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संकटग्रस्‍त स्थिति में खड़ा महाराष्‍ट्र का राज्‍य पक्षी हरियाल

जौनपुर

 16-04-2021 01:50 PM
पंछीयाँ

पक्षी मनुष्‍यों द्वारा निर्धारित सीमाओं को नहीं जानते हैं। क्या सुंदर पीले पैर वाले हरे कबूतर, जिसे मराठी में होला या हरियाल कहा जाता है, नहीं जानते हैं कि यह महाराष्ट्र के राज्य पक्षी हैं? हालाँकि यहां राज्य पक्षी को राज्य का दर्जा दिए जाने को लेकर वन उल्लू तक पर विवाद खड़ा हो गया है, पक्षी-वादकारियों ने बहस की है कि क्या ऐसे मुद्दों को उठाने की जरूरत है जिससे दोनों प्रजातियों को खतरा हो।पीले पैर वाले हरे कबूतर (ट्रेरोन फोनीकोप्टेरा) (Treron phoenicoptera) भारतीय उपमहाद्वीप में पाए जाने वाले हरे कबूतर की एक सामान्य प्रजाति है। यह प्रजाति फलाहार करती है, जिसमें फिकस (Ficus) की कई प्रजातियां शामिल हैं। ये झुंड में चारा खाते हैं। सुबह के समय वे अक्सर घने वन क्षेत्रों में लंबे हरेभरे पेड़ों के शीर्ष पर धूप सेंकते देखे जाते हैं। ये विशेष रूप से पेड़ की शाखाओं पर जोड़े में बैठे पाए जाते हैं।ये अर्ध सदाबहार पर्णपाती वन, वनाच्छादित जंगल और माध्यमिक वनों में 800 मीटर तक की दूरी पर रहना पसंद करते हैं।
ट्रेरोन कबूतर परिवार कोलंबिया (Columbia) में पक्षियों का एक समूह है। इसके सदस्यों को आमतौर पर हरे कबूतर कहा जाता है। यह जीनस(Genus) एशिया (Asia) और अफ्रीका (Africa) में फैले हुए हैं। इस जीनस में 29 प्रजातियां शामिल हैं, जो उनके हरे रंग के लिए उल्लेखनीय हैं, इनका यह रंग इनके आहार में कैरोटीनॉयड वर्णक (Carotenoid pigment) से आता है।हरे कबूतरों का आहार विभिन्न फल, मेवे और बीज होते हैं। इस जीन के सदस्यों को लंबी पूंछ, मध्यम लंबाई वाली पूंछ और पच्चर के आकार की पूंछ के आधार पर बांटा जा सकता है। वयस्क पीले पैर वाले हरे कबूतर का आकार 29 से 33 सेमी के बीच होता है। पूंछ की लंबाई 8 से 10 सेमी के बीच होती है। वयस्क का वजन 225 से 260 ग्राम के बीच होता है। उनके पास 17 से 19 सेमी के पंख होते हैं।हरे कबूतरों की अधिकांश प्रजातियां यौन द्विरूपता को प्रदर्शित करती हैं, जहां नर और मादा को अलग-अलग रंगों से आसानी से पहचाना जा सकता है।इनके प्रजनन का सही समय तो किसी को ज्ञात नहीं है किंतु जनवरी के महीने में यह अंडे देते हैं। यह 15-17 दिनों के लिए अंडे सेते हैं। हैचिंग (Hatching) के बाद, चूजों को नर और मादा दोनों के द्वारा खिलाया जाता है।इनका शोर, तेज, मजबूत और प्रत्यक्ष होता है, और इनके कॉल (Call) की लगभग दस सुंदर, मधुर, संगीतमय ध्‍वनि की एक श्रृंखला होती है, जो आमतौर पर एक इलाके में उनकी उपस्थिति का संकेत देती हैं। पीले पैर वाले हरे कबूतर शाकाहारी होते हैं। यह कबूतर आम कबूतरों के समान ही टहनियों और छोटी शाखाओं से अपना घोंसला बनाते हैं। यह घोंसले वृक्षों पर लगभग 12-20 फ़ीट ऊंचाई पर होते हैं, यह रंग से छलावरण भी कर सकते हैं। राजस्थान में नीम के पेड़ पर इनका एक घोंसला देखा गया जिसका रंग बिल्कुल उनके शरीर के रंग से मेल खाता है।हरे कबूतर आमतौर पर समूहों में रहते हैं, लेकिन संभोग जोड़े में पाए जा सकते हैं। ये पक्षी मनुष्यों से दूर जंगली वातावरण में रहना पसंद करते हैं। लेकिन आजकल, इन्‍हें शहर और कस्बों के बाहरी इलाकों में भी देखा जा रहा है।वे आमतौर पर सड़क के किनारे के पेड़ों विशेषकर बरगद और पीपल के पेड़ों में पाए जाते हैं। ये सामाजिक पक्षी हैं।
यह कबूतर अनुसूची - IV का पक्षी है, जो वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के अनुसार और आईयूसीएन(IUCN)द्वारा लिस्ट कंसर्न (Least Concern(LC))के रूप में वर्गीकृत है।हरियल एक शर्मिला पक्षी है,यह स्थानीय रूप से पलायन करता है, लेकिन ज्यादातर मध्य भारतीय क्षेत्र में केंद्रित है। एक व्यापारी तरुण बालपांडे कहते हैं कि राज्य पक्षी के रूप में हरियाल को बनाए रखना एक सकारात्मक कदम है। हालांकि, इसे पारधी समुदाय से संबंधित शिकारियों से खतरा है। पक्षी का मांस के लिए शिकार किया जाता है और 100 रुपये प्रति जोड़ी में बेचा जाता है। इसके अलावा, यह एक विदेशी पक्षी के रूप में नेपाल को भी निर्यात किया जाता है। राज्य पक्षी को राज्य सरकार द्वारा संरक्षित किया जाना चाहिए और बीएनएचएस (BNHS) को भी यह पहल करने की आवश्यकता है।

संदर्भ:
https://bit.ly/2OEoCSf
https://bit.ly/3wKnj5w
https://bit.ly/3gfSfoD
https://bit.ly/2QdGjIQ


चित्र सन्दर्भ:

1.हरियल का एक बंधुआ जोड़ा(wikimedia)
2.गर्मियों की तपिश में हरयालों के समूह को अपनी प्यास बुझाते हुए यहाँ देखा जा सकता है (youtube)
3.एक हरियाली अपने पसंदीदा फल के एक पेड़ की शाखा पर बैठे (youtube)


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