादि जैसे विभिन्न प्रकार के कपड़ों में हाथ से एक नाज़ुक और कलात्मक रूप से कढा़ई की जाती है।

आम तौर पर एक पूरे पैटर्न (Pattern) में विभिन्न लखनवी चिकनकारी कढ़ाई का संयोजन होता है। मूल रूप से इसमें 35 प्रकार की कढ़ाई होती हैं, और 6 से 8 प्रकार की चिकनकारी कढ़ाई 90% महिलाओं द्वारा होती है। और वहीं दूसरी ओर लगभग 35 प्रकार की पूरी श्रृंखला केवल कुछ महिलाओं द्वारा ही की जाती है, जिन्हें 'मास्टर कलाकार या कारीगर' के रूप में मान्यता प्राप्त है।

चिकनकारी में कढ़ाई के टांकों के प्रकार कुछ इस तरह हैं –
टेपचि, राहत, बनारसी, फंदा, जाली, तुर्पाई, दर्ज़दारी, पेचानी, बिजली, घसपट्टी, हथकड़ी, बंजकली, साज़ी, कपकपी, मदराज़ी, ताजमहल, ज़ंजीर, कंगन, धनिया-पट्टी, रोज़न, मेहरकी, चनापट्टी, बालदा, जोरा, कील कंगन, बुलबुल आदि।

मुगलों और नवाबों की अवधि में इसके सुनहरे सालों के बाद, ब्रिटिश शासन के दौरान इसमें बड़ी गिरावट देखी गई। उसके बाद औद्योगिक युग के दौरान चिकन ने पहले के समान लोकप्रियता के साथ फिर से उभरना शुरू कर दिया और साथ ही इसे व्यावसायीकरण में भी ज्यादा समय नहीं लगा। बॉलीवुड फिल्म जगत में और साथ ही छोटे डिजाइन (Design) उद्यमों ने राष्ट्रीय स्तर पर चिकनकारी कार्य के सम्मान और प्रशंसा की वापसी में अपना बड़ा योगदान दिया। इस प्रकार, निस्संदेह, लखनऊ चिकन की विविधता में आज पहले की तुलना से और भी अधिक संपन्न है। आज यह सामान्य शहरी जनता, उच्च वर्गों, और बॉलीवुड और हॉलीवुड की हस्तियों में समान रूप से प्रचलित है।

संदर्भ :
1. http://sonamsrivastava.blogspot.com/2011/04/chikankari-not-just-embroidery.html/
2. http://chikankaari.com/the-history-behind-chikankari-and-types-of-stitches/
3. http://blog.myne.in/post/41453379850/types-of-stitches-in-chikankari
4. https://www.utsavpedia.com/motifs-embroideries/murri-and-phanda-stitch/



RECENT POST

  • मानव सभ्यता के विकास का महत्वपूर्ण काल है, नवपाषाण युग
    ठहरावः 2000 ईसापूर्व से 600 ईसापूर्व तक

     01-12-2020 10:22 AM


  • खट्टे-मीठे विशिष्ट स्वाद के कारण पूरे विश्व भर में लोकप्रिय है, संतरा
    साग-सब्जियाँ

     30-11-2020 09:24 AM


  • सोने-कांच की तस्वीरों में आज भी जीवित है, कुछ रोमन लोगों के चेहरे
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     29-11-2020 07:21 PM


  • कोरोना महामारी बनाम घरेलू किचन गार्डन
    पेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें

     28-11-2020 09:06 AM


  • लखनऊ की परिष्कृत और उत्कृष्ट संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है, इत्र निर्माण की कला
    गंध- ख़ुशबू व इत्र

     27-11-2020 08:39 AM


  • भारतीय कला पर हेलेनिस्टिक (Hellenistic) कला का प्रभाव
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     26-11-2020 09:20 AM


  • पाक-कला की एक उत्‍कृष्‍ट शैली लाइव कुकिंग
    द्रिश्य 2- अभिनय कला

     25-11-2020 10:32 AM


  • आत्मा और मानव जाति की मृत्यु, निर्णय और अंतिम नियति से सम्बंधित है, एस्केटोलॉजी
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     24-11-2020 08:40 AM


  • मानवता की सबसे बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धियों में से एक है, लेजर इंटरफेरोमीटर गुरुत्वीय-तरंग वेधशाला द्वारा किये गये अवलोकन
    सिद्धान्त I-अवधारणा माप उपकरण (कागज/घड़ी)

     22-11-2020 10:34 AM


  • लखनऊ की अत्यंत ही महत्वपूर्ण धरोहर शाह नज़फ़ इमामबाड़ा
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     22-11-2020 11:21 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.