हर लखनऊ वासी को पढ़ने चाहिए ये 5 लेख

लखनऊ

 10-08-2018 02:00 PM
विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

समय कैसे बीतता है पता ही नहीं चलता ना। प्रारंग का यह सफ़र भी कुछ ऐसा ही है जो अपने पाठकों के प्रोत्साहन के साथ चलता जा रहा है और दिन प्रतिदिन और भी मनोरंजक होता जा रहा है। हर दिन हमारे इस प्रारंग परिवार में कुछ नए सदस्य जुड़ते जा रहे हैं। तो आज हम कुछ समय निकालेंगे 2018 के अब तक के सफ़र की समीक्षा करने में।

आज की तारीख है 10 अगस्त 2018 तथा आज इस वर्ष का 222वां दिन है। इन 222 दिनों में प्रारंग अपने परिवार के लखनऊवासियों तक 216 लेख पहुंचा चुका है तथा यह लेख 217वां लेख होगा। यदि ध्यान दें तो लगभग हर दिन प्रारंग ने लखनऊ को समर्पित एक लेख आप तक पहुँचाया है। प्रारंग के अनूठे वर्गीकरण में यदि इन लेखों को देखा जाए तो संस्कृति से जुड़े 178 लेख तथा प्रकृति से जुड़े 38 लेख अब तक इस वर्ष में प्रस्तुत किये गए हैं। और यदि संस्कृति और प्रकृति के भीतर वर्गीकरण की बात करें तो लेखों का वितरण कुछ इस प्रकार है:

प्रकृति:
• समयसीमा- 20
• मानव व उसकी इन्द्रियाँ- 84
• मानव व उसके आविष्कार- 74

संस्कृति:
• भूगोल- 8
• जीव-जंतु- 15
• वनस्पति- 15

इन लेखों को प्रारंग के लखनऊ पोर्टल (http://lucknow.prarang.in/), फेसबुक (https://www.facebook.com/prarang.in/), ट्विटर (https://twitter.com/prarang_in?lang=en) तथा प्रारंग की एंड्राइड मोबाइल एप्लीकेशन (https://play.google.com/store/apps/details?id=com.riversanskiriti.prarang&hl=en_IN) द्वारा आप तक पहुँचाया गया। इनमें से लखनऊवासियों की सबसे अधिक प्रतिक्रिया फेसबुक पर देखने को मिली।

यदि बात करें फेसबुक लाइक्स (Facebook Likes) की तो वर्ष 2018 में लखनऊ के लेखों को करीब 5000 बार लाइक किया गया तथा उनपर कमेंट (Comment) के रूप में पाठकों द्वारा 46 बार टिप्पणी की गयी। आज प्रारंग के साथ फेसबुक पर करीब 43,000+ पाठक जुड़े हुए हैं जिनमें से 10,000+ पाठक लखनऊ से हैं। साथ ही प्रारंग की एंड्राइड मोबाइल एप्लीकेशन के 1000 से भी अधिक डाउनलोड (Download) हो चुके हैं जिनमें से लखनऊ से करीब 300 डाउनलोड हैं।

प्रारंग द्वारा प्रकाशित किये गए प्रस्तुत 5 लेख लखनऊवासियों में सबसे अधिक लोकप्रिय रहे। प्रत्येक लेख के ऊपर क्लिक कर आप उसे पढ़ सकते हैं:

1. कार्यस्थल तक पहुँचने का दैनिक संघर्ष
2. वीडियो गेम की लत किसी नशे से नहीं है कम
3. लखनऊ एक विदेशी कलाकार की नज़र से
4. लखनऊ में जानवरों की लड़ाई
5. क्यों हो गयी हमारी गोमती की ऐसी दयनीय दशा?

साथ ही हम आप सभी से आग्रह करना चाहेंगे कि हर लेख पर कमेंट और लाइक के रूप में अपनी प्रतिक्रिया ज़रूर ज़ाहिर करें। अंत में प्रारंग अपने सभी लखनऊ के पाठकों को हमारे साथ बने रहने के लिए धन्यवाद कहना चाहेगा क्योंकि यह आप लोगों का निरंतर प्रोत्साहन ही है जो हमें हर दिन बेहतर से बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करता है।



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