बहुमुखी गुणों से संपन्‍न गुलाब का सुगन्धित फूल

जौनपुर

 27-05-2021 09:27 AM
गंध- ख़ुशबू व इत्र

जौनपुर में इत्र बनाने के लिए बड़े पैमाने पर गुलाब की खेती की जाती है, यहां उत्पादित गुलाबों को राज्य के भीतर ही नहीं वरन् भारत के अन्‍य राज्‍यों में भी निर्यात किया जाता है।यहां पर विभिन्न नस्लों के गुलाब उगाए जाते हैं, जिसमें स्वदेशी एवं संकर दोनों शामिल हैं।गुलाब अपनी खूबसूरती के कारण ही नहीं वरन् अपनी बहुमुखी औषधीय गुणों और अपनी बेशकीमती खुशबू वाले तेल या इत्र के लिए भी प्रसिद्ध है।गुलाब का वैज्ञानिक नाम रोज़ा (Rosa) है, गुलाब एक बहुवर्षीय पुष्पीय पौधा है तथा इसकी करीब 100 जातियाँ या नस्लें हैं जो अधिकतर एशिया (Asia) मूल की हैं। प्रतिवर्ष 12 फरवरी को भारत में गुलाब दिवस मनाया जाता है। भारत में गुलाब की वृहद मात्रा में खेती होती है, जिसका मुख्य प्रयोग इत्र व गुलाब जल बनाने में किया जाता है।
गुलाब लगभग हर ब‍गीचे की शान बढ़ाता है जो कि लंबे समय से अस्तित्‍व में है।गुलाब का सबसे प्राचीन रिकॉर्ड कोलोराडो रॉकीज़ (Colorado Rockies) में पाए गए गुलाब के पत्‍तों से मिलता है, जो कि 35 से 32 मिलियन वर्ष पुरापाषाण युग के हैं।रोमवासियों के लिए गुलाब की सुगंध अत्‍यंत मूल्‍यवान हुआ करती थी वे कमरों को सुगंधित करने तथा स्‍नान के बाद देह को सुगंधित करने के लिए इसका प्रयोग करते थे।गुलाब का तेल जिसे सामान्‍यत: गुलाब के इत्र के रूप में जाना जाता है संभवत: सबसे पहले फारस में बनाया गया था। जिसका यूरोप में आयात किया गया, जिसके बाद यहां पौधों का विकास हुआ।1800 के उत्तरार्ध के विक्टोरियन युग (Victorian era) से पहले, फूलों में सुगंध का उपयोग औषधीय रूप से या गंध को छिपाने जैसे कार्यों के लिए किया जाता था। आपने देखा होगा सामान्‍यत: किसी को भी गुलाब मिलता है तो वे सबसे पहले इसे सूंघते हैं।गुलाब में अलग सुगंध इसीलिए आती है क्‍योंकि वे रसायनों का एक अलग मिश्रण छोड़ते हैं। मोनोटेरपेन्स (monoterpenes) कहे जाने वाले ये रसायन कई गंध वाले पौधों में पाए जा सकते हैं। मोनोटेरपीन विभिन्न आकार और गंध के होते हैं, लेकिन सभी में कार्बन तत्व के 10 परमाणु होते हैं। लेकिन गुलाब के विषय में यह तथ्‍य आज भी अज्ञात है कि गुलाब कैसे अपनी खुशबू बनाते हैं और कैसे खो देते हैं।अन्य पौधे विशेष रसायनों का उपयोग करके सुगंधित रसायन बनाते हैं। जो कि एंजाइम (Enzyme) कहलाते हैं, ये अणु उनमें भाग लिए बिना रासायनिक प्रतिक्रियाओं को तेज कर देते हैं। फूलों में, ये एंजाइम सुगंधित मोनोटेरपीन से दो कणों को लेकर सुगंध बनाते हैं।लेकिन जब ह्यूजेनी (Hugeni) की टीम ने सुगंधित और गंध रहित गुलाबों की तुलना की, तो उन्होंने एक अलग एंजाइम की खोज की। जिसे आरएचएनडीएक्‍स1 (RhNUDX1) कहा जाता है, यह मीठी-महक वाले गुलाबों में सक्रिय था, लेकिन नव पुष्‍पित फूलों में यह निष्‍क्रिय था।आरएचएनडीएक्‍स1 बैक्टीरिया में उस एंजाइम के समान है जो डीएनए (DNA) से जहरीले यौगिकों को हटाता है। लेकिन गुलाबों में, यह एंजाइम बिना गंध वाले मोनोटेरपीन के एक हिस्‍से को काट देता है। गुलाब की पंखुड़ियों में अन्य एंजाइम फिर दूसरे हिस्‍से को काटकर काम खत्म करते हैं।
गुलाब में सुगंध देने वाले रसायन वाष्पित होते हैं और हमारी नाक के संग्राहक वाष्पशील यौगिकों को ग्रहण कर लेते हैं।गुलाब में से प्रत्येक रसायन अलग दर से वाष्पित होता है, जिसके परिणामस्‍वरूप समय के साथ गुलाब की सुगंध बदल जाती है।सुगंध न केवल समय के साथ बदलती है, बल्कि दिन के समय के साथ भी बदलती है।गर्मियों की शुरुआत में सुबह के समय गुलाब की कटाई की जाती है क्योंकि उस समय उनकी सुगंध सबसे अधिक शक्तिशाली होती है।खुशबू एक संकेत भी होती है जो परागणकर्ताओं को एक विशेष फूल के लिए आकर्षित या निर्देशित करती है। जब फूल परागण के लिए तैयार होते हैं तब पौधे अपने सुगंध का उत्पादन अधिकतम स्तर पर करते हैं ताकि इसके संभावित परागणकर्ता सक्रिय हो जाएँ। जो पौधे दिन के दौरान अपने सुगंध के उत्पादन को अधिकतम करते हैं, वे मुख्य रूप से मधुमक्खियों या तितलियों द्वारा परागित होते हैं।सामान्य तौर पर, सबसे अच्छी सुगंध वाले गुलाब गहरे रंग के होते हैं, उनमें अधिक पंखुड़ियाँ होती हैं, और उनमें मोटी या मखमली पंखुड़ियाँ होती हैं।गुलाब के तेल को भाप आसवन के माध्यम से निकाला जाता है, जबकि गुलाब के निरपेक्ष विलायक निष्कर्षण के माध्यम से प्राप्त किए जाते हैं, निरपेक्ष का उपयोग आमतौर पर इत्र में किया जाता है।
रोज़ ओटो एसेंशियल ऑयल (Rose Otto Essential Oil) बहुत महंगा होता है, यदि इसके 28 ग्राम (औंस) तेल बनाने के लिए 100 किलो पंखुड़ियों की आवश्यकता होती है तो सिर्फ एक बूंद तेल बनाने के लिए 60 गुलाब की पंखुड़ियों की आवश्यकता होगी। गुलाब के तेल के उत्पादन के लिए गुलाब की दो प्रमुख प्रजातियों की खेती की जाती है: रोजा डैमसेना (Rosa damascena):दमास्क गुलाब (damask rose), जो व्यापक रूप से बुल्गारिया (Bulgaria), सीरिया(Syria), तुर्की (Turkey), रूस (Russia), पाकिस्तान (Pakistan), भारत (India), उज्बेकिस्तान (Uzbekistan), ईरान (Iran) और चीन (China) में उगाया जाता है। रोजा सेंटीफोलिया (Rosa centifolia):कैबेज़ गुलाब (cabbage rose), जो आमतौर पर मोरक्को (Morocco), फ्रांस (France) और मिस्र (Egypt) में उगाया जाता है। गुलाब के तेल में मौजूद सबसे आम रासायनिक यौगिक हैं: सिट्रोनेलोल(citronellol), गेरानियोल(geraniol), नेरोल(nerol), लिनालूल(linalool), फिनाइल एथिल अल्कोहल(phenyl ethyl alcohol), फ़ार्नेसोल(farnesol), स्टीयरोप्टीन(stearoptene), α-पिनीन(α-pinene), β-पिनीन(β-pinene), α-टेरपीन(α- terpinene), लिमोनेन(limonene), पी-सीमेन(p-cymene), कैम्फीन(camphene), β-कैरियोफिलीन (β- caryophyllene), नेरल(neral), सिट्रोनेलिल एसीटेट(citronellyl acetate), गेरानिल एसीटेट(geranyl acetate), नेरिल एसीटेट(neryl acetate), यूजेनॉल(eugenol), मिथाइल यूजेनॉल(methyl eugenol), रोज़ ऑक्साइड(rose oxide), α-डैमस्केनोन(α-damascenone), β-डैमस्केनोन(β-damascenone), बेंजाल्डिहाइड(benzaldehyde), बेंजाइल अल्कोहल(benzyl alcohol), रोडिनिल एसीटेट (rhodinyl acetate) और फिनाइल एथिल फॉर्मेट(phenyl ethyl formate)।गुलाब के तेल की गुणवत्ता के लिए बीटा- डैमस्केनोन की उपस्थिति और मात्रा को आदर्श माना जाता है। भले ही ये यौगिक 1% से कम मात्रा में गुलाब के तेल में मौजूद क्‍यों न हों, लेकिन गंध का पता लगाने की सीमा के कारण वे गंध की मात्रा का 90% से थोड़ा अधिक हिस्‍सा बनाते हैं। श्रम-गहन उत्पादन प्रक्रिया और खिले हुए गुलाब में तेल की कम सामग्री उपलब्‍ध होने के कारण, गुलाब के तेल की कीमत बहुत अधिक होती है। फूलों की कटाई हाथ से सुबह सूर्योदय से पहले की जाती है और सामग्री को उसी दिन आसुत करना होता है।
गुलाब का तेल निकालने के तीन मुख्य तरीके हैं:
 भाप आसवन, जो एक आवश्यक तेल तैयार करता है, जिसे गुलाब ओटो (Rose otto) या गुलाब का अत्तर (Attar of rose) कहा जाता है।
 विलायक निष्कर्षण, जिसके परिणामस्वरूप एक निरपेक्ष गुलाब निरपेक्ष कहा जाता है।
 सुपरक्रिटिकल कार्बन डाइऑक्साइड निष्कर्षण (Supercritical carbon dioxide extraction), एक कंक्रीट उत्पन्न करता है, जिसे कंक्रीट, पूर्ण या सीओ 2 निकालने के रूप में विपणित किया जा सकता है।
विभिन्न लोक संस्कृतियां और परंपराएं गुलाब को प्रतीकात्मक अर्थ प्रदान करती हैं, हालांकि इन्हें शायद ही कभी गहराई से समझा जाता है। गहरे अर्थों के उदाहरण फूलों की भाषा में निहित हैं। विभिन्न रंगों के गुलाबों के सामान्य अर्थों के उदाहरण हैं: सच्चा प्रेम (लाल), रहस्य (नीला), मासूमियत या पवित्रता (सफेद), मृत्यु (काला), दोस्ती (पीला), और जुनून (नारंगी)।प्राचीन काल से लेकर आधुनिक समय तक भी गुलाब के तेल का औषधीय रूप से उपयोग किया जाता रहा है। त्‍वचा की देखरेख प्रमुखत: शुष्क, संवेदनशील और उम्र बढ़ने वाली त्वचा के लिए यह महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाता है।हल्के शामक, अवसादरोधी और तनाव की स्थिति के उपचार में भी यह सहायक सिद्ध होता है। गुलाब का तेल (या पंखुड़ियों की चाय) पाचन, पेट की बीमारियों या गले में खराश में मदद कर सकता है। गुलाब से विटामिन ए, सी और पी मिलता है। गुलाब की खुशबू याददाश्त बढ़ाने में भी मदद कर सकती है।

संदर्भ:
https://bit.ly/3oBoOPP
https://bit.ly/2QCKuyq
https://bit.ly/3wuouVX
https://bit.ly/3u9mL6A
https://bit.ly/3v93hQN
https://bit.ly/3u9dTxK

चित्र संदर्भ
1. एंग्लिश रोज़ -द स्क्वॉयर- रौरीफ़ का एक चित्रण (wikimedia)
2. वसंत में गुलाब के बगीचे का एक चित्रण (wikimedia)
3. गुलाब के साथ इत्र का चित्रण (unsplash)


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