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भारत में कैसे प्रचलित हुई फ्रीमेसनरी समाज की सार्थकता? कौन थे इसके सदस्य?

लखनऊ

 12-02-2024 09:55 AM
सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

फ्रीमेसनरी(Freemasonry) को विश्व के सबसे प्राचीन धर्मनिरपेक्ष बिरादरी(Secular fraternal) समाजों में से एक माना जाता है। यह विश्वव्यापी संगठन मुख्य रूप से ईश्वर के पितृत्व और मनुष्य के भाईचारे के सिद्धांत पर आधारित है। आसान शब्दों में समझें तो फ्रीमेसनरी ऐसे लोगों का संगठन है, जो भाईचारे में विश्वास करते हैं और दूसरों की मदद करते हैं। इसके सदस्यों को “फ्रीमेसन(Freemasons)” के रूप में जाना जाता है। विविध देशों में, फ्रीमेसनरी के स्थानीय समूह होते है, जिन्हे “लॉज (Lodge)” के रूप में जाना जाता है। आमतौर पर, सभी फ्रीमेसन समूह में केवल पुरुष होते हैं; किन्तु, सह-शिक्षित मेसोनिक लॉज (Masonic Lodge), तथा केवल महिलाओं के लिए भी कुछ लॉज हैं। हालांकि, इन्हे “नियमित” समूहों द्वारा, वैधता नहीं दी गई हैं। ये लॉज अनाथ बच्चों के लिए विद्यालय चलाने, जैसे परोपकारी कार्य भी करते हैं।
फ्रीमेसनरी संगठनों का विकास मध्य युग के दौरान स्टोनमेसन के समूहों (गिल्ड्स–Guilds) से हुआ है। दरअसल, मेसन शब्द का अर्थ– निर्माण श्रमिक होता है, जिन्हें स्टोनमेसन (Stone Mason) भी कहा जाता है। शुरुआत में इन्हे राजमिस्त्री कहा जाता था। मध्य युग के दौरान ये गिरजाघर और ऐसी ही भव्य इमारतों का निर्माण करते थे। उस समय अधिकांश श्रमिक वर्ग दास थे, जबकि फ्रीमेसन दास नहीं थे। उनके पास पर्याप्त मात्रा में धन-संपदा एकत्र थी। वे खानाबदोश प्रवृत्ति रखते थे। फ्रीमेसन लोगों को अपने कौशल को गुप्त रखने की कला और आदत के रूप जाना जाता है। वे बेहद रहस्यमयी माने जाते थे। वे अपने ज्ञान और कौशल को बेहद गोपनीय रखते हैं। यहां तक कि, उनके पास हर विशेष कार्य को करने के लिए कोडवर्ड अर्थात गुप्त शब्द होते थे। हालांकि, 1650 के दशक से इन्होंने अपने रहस्यों को अपारंपरिक फ्रीमेसन लोगों को देना शुरू कर दिया।
राष्ट्रीय संगठित फ्रीमेसनरी की शुरुआत 1717 में इंग्लैंड(England) में ग्रैंड लॉज(Grand Lodge) की स्थापना के साथ हुई। वैसे तो, फ्रीमेसन समाज काफ़ी लंबे समय से अस्तित्व में हैं। हालांकि, सबसे लोकप्रिय सिद्धांत यह है कि, फ्रीमेसनरी मध्य युग के स्टोनमेसोनरी गिल्ड से गठित हुई है। काम करने वाले राजमिस्त्रियों के पास कुछ लॉज होते थे, जहां वे अपने व्यापार पर चर्चा करते थे। लेकिन, कैथेड्रल भवन(Cathedral buildings) के पतन के साथ, कुछ लॉज ने, अपनी घटती सदस्यता को बढ़ाने के लिए अपने सम्मानार्थ सदस्यों को स्वीकार करना शुरू कर दिया। इनमें से कुछ लॉज इस प्रकार, “विचारवान” लॉज बन गए, जिससे प्रतीकात्मक फ्रीमेसनरी को जन्म मिला। 17वीं और 18वीं शताब्दी में इन लॉजों ने प्राचीन धार्मिक आदेशों और शूरवीर भाईचारे के ढांचे को अपनाया था। फ्रीमेसनरी ब्रिटिश साम्राज्य की उन्नति के कारण विश्व में फैल गई। इसी वजह से, फ्रीमेसनरी ब्रिटिश द्वीपों और मूल रूप से साम्राज्य के अन्य देशों में सबसे लोकप्रिय बना हुआ है। 21वीं सदी की शुरुआत में फ्रीमेसनरी की विश्वव्यापी सदस्यता का अनुमान लगभग 20 लाख से लेकर 60 लाख से अधिक था।
जबकि, हमारे देश भारत में, ईस्ट इंडिया कंपनी(East India Company) के व्यापारिक समझौतों और क्षेत्रीय विस्तार के मद्देनजर मेसोनिक लॉज का उदय हुआ। वास्तव में, 1717 में इंग्लैंड के ग्रैंड लॉज के निर्माण और भारतीय उपमहाद्वीप पर पहले मेसोनिक लॉज के गठन में केवल तेरह वर्ष का अंतर है। यह पहला लॉज– फोर्ट विलियम(Fort William), वर्ष 1730 में कलकत्ता में, ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारियों द्वारा खोला गया था। क्षेत्रीय आधार पर मेसोनिक लॉज की गतिविधि की निगरानी के लिए ही ऐसे प्रांतीय ग्रैंड लॉज बनाए गए थे। वहां से और फिर जैसे ही, अंग्रेजों ने पूरे भारत में अपनी स्थिति सुरक्षित कर ली, फ्रीमेसनरी क्रमशः 1752 और 1758 में मद्रास और बॉम्बे के प्रेसीडेंसी(Presidency) में फैल गई। इसके बाद, देश में कई लॉज अस्तित्व में आए और इनके अधिकांश सदस्य व्यापारी, सैनिक और कभी-कभी गवर्नर(Governer) सहित ईस्ट इंडिया कंपनी के प्रशासक थे। जबकि, कुछ लॉज पूरी तरह से व्यापारियों से बने थे। क्योंकि, मेसोनिक सदस्यता स्पष्ट रूप से, भारत में सक्रिय व्यापारी समुदाय के भीतर बहुत आकर्षक थी।
इस कारण, हमारे देश के कुछ महानतम लोग भी फ्रीमेसन थे। प्रमुख फ्रीमेसन व्यक्तियों में, स्वामी विवेकानन्द, कांग्रेस नेता– मोतीलाल नेहरू और दादाभाई नौरोजी, विमानन मंत्री– अशोक गजपति राजू शामिल हैं। इसके अलावा, भारत के प्रथम राष्ट्रपति– राजेंद्र प्रसाद, प्रथम उपराष्ट्रपति– एस. राधाकृष्णन, सर फिरोजशाह मेहता, सी. राजगोपालाचारी, सर जमशेदजी टाटा, पटौदी के नवाब– मंसूर अली खान, महाराजा जीवाजी राव सिंधिया सहित अन्य प्रख्यात भारतीय भी फ्रीमेसन थे। आज, भारत में लगभग 550 मेसोनिक लॉज हैं, जिनमें से 450 ग्रैंड लॉज ऑफ इंडिया(Grand lodge of India) से संबद्ध हैं, और इनमें लगभग 27,000 फ्रीमेसन सदस्य हैं।

संदर्भ
http://tinyurl.com/24pndrdc
http://tinyurl.com/3852fk3d
http://tinyurl.com/3czj5ff9
http://tinyurl.com/mr47y474

चित्र संदर्भ
1. फ्रीमेसनरी समाज को दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)
2. मेसोनिक स्क्वायर कम्पासको दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)
3. खानाबदोश फ्रीमेसनरी को दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)
4. मेसोनिक लॉज को दर्शाता एक चित्रण (Needpix)
5. स्वामी विवेकानन्द को दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)



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