लोग कपड़ो पर चीनी गांठ लगाकर सुंदर आकृतियां बना रहे हैं और कमा रहे हैं

जौनपुर

 21-05-2021 10:11 AM
द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य


गांठ (knots) शब्द सुनते ही हमारे दिमाग में उलझे हुए धागों की आकृतियां उभरने लगती हैं। गांठ शब्द कई बार चिंतित कर देता है, परन्तु चीन में गांठों से निर्मित बेहद सुन्दर कलाकृतियों को देखकर आपका नजरिया भी निश्चित ही बदल जायेगा। चलिए चीनी गांठ बारे में विस्तार से समझते हैं।
चीनी गांठ घरों की सजावट में उपयोग होने वाली हस्तशिल्प कला है, जिसकी शुरुआत चीन में तांग और सांग राजवंश (960-1279 सीई) में प्रमुख चीनी लोक कला के रूप में हुई थी। गुजरते समय के साथ यह कला मिंग राजवंश में लोकप्रिय हुई, और धीरे-धीरे जापान, कोरिया, सिंगापुर और एशिया के अन्य हिस्सों में तेज़ी से विस्तारित हुई। चीन में इस कला को "चीनी पारंपरिक सजावटी गांठ" (Chinese Traditional Decorative Lump) कहा जाता है। अन्य देशों तथा संस्कृतियों में, इसे "सजावटी गांठ" (Decorative knot) के रूप में जाना जाता है। चीनी गांठों से सुन्दर आकृतियां बनाने के लिए आमतौर पर किसी डोरी को विशेष प्रकार से व्यवस्थित किया जाता है, जहां दो डोरियां गांठ के ऊपर से प्रवेश करती हैं, और दो डोरियां नीचे से निकलती हैं। गांठ आमतौर पर दो परतों वाली और दोनों तरफ की आकृतियां समान होती हैं। पुरातत्व अध्ययनों से यह संकेत मिलता है, कि गांठ बांधने की कला प्रागैतिहासिक (मानव प्रागितिहास, पत्थर के उपकरणों के उपयोग के बाद और लेखन प्रणालियों के आविष्कार के बीच की अवधि है) काल से ही शुरू हो गयी थी। हाल की खोजों में सिलाई हेतु उपयोग की जाने वाली 100,000 साल पुरानी हड्डी की सुइयां मिली हैं, जिनका उपयोग संभवतः जटिल गांठों को खोलने के लिए किया जाता था। चीनी में Jie (गाँठ) शब्द को शुभ माना जाता है, साथ ही इसके कुछ अन्य मतलब भी होते हैं- जैसे आशीर्वाद, दीर्घायु, भाग्य, अच्छा स्वास्थ्य और सुरक्षा इत्यादि। चीन में विभिन्न त्योहारों पर इस पद्दति में निर्मित आभूषण बेहद पसंद किये जाते हैं। चूँकि इसे शुभ संकेत रूप में माना जाता है, इसलिए त्योहारों और अन्य अवसरों पर इस कला में गढ़े गए आभूषण उपहार के रूप में भी दिए जाते हैं।
प्रागैतिहासिक चीनी गांठ के कुछ उदाहरण आज भी मौजूद हैं। गांठ के कुछ शुरुआती साक्ष्य (481-221 ईसा पूर्व) अवधि के दौरान युद्धरत राज्यों के कांस्य जहाजों पर, उत्तरी राजवंश काल की बौद्ध नक्काशी पर (317-581) और पश्चिमी हान अवधि (206 ईसा पूर्व) के दौरान रेशम चित्रों पर मिलते हैं। सजावटी आकृति के रूप में गांठों का उपयोग करने का सबसे पहला ठोस सबूत वसंत और शरद काल (770-476 ईसा पूर्व) के एक उच्च तने वाले छोटे चौकोर बर्तन पर मिला है, जो अब चीन के शांक्सी संग्रहालय में प्रदर्शित किया जाता है। हालांकि, नए शोधों से पुरातत्व अनुसंधान ने पुष्टि की है कि चीन में सजावटी गांठ की सबसे पुरानी कलाकृतियों का पता 4000 साल पहले के मिले कुछ साक्ष्यों से लगाया जा सकता है, जिसमे खंडहर से डबल सिक्का गांठ की तीन-पंक्ति वाली रतन गांठ लिआंगझू(Liangzhu) खुदाई से प्राप्त हुई थी।
गांठों से कलाकृतियां बनाने की कलाओं में मैक्रेम (Macrame) भी बेहद लोकप्रिय है, मैक्रैम का मतलब 'हाथ से बुना हुआ काम' होता है। अर्थात इसके अंतर्गत किसी कपड़े पर हाथों से गांठ लगाकर उसे एक निश्चित आकार दिया जाता है। आजकल यह कला शिल्पकारों के बीच काफी लोकप्रिय हो रही है।
● कैवंडोली मैक्रैम (Cavandoli macrame) सबसे व्यापक बुनाई शैली (गांठ लगाने की कला के परिपेक्ष्य में ) है, जिसे टेपेस्ट्री नॉटिंग (tapestry knotting) भी कहा जाता है। यह गांठ लगाकर ज्यामितीय पैटर्न बनाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली प्रक्रिया का एक जटिल रूप है।
● अक्सर मैक्रैम तकनीकों के माध्यम चमड़े या कपड़े के बेल्ट इत्यादि निर्मित किये जाते हैं। स्कूली बच्चों और किशोरों के बीच विभिन्न अवसरों पर दिए जाने वाले अधिकांश मैत्री कंगन (friendship bracelets or Band) भी इसी पद्धति का उपयोग करके बनाए जाते हैं।
कई स्थानों पर पद्धति उपयोग करके सजावटी सामान और गहने भी बनाए जाते हैं। मैक्रैम-शैली की गांठों की नक्काशी सबसे पहले सजावट के रूप में बेबीलोनियाई और अश्शूरियों (Babylonian and Assyrian) के इतिहास में मिलती है। अरब बुनकरों ने तौलिये, शॉल और पर्दों जैसे हाथ से बने कपड़ों के किनारों पर सजावट के रूप में इस पद्दति का उपयोग किया। मैक्रो शब्द अरबी मैक्रामिया (مكرمية) से लिया गया है, जिसका अर्थ "धारीदार तौलिया", "सजावटी फ्रिंज" या "कशीदाकारी घूंघट" होता है। इस पद्धति का उपयोग उत्तरी अफ्रीका में भी किया गया, जहाँ इसका इस्तेमाल ऊंटों और घोड़ों से मक्खियों को दूर रखने में भी किया जाता था। आज यह कला इंटरनेट और अन्य प्रचार माध्यमों से पूरी दुनिया में विस्तृत हो गयी है, जो की लोगों को बेहद पसंद भी आ रही है। आज यह विभिन्न घरेलू उपकरणों और सजावट के सामान के साथ उपयोग की जा रही है। इस पद्धति से बोहो स्टाइल में वॉल हैंगिंग (wall hanging) से लेकर लॉन्ग टैसल(long tassel), इनडोर प्लांट हैंगर (indoor plant hanger), जार हैंगर (jar hangar), और दीवार पर लटकने वाली अनेक आकृतियों को भी निर्मित किया जाता है। गांठ से निर्मित उत्पाद भारत में वर्षों से लोकप्रिय हैं, यहाँ पर आज यह एक प्रमुख व्यवसाय के रूप में भी देखा जा रहा है। लोग इस कला को इंटरनेट अथवा अन्य माध्यमों से सीख रहे हैं, और लैंपशेड, प्लांट हैंगर, झूला, विंडो कवरिंग, और वॉल हैंगिंग जैसे उत्पाद घर पर बनाकर उन्हें ऑनलाइन अथवा भौतिक बिक्री भी कर रहे हैं। साथ ही अच्छा पैसा भी कमा रहे हैं।

संदर्भ
https://on.china.cn/33LGFtT
https://bit.ly/3omtPLQ
https://bit.ly/3yhVIJx
https://bit.ly/33T3z2c

चित्र संदर्भ

1. गाँठ का विशेष तरीका जिसे जापान में "AGEMAKI" कहा जाता है एक चित्रण (wikimedia)
2. एक पारंपरिक चीनी गाँठ के उदाहरण का एक चित्रण (WIkimedia)
3. अगेमाकी गाँठ का एक चित्रण (WIkimedia)


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