साँप सीढ़ी का खेल बताता है सही जीवन की राह

लखनऊ

 23-05-2018 01:57 PM
हथियार व खिलौने

साँप और सीढ़ी का खेल जो आज ‘स्नेक एंड लैडर’ के नाम से प्रसिद्ध है, इस खेल का इजात भारत में हुआ था। यह खेल 13वीं सदी में संत कवी ज्ञानदेव द्वारा बनाया गया था, उस समय इस खेल का नाम मोक्षपथ था। इस खेल को बच्चों के लिए बनाया गया था ताकि वे कर्म-धर्म की सीख ले सकें। मोक्षपथ का अर्थ है मोक्ष के लिए एक पथ, हिन्दू मान्यता के अनुसार जन्म, मृत्यु और पुनर्जन्म कर्म के ऊपर आधारित है । इस खेल की मुलाकात पश्चिमी सभ्यता से 1892 में हुई और इसका नाम शूट्स एंड लैडर (Chutes and Ladders) रख दिया गया।

खेल के नियम -
इस खेल में खिलाड़ी को नीचे से शुरुआत करते हुए सबसे ऊपर पहुंचना होता है। खिलाड़ियों को रास्ते में कई मुसीबतों (साँप) से बचना होता है और अंततः जो खिलाड़ी सबसे पहले ऊपर पहुँच जाए वह जीत जाता है। इस खेल को दो से अधिक खिलाड़ी भी खेल सकते हैं, एक चौकौर गोटी (डाइस) खिलाडियों का भविष्य तय करती है। असल खेल में सीढ़ियों के ऊपर संख्या लिखी रहती थी 12, 51, 57, 76, 78। संख्या 12 आस्था को दर्शाती थी, संख्या 51 विश्वसनीयता को दर्शाती थी, संख्या 57 उदारता को दर्शाती थी , संख्या 76 ज्ञान को दर्शाती थी और संख्या 78 वैराग्य को दर्शाती थी। साँपों को संख्या 41, 44, 49, 52, 58, 62, 69, 73, 84, 92, 95 और 99 पर रखा जाता था। 41वा अंक आज्ञा के उल्लंघन को दर्शाता था, 44वा अंक अहंकार को, 49वा अंक स्थूलता को, 52वा अंक डकैती को, 58वा अंक विश्वासघात को, 62वा अंक शराबी को, 69वा अंक ऋण को, 73वा अंक हत्या को, 84वा अंक गुस्सा एवं क्रोध को, 92वा अंक भी शराबी को, 95वा अंक गर्व को और अंत में 99वा अंक चाह को दर्शाता था। अंत में जो खिलाड़ी 100वें अंक पर पहुँच जाता था उसे मोक्ष प्राप्त हो जाता था, अगर साँप द्वारा काटे गए तो खिलाड़ी को साँप की पूँछ से शुरुआत करनी होगी।

यह खेल केवल खिलाडियों के लिए महज़ खेल नहीं बल्कि जीवन की सीख भी है। यह खेल ज्ञान चौपड़ और पच्चीसी को भी अपने में संगृहीत करता है। इंग्लैंड जा कर यह खेल सांप सीढ़ी नाम से प्रसिद्द हुआ। वर्तमान काल में यह खेल अत्यंत लोकप्रिय है तथा सामान्यतया सभी इस खेल के बारे में जानते हैं। यह खेल ज्यादा बदला नहीं परन्तु इसमें जो अध्यात्म के अंकन थे उनका लोप हो गया। यह खेल व्यक्ति को एक सीख देने के अनुसार बनाया गया था तथा मोक्ष की राह को भी यह प्रदर्शित करता है। यह खेल आज चौकोर गोटी द्वारा खेला जाता है परन्तु पहले यह छोटे शंख द्वारा खेला जाता था। यह खेल जैन दर्शन के कर्म और मोक्ष को भी प्रदर्शित करता है।

1. https://timesofindia.indiatimes.com/home/sunday-toi/book-mark/Dice-Another-Day/articleshow/1746599.cms?referral=PM
2. https://www.speakingtree.in/allslides/snakes-and-ladders-a-game-or-a-lesson-in-karma
3. https://topyaps.com/snake-and-ladders-and-chutes-and-ladders
4. https://www.procaffenation.com/snakes-and-ladders-board-game/



RECENT POST

  • इंडस वैली और इसकी लैपिडरी
    सभ्यताः 10000 ईसापूर्व से 2000 ईसापूर्व

     08-07-2020 07:43 PM


  • शिकस्ता हस्तलिपि और उसका इतिहास
    ध्वनि 2- भाषायें

     07-07-2020 04:53 PM


  • लखनऊ और चिकनी बलुई मृदा के विभिन्न उपयोग
    भूमि प्रकार (खेतिहर व बंजर)

     06-07-2020 03:36 PM


  • वह दुर्लभता जो हैली का धूमकेतु है
    खनिज

     04-07-2020 07:21 PM


  • भारत के कंटीले जंगल
    जंगल

     04-07-2020 03:14 PM


  • ऐरावत अदम्य शक्ति का प्रतीक और हाथियों का देवता राजा
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     03-07-2020 11:06 AM


  • मुगल आभूषण और कपड़ों का निरूपण और इतिहास
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     01-07-2020 11:51 AM


  • लखनऊ की कई जटिल सुगंध
    गंध- ख़ुशबू व इत्र

     01-07-2020 01:17 PM


  • कितना लाभदायक साबित होगा अंतरिक्ष में खनन
    खनिज

     30-06-2020 06:50 PM


  • भारतीय आदिवासी गहनों में हैं, संस्कृति और परंपरा का सम्मोहन
    म्रिदभाण्ड से काँच व आभूषण

     29-06-2020 10:50 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.