रामपुर के छोटे मगर प्रसिद्ध शिया समुदाय का मूल

लखनऊ

 20-04-2018 12:16 PM
विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

रामपुर मध्य भारत का एक ऐसा दुर्लभ ज़िला है जहाँ पर शिया और सुन्नी मुस्लिम संप्रदाय रहते हैं। रामपुर में आज सुन्नी मुस्लिम की ज्यादा बहुमत है। जिन नावाबों ने शहर का निर्माण किया था वे शिया संप्रदाय से थे लेकिन आज रामपुर मे शिया संप्रदाय की तादाद कम है। शिया संप्रदाय का प्रसिद्ध त्यौहार नवरोज़ हाल ही में ख़त्म हुआ है , तो यह एक अच्छा मौका है इस विरासत पर एक नज़र डालने का।

आज भी पठान संप्रदाय के लोग यह मानते हैं कि नवाब हामिद अली खान अपनी ऐयाशीयों पर पर्दा डालने के लिए शिया बन गए थे और उन्होंने शिया के तौर-तरीकों को अपना लिया था। नवरोज़ त्यौहार - नवरोज़ का अर्थ नया दिन होता है और यह त्यौहार 20 या 21 मार्च को मनाया जाता है, यह फ़ार्सीयों के नए साल के शुरुआत को दर्शाता है। ईरान, इराक, अफ़ग़ानिस्तान और तुर्की के शिया समुदाय के लोग इस त्यौहार को जोर शोर से मनाते हैं। यह त्यौहार विश्व भर के पारसी समुदाय के लोगों के द्वारा भी मनाया जाता है।

रामपुर के नवाब हामिद अली खान पहले नवाब थे जिन्होंने अपने आप को अपनी माँ से प्रभावित होकर शिया में बदल दिया था। रामपुर के किले में नवाब द्वारा एक सुन्दर इमामबाड़ा बनवाया गया, नवाब ने मुहर्रम के रिवाजों को समझा और पैगम्बर मुहम्मद के पोतों की शहादत पर दुःख ज़ाहिर किया। इस अनुपालन के अनुसार शिया संप्रदाय के लोगों के द्वारा 40 दिनों का शोक मनाया जाता है, यह शिया संप्रदाय के लोगों की आस्था को दर्शाता है। रामपुर उत्तरी भारत की एक रियासत हुआ करता था जो कि अफ़ग़ानिस्तान के रोहिल्ला पठानों द्वारा स्थापित किया गया था, यह पठान सुन्नी सम्प्रदाय से थे। नवाब की आस्था में आये इस बदलाव से पठान सरदारों और नवाब के समक्ष आतंक फ़ैल गया, लेकिन नवाब काफी ताकतवर थे और उनका समर्थन अंग्रेज़ सरकार कर रही थी।

नवाब ने नवरोज़ के त्यौहार को उत्साह के साथ इमामबाड़े में मनाया था। नए फल, अच्छा खाना और अनाज एक चांदी के कटोरे में रखे गए थे, खाने के मेज़ के बीचों-बीच 7 चांदी के बर्तन रखे गए थे। कहानियों के अनुसार नवाब अपने दरबार में शिया मौलवी और अन्य शिया गणमान्य व्यक्तियों के साथ प्रार्थना कर रहे थे, वे हज़रात अली से चैन और अमन की मांग कर रहे थे। उन्होंने सभी मेहमानों को कमरा छोड़ने को कहा और एकांत में प्रार्थना की, जब सभी मेहमान लौटे तब उन्होंने पाया कि अनाज में हाथों के निशाँ हैं मानो खुद हज़रत अली ने उन चढ़ावों को कुबूल किया हो। नवाब की बेगमों को यह छूट थी कि वे कोई भी आस्था का पालन कर सकती हैं लेकिन नवाब के दरबार द्वारा यह मांग की जा रही थी कि सभी को सख्ती से शिया में आस्था रखनी होगी, और इस कारण कुछ बेगम शिया में बदल गईं। आज रामपुर में नवरोज़ शिया सम्प्रदाय के लोगों द्वारा मनाया जाता है, और इस त्यौहार के मध्य एक पानी से भरे चांदी के कटोरे में विषुव के दौरान गुलाब रखा जाता है। लोग अपनी मनोकामनाएँ और इच्छाएँ ज़ाहिर करते हैं और त्यौहार को पूरी आस्था के साथ मानते हैं।

1. www.dailyo.in/voices/nauroz-new-year/story/1/23036.html
2. www.wikipedia.com/shia-islam-in-india
3. www.indianholiday.com/festivals/navroz



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