तजकिरात उल उलमा: जौनपुर के इस्लामी पंडितों का संस्मरण

जौनपुर

 07-02-2018 12:14 PM
ध्वनि 2- भाषायें

जौनपुर इस्लामी विद्वता का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। फ़िरोज़ शाह तुग़लक़ ने जौनपुर की स्थापना सन 1351 में की थी और सन 1394 से सन 1500 तक शार्की सुल्तानों की ये राजधानी थी। इनके कार्यकाल में जौनपुर में कला, स्थापत्य आदि के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में (खासकर इस्लामी) वृद्धि और विस्तार हुआ। कलकारों को और विद्वान व्यक्तियों को राजाश्रय मिलता था तथा शासकों के तरफ से इनाम, जागीर और वेतन-वृत्ति आदि भी मिलती थी। जौनपुर के मौलाना खैर-उद-दिन मुहम्मद ने जौनपुर में बसे तक़रीबन 28 इस्लामी पंडितों का चरित्र-वृत्त लिखा है जिसका नाम है ‘तजकिरात उल उलमा’ मतलब पंडितों का एक संस्मरण। इस किताब का अंग्रेजी अनुवाद प्रोफेसर मुहम्मद सना उल्लाह इन्होने सन 1934 में प्रसिद्ध किया है। ये फारसी में लिखी किताब 25 सितम्बर 1801 में लिखकर खत्म हुई थी तथा इसमें लेखक के साथ 28 विद्वानों का जीवन-चरित्र दर्ज है। ये सभी विद्वान् जौनपुर से थे। उस वक़्त के ज़िला-न्यायाधीश अब्राहम विल्लंड ने मौलाना जी को ये किताब लिखने के लिए प्रेरणा दी थी तथा मौलाना जी ने इस किताब को भारत के प्रधान राज्यपाल मार्की वेल्लेस्ले को समर्पित किया। इस संस्मरण को लेखक ने तीन अध्यायों में बांटा है। प्रथम अध्याय में जौनपुर के बारे में जानकारी है। दुसरे अध्याय में विद्वानों के चरित्र हैं। तीसरे में उन्होंने जौनपुर में मदरसा स्थापित करने के लिए इल्तिजा की है। उन्होंने लिखा है की जौनपुर जो हमेशा इस्लामी विद्वानों का और अरबी फारसी में सीखने वाले विद्यार्थियों का केंद्र रहा था, धीरे-धीरे उसका यह दर्जा नष्ट हो रहा था क्यूंकि यहाँ पर कोई भी शिक्षा केंद्र नहीं बचा था। इसलिए उन्होंने ज़िला-न्यायाधीश अब्राहम विल्लंड के कहने के अनुसार भारत के प्रधान राज्यपाल मार्की वेल्लेस्ले को जौनपुर में मदरसा शुरू करने के लिए और उसकी देखभाल के लिए सालाना निधि कायम करने का निवेदन किया। ये संस्मरण विविध दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। विद्वानों के संस्मरण एवं ब्रितानी शासकों के बारे में जानकारी के साथ उस वक़्त के जौनपुर के हालात, शिक्षा की अवस्था आदि के बारे में भी जानकारी है। प्रस्तुत चित्रों में पहला चित्र पश्चिमोत्तरीय और अवध संस्थानों का मानचित्र है जिसमे जौनपुर भी है तथा दूसरा चित्र प्रधान राज्यपाल मार्की वेल्लेस्ले का रेखाचित्र है। 1. तजकिरात उल उलमा ऑर अ मेमॉयर ऑफ़ द लेर्नेड मेन (1934) : मुहम्मद सना उल्लाह 2. पर्शियन लिटरेचर: अ बायो-बिबलियोग्राफिकल सर्वे, वॉल्यूम 1, पार्ट 2: सी.ए. स्टेसी https://goo.gl/SLzqUj



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