हमारे जीवन में कीड़े मकोड़ों का प्रभाव और इनकी विलुप्ति का कारण

जौनपुर

 30-06-2021 10:15 AM
तितलियाँ व कीड़े

व्यावहारिक तौर पर कोई भी व्यक्ति, प्रकर्ति में पाए जाने वाले कीड़ों का ज़िक्र क्यों करना चाहेगा? परंतु समझदार अथवा जानकार हमारे जीवन में इन बेहद नन्हे जीवों की महत्ता को बखूबी समझते हैं। हमारी धरती पर पाए जाने वाले जीवों में कीड़े अथवा कीट सबसे आम हैं। यहाँ कुल मिलाकर कीड़ों की 1.5 मिलियन अधिक ऐसी प्रजातियाँ है, जिनके नाम रखे गए हैं। साथ ही अनगिनत ऐसे कीड़े भी हैं, जिन्हे खोजा जाना और नाम देना अभी भी शेष है। कीड़े धरती पर मौजूद सभी जानवरों की कुल संख्या के तीन गुना अधिक हैं, यह धरती के हर कोने में मिल जायेंगे। इनके आकार, रंग, रूप, इतिहास और व्यवहार में अनगिनत विविधताएँ देखने को मिल जाती है, जो इनके अध्ययन को और भी रुचिकर और आकर्षक बना देती हैं। कीड़े विभिन्न जीवों-जंतुओं और पेड़-पौधों के साथ-साथ मनुष्य प्रजाति के लिए भी बेहद आवश्यक होते हैं। इनके बिना हमारे जीवन की कल्पना भी मुश्किल लगती है, आकार में बेहद छोटे दिखाई देने वाले ये कीट अथवा कीड़े, हमारे कई फूलों, फलों, सब्जियों तथा विभिन्न क़िस्म के अन्य पेड़-पोंधों के परागित करते हैं। शहद, मोम, रेशम और अन्य उपयोगी उत्पादों की कल्पना भी, इनके बिना नहीं की जा सकती। मनुष्य न जाने कितनी सेवाओं के लिए इन छुटपुट से जीवों पर निर्भर है, कीड़े खाद्य श्रंखला की बेहद अहम् कड़ी होते हैं। इनमे से अनेक सर्वाहारी (Omnivores) होते हैं, जो हमारी प्रकर्ति में मौजूद पौधों, कवक, मृत जानवरों, सड़ने वाले कार्बनिक पदार्थों समेत कई तरह के खाद्य पदार्थों को खा सकते हैं, इन्हे अपघटित करके यह पर्यावरण संरक्षण में भी अहम् भूमिका निभाते हैं।
कुछ जानवर, जैसे छोटे पक्षी, मेंढक और अन्य सरीसृप और उभयचर, लगभग पूरी तरह से एक कीट आहार पर जीवित रहते हैं, यदि इन जानवरों के खाने के लिए पर्याप्त कीड़े नहीं होंगे तो इन पर निर्भर सभी जानवर भी मर जायेंगे, जिससे एक पूरी खाद्य श्रंखला ही समाप्त हो जाएगी। यह खाद्य श्रंखला अंततः मनुष्यों को भी प्रभावित करेगी। कीड़े अथवा कीट मृत जानवरों, जानवरों के कचरे और अन्य पौधों को भी अपघटित करते हैं, जो उस मिट्टी को निषेचित करने में मदद करते हैं, जिसमें हमारी फसलें उगती हैं। इंसानों तथा अन्य जीव जंतुओं के जीवन में बेहद अहम् हिस्सेदारी के बावजूद, इनकी संख्या में ज़बरदस्त गिरावट देखी गई है। जानकारों और कई अध्ययनों ने इनके परिपेक्ष में खुलासे किए हैं, जहाँ उन्होंने बताया कि धरती पर मौजूद कीटों की सभी प्रजातियाँ, लगभग आधी से अधिक तेज़ी से घट रही हैं, और यदि परिस्थियों में कोई बदलाव न आया, तो निकट भविष्य (अगले कुछ दशकों) में कीड़े-मकोड़ों की लगभग 40% प्रतिशत से अधिक प्रजातियाँ पूरी तरह विलुप्त हो सकती हैं। इनमे कीटों की वे प्रजातियाँ भी शामिल हैं, जिनपर हमारे खाद्य संसाधन निर्भर हैं। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि, कीड़ों की संख्या में गिरावट प्रवासी कीटभक्षी (ऐसे पक्षी जो भोजन लिए पूरी तरह कीटों पर निर्भर हैं) को समान रूप से प्रभावित कर सकती है, उनके सामने अपने भोजन समेत, अपनी संतानो के पालन-पोषण की भी समस्या उत्पन्न हो जाएगी। इस पक्षियों की श्रंखला में चमकादड़ भी शामिल है। कीटों की संख्या में आई लगभग 76% प्रतिशत गिरावट के लिए सिंथेटिक कीटनाशकों और उर्वरकों से प्रदूषण, आक्रामक प्रजातियों और रोगजनकों के साथ ही जलवायु परिवर्तन भी ज़िम्मेदार हैं। ये कीट विशेष तौर पर जैव विविधता हेतु पारिस्थितिक तंत्र के लिए एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते है, कीटों की न केवल दुर्लभ बल्कि कुछ बेहद आम प्रजातियाँ भी विलुप्ति की कगार पर हैं। कीट प्रजाति में आनेवाली गिरावट से निपटने के लिए वैज्ञानिक परिषदों से भी आग्रह किये जा रहे हैं, साथ ही इनके संरक्षण हेतु कई वैज्ञानिक शोध भी किए जा रहे हैं।
जिससे परिणामतः वैज्ञानिक भी एहतियात बरतने की सलाह दे रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार कीट विलुप्ति के इस संकट से निपटने के लिए कीटनाशकों के उपयोग में विशेषतौर पर सावधानी बरतने की आवश्यकता है। इस एक महत्त्वपूर्ण क़दम से उन पक्षियों के संरक्षण में भी सहायता मिलेगी, जो अपने भोजन के लिए इन नन्हे कीटों पर निर्भर हैं। हमारी प्रकृति में हर जीव-जंतु किसी न किसी रूप में एक दूसरे से जुड़ा हुआ है, चूँकि हम सीधे तौर पर इन कीटों का भोजन नहीं करते, परंतु हम उन जीवों का भोजन ज़रूर करते हैं, जो अपने भोजन के लिए इन पर निर्भर हैं। अथवा हम उन उद्पादों और फसलों का आहार ज़रूर लेते हैं, जिनका परागण पूरी तरह इन नन्हे कीटों पर निर्भर हैं। अतः इनके संरक्षण के लिए हमें भी हर संभव प्रयास करने चाहिए।

संदर्भ
https://bit.ly/3qwFnxb
https://bit.ly/2ULfaPQ
https://bit.ly/3gZtCw3

चित्र संदर्भ
1. पृथ्वी के इतिहास से विभिन्न कीड़ों के संग्रह का एक चित्रण (flickr)
2. परागण, यहां एक एवोकैडो फसल पर मधुमक्खी द्वारा, एक पारिस्थितिकी तंत्र सेवा है जिसका एक चित्रण (Wikimedia)
3. कीट आबादी में गिरावट ग्राफ का एक चित्रण (wikimedia)



RECENT POST

  • कोविड सहित मंकीपॉक्स रोग के दोहरे बोझ से बचने के लिए जरूरी उपाय करना आवश्यक है
    कोशिका के आधार पर

     29-06-2022 09:22 AM


  • शानदार शर्की वास्तुकला की गवाही देती हैं, अटाला सहित जौनपुर की अन्य खूबसूरत मस्जिदें
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     28-06-2022 08:21 AM


  • फैशन जगत में अपना एक नया स्‍थान बना रहा है मछली का चमड़ा
    मछलियाँ व उभयचर

     27-06-2022 09:29 AM


  • शरीर पर घने बालों के साथ भयानक ताकत और स्वभाव वाले माने जाते थे गोरिल्ला
    शारीरिक

     26-06-2022 10:13 AM


  • सिकुड़ते प्राकृतिक आवासों के बीच, गैर बर्फीले क्षेत्रों के अनुकूलित हो रहे हैं, ध्रुवीय भालू
    निवास स्थान

     25-06-2022 09:58 AM


  • क्या वास्तव में फ्रोज़न खाद्य पदार्थ की बढ़ती लोकप्रियता ने बदल दिया है भारतीय खाद्य उद्योग को?
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     24-06-2022 09:52 AM


  • सामाजिक व् राजनीतिक अन्याय के विरोध का रचनात्मक, शक्तिशाली रूप है, हिप-हॉप या रैप संगीत
    ध्वनि 1- स्पन्दन से ध्वनि

     23-06-2022 09:39 AM


  • पश्चिमी देशों में योग की लोकप्रियता का श्रेय किसे जाता है?
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     22-06-2022 10:25 AM


  • हथियारों के रूप में कीड़ों का उपयोग
    तितलियाँ व कीड़े

     21-06-2022 10:02 AM


  • क्यों युवा पीढ़ी कर रहे हैं समाचार पढ़ने से परहेज
    संचार एवं संचार यन्त्र

     20-06-2022 09:02 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id