Post Viewership from Post Date to 06-Jan-2024
City Subscribers (FB+App) Website (Direct+Google) Email Instagram Total
2232 192 2424

***Scroll down to the bottom of the page for above post viewership metric definitions

वैश्विक चिंता के माहौल में कतर कैसे बन गया शांतिदूत

जौनपुर

 06-12-2023 10:36 AM
उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

हाल के वर्षों में अरब प्रायद्वीप के उत्तर पूर्वी तट पर स्थित इकलौते क्षेत्रीय प्रायद्वीपीय देश “कतर” ने अपनी छवि युद्ध में शांति की स्थापना कराने वाले मध्यस्थ के रूप में बनाई है। बहुत कम लोग इस बात को जानते हैं कि अपनी कूटनीतिक शक्ति के बल पर कतर ने ही दो साल पहले अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना के स्थानांतरण और तालिबान द्वारा शांतिपूर्ण शासन स्थापित कराने में केंद्रीय भूमिका निभाई थी। इसके अलावा हाल ही में कतर ने ही इजरायली सरकार और फिलिस्तीन के हमास बलों के बीच संघर्ष विराम और कैदियों की अदला-बदली पर बातचीत को संभव किया था। दुनिया अब इस जटिल मुद्दे के अधिक स्थायी समाधान के लिए भी कतर की ओर ही देख रही है। आइए इस स्थिति की जटिलताओं पर गौर करें और देखते हैं कि कतर किस तरह शांति के लिए आम सहमति बनाने का प्रयास कर रहा है। इजरायल और फिलिस्तीन के बीच व्यापक सशस्त्र संघर्ष 7 अक्टूबर, 2023 को शुरू हुआ था। स्थिति को हाथ से निकलते देख कतरी मध्यस्थों ने 9 अक्टूबर, 2023 को ही तत्काल कदम उठाया। उन्होंने इजरायली जेलों से 36 फिलिस्तीनी महिलाओं और बच्चों की रिहाई की व्यवस्था करने के उद्देश्य से चर्चा शुरू की। ऐसा इजरायली महिलाओं और बच्चों की रिहाई के बदले में किया जा रहा था, जिन्हें गाज़ा में बंदी बना लिया गया था। संयुक्त राज्य की अमेरिका के सहयोग से चल रही बातचीत में आशाजनक प्रगति दिख रही है। हालांकि अभी भी पूर्णतः स्थायी शांति स्थापित करने के लिए, कई जटिल मुद्दों पर ध्यान देने की जरूरत है।
इन मुद्दों में शामिल है:
भूमि विभाजन: सीमाओं पर भूमि का विभाजन कैसे किया जाना चाहिए, विवाद का एक प्रमुख मुद्दा बना हुआ है।
भावनात्मक प्रभाव: संघर्ष ने दोनों पक्षों में भावनाओं को भड़काया है, जिसने बातचीत को जटिल बना दिया है।
निपटान संबंधी चिंताएँ: वेस्ट बैंक (west bank) में इज़रायली बस्तियों को लेकर फ़िलिस्तीनी पक्ष की ओर से चिंताएँ बढ़ी हैं।
यरुशलम की स्थिति: यरुशलम की स्थिति भी एक संवेदनशील मुद्दा है, जिसे जल्द से जल्द हल करने की आवश्यकता है।
सुरक्षा मुद्दे: आतंकवाद, सुरक्षित सीमाएँ, उकसावे और हिंसा, शांति के लिए महत्वपूर्ण चुनौतियां पैदा करती हैं। ये मुद्दे स्थिति की जटिलता और सावधानीपूर्वक एवं विचारशील बातचीत की आवश्यकता को उजागर करते हैं। शुरुआत में, इज़राइल के नेतन्याहू प्रशासन ने गाज़ा में बंधकों के बदले फ़िलिस्तीनी कैदियों को छोड़ने से इनकार कर दिया था। हमास ने भी एक इजरायली सैनिक के बदले 1,000 से अधिक फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई जैसी बड़ी मांग की थीं। लेकिन आख़िरकार, वे प्रत्येक नागरिक बंधक के बदले में तीन फिलिस्तीनी कैदियों को मुक्त करने पर सहमत हो गए। गैस से समृद्ध देश क़तर उन चुनिंदा देशों में से एक है जो इजरायल और हमास दोनों से बात कर सकता है। 7 अक्टूबर को हमास के हमले से शुरू हुए युद्ध में वे मुख्य वार्ताकार बन गए हैं। अमेरिका और रूस दोनों ने कतर की भूमिका की प्रशंसा की है।
अमेरिकी अधिकारी और मिस्र के सुरक्षा सूत्रों के अनुसार “कतर देश मध्यस्थ के रूप में बातचीत करने के लिए सक्रिय रूप से भाग लेता है, और अपने प्रभाव का इस्तेमाल करता है।” कतर ने इजरायल और हमास के बीच बातचीत से पहले भी अफगानिस्तान में तालिबान और अमेरिका के मुद्दे को सुलझाने में इस दृष्टिकोण का इस्तेमाल किया था। दरअसल तालिबान आतंकवादियों ने अफगानिस्तान के अधिकांश हिस्से पर नियंत्रण हासिल कर लिया था और संघर्ष को समाप्त करने के प्रयास के लिए दोहा, कतर में शांति वार्ता आयोजित की गई थी। 15 अगस्त, 2021 के दिन तालिबान ने अफगानिस्तान पर फिर से नियंत्रण हासिल कर लिया। पिछले 20 वर्षों से अफगानिस्तान का नियंत्रण अमेरिका के हाथों में था। लेकिन अब अमेरिकी और अंतर्राष्ट्रीय सेनाएँ वहां से जा चुकी हैं। अफगानिस्तान में समावेशी और स्थायी शांति का समर्थन करना अभी भी यूएसआईपी अफगानिस्तान (USIP Afghanistan) कार्यक्रम का एक प्रमुख लक्ष्य है। इसका उद्देश्य अफगानों को समावेशी राजनीतिक संरचना स्थापित करने में मदद करना है। इससे चार दशकों से चले आ रहे हिंसक संघर्ष का अंत होगा, मानवाधिकारों की रक्षा होगी और बुनियादी सेवाओं तक पहुंच में सुधार होगा।
अफगानिस्तान में शांति के लिए कम से कम पांच प्रमुख मुद्दों से निपटने की आवश्यकता होगी, जिन पर पिछले दशकों के संघर्ष के दौरान भारी विवाद हुआ है:
1. शासन और राजनीति
2. अधिकार और न्याय
3. सुरक्षा चुनौतियाँ
4. तालिबान (संगठन, विचारधारा और गतिशीलता)
5. अंतर्राष्ट्रीय जुड़ाव ये कारक अक्सर अन्य संघर्ष-पश्चात और नाजुक देशों में सफलता या विफलता के कारण माने जाते हैं। शांति वार्ता में गतिरोध खत्म करने की कोशिश के लिए दोहा में बैठकें आयोजित की गईं। बयान में प्रांतीय राजधानियों और अन्य शहरों में और उनके खिलाफ हिंसा और हमलों को तत्काल रोकने के लिए कहा गया। इसके तहत दोनों पक्षों से यथाशीघ्र राजनीतिक समाधान और पूर्ण युद्ध विराम की दिशा में काम करने का भी आग्रह किया गया। दोहा वार्ता में पाकिस्तान, संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ के प्रतिभागी शामिल थे।

संदर्भ
https://tinyurl.com/yu4uaky3
https://tinyurl.com/5evk38ud
https://tinyurl.com/h5pmt84k
https://tinyurl.com/23b9e8zf

चित्र संदर्भ
1. तेहरान में ईरान के अयातुल्ला अली खामेनेई के साथ कतर के शासक शेख तमीम बिन हमद अल थानी, को दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)
2. शेख तमीम, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और नाटो महासचिव जेन्स स्टोलटेनब को दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)
3. कतर में पूर्व यूक्रेनी राष्ट्रपति पेट्रो पोरोशेंको के साथ शेख तमीम बिन हमद अल थानी को दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)
4. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ शेख तमीम को दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)
5. शेख तमीम बिन हमद अल थानी को दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)



***Definitions of the post viewership metrics on top of the page:
A. City Subscribers (FB + App) -This is the Total city-based unique subscribers from the Prarang Hindi FB page and the Prarang App who reached this specific post. Do note that any Prarang subscribers who visited this post from outside (Pin-Code range) the city OR did not login to their Facebook account during this time, are NOT included in this total.
B. Website (Google + Direct) -This is the Total viewership of readers who reached this post directly through their browsers and via Google search.
C. Total Viewership —This is the Sum of all Subscribers(FB+App), Website(Google+Direct), Email and Instagram who reached this Prarang post/page.
D. The Reach (Viewership) on the post is updated either on the 6th day from the day of posting or on the completion ( Day 31 or 32) of One Month from the day of posting. The numbers displayed are indicative of the cumulative count of each metric at the end of 5 DAYS or a FULL MONTH, from the day of Posting to respective hyper-local Prarang subscribers, in the city.

RECENT POST

  • भारत के अंडमान द्वीपसमूह पर स्थित सक्रिय ज्वालमुखी का कैसे किया जाता है अध्ययन?
    पर्वत, चोटी व पठार

     21-02-2024 09:20 AM


  • भारत की सन फार्मास्युटिकल और सिप्ला कैसे बनी दुनिया की दिग्गज फार्मा कंपनियां?
    आधुनिक राज्य: 1947 से अब तक

     20-02-2024 09:26 AM


  • लोहगढ़ व रायगढ़ किलों के निर्माता शिवाजी महाराज क्यों है, किसी देवता समान पूजनीय?
    मध्यकाल 1450 ईस्वी से 1780 ईस्वी तक

     19-02-2024 10:16 AM


  • धरती के बजाय अंतरिक्ष में खेती कर रहा है चीन, वीडियो में देखिए कैसे
    आधुनिक राज्य: 1947 से अब तक

     18-02-2024 09:24 AM


  • समय के साथ शव-परीक्षण पद्धतियों में क्या परिवर्तन आये?
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     17-02-2024 08:58 AM


  • निवेश से जुड़े जोखिमों को समझें और ऐसे एक जागरूक निवेशक बने!
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     16-02-2024 09:17 AM


  • आइए सैर करें दुनिया एवं भारत के सबसे पुराने किलों की
    मघ्यकाल के पहले : 1000 ईस्वी से 1450 ईस्वी तक

     15-02-2024 09:30 AM


  • सरस्वती पूजा के दिन पीले रंग का महत्व, साथ ही जानें चार बांस चौबीस गज का क़िस्सा
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     14-02-2024 08:18 AM


  • विवाह पूर्व यौन संबंध हो सकता है ख़तरनाक, अगर इन चीज़ो का नहीं रखा ख्याल
    शारीरिक

     13-02-2024 09:13 AM


  • भारत में बने मेसोनिक लॉज इस समाज की कौन सी विशेषताओं को उजागर करते हैं?
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     12-02-2024 09:38 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id