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कैंसर का इतिहास

जौनपुर

 29-01-2021 10:36 AM
विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा
कैंसर क्या है?
मानव कोशिकाएँ विभाजित होती रहती हैं ताकि उनके नष्ट होने के बाद नई कोशिकाएं उनकी जगह लेती रहें और हमारा शरीर सामान्य रूप से कार्य कर सके। परंतु किन्हीं कारणों से जब यही कोशिकाएं अनियंत्रित हो कर विभाजित होना शुरू कर देती हैं तो यह कैंसर का रूप ले लेती हैं। कैंसर-कोशिकाएं बढ़ कर एक गांठ या ट्यूमर (tumor) बन जाती हैं तथा शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैल सकती हैं।
कैंसर दुनिया भर में बीमारी से होने वाली मौतों का एक बहुत बड़ा कारण बनता जा रहा है। अक्सर आधुनिक जीवन-शैली को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जाता है परंतु नए वैज्ञानिक साक्ष्य इसे काफी पुराना बताते हैं। कैंसर का सबसे पुराना साक्ष्य दक्षिण अफ्रीका (Africa) में एक मानव संबंधी जीव की 17 लाख पुरानी हड्डी में मिला है। इंसानों में इसका प्राचीनतम प्रमाण मिश्र सभ्यता के अवशेषों में मिली कई हड्डियों में पाया गया है। मिस्र (Egypt) सभ्यता के लोग कैंसर से परिचित थे और अमेरिकन (America) कैंसर सोसाइटी के अनुसार इसका प्रमाण है- लगभग 3000 पुरानी पैपाइरस की छाल पर लिखी गई मिस्र की एक पांडुलिपि- ‘एडविन स्मिथ पैपाइरस’ (Edwin Smith Papyrus)। यह ट्रामा सर्जरी (Trauma surgery) पर लिखी गयी एक पुस्तक का भाग थी जिसमें स्तन में होने वाले कुल 8 प्रकार के ट्यूमर का विवरण था। इन ट्यूमर को आग से दाग़ कर खत्म करने की विधि सुझाई गई थी जिसे cauterization कहा जाता है, साथ ही यह भी लिखा था कि इस स्थिति को ठीक करने का कोई कारगर इलाज नहीं है।
हालांकि इस पांडुलिपि में ‘कैंसर’ शब्द का उपयोग नहीं किया गया था। ‘कैंसर’ शब्द की उत्पत्ति ‘कार्सिनोमा’ ('carcinoma') या ‘कार्सिनोस’ ('carcinos') से मानी जाती है जिसे महान यूनानी चिकित्सा शास्त्री हिप्पोक्रेट्स (Hippocrates) (460-370 BC) ने ट्यूमर के वर्णन में प्रयोग किया था। बाद में ‘कार्सिनोमा’ या ‘कार्सिनोस’ का लातिनी (Latin) भाषा में अनुवाद करते समय रोम (Rome) के चिकित्सक सेल्स (28 BC-50 AD) ने ‘कैंसर’ शब्द का प्रयोग किया।
15वीं-18वीं सदी के काल में आधुनिक विज्ञान एक विषय के रूप में उभर कर आया। नए-नए यंत्रों जैसे माइक्रोस्कोप (microscope) तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण से की गई शव-परीक्षाओं (autopsies) ने मानव शरीर के बारे में बहुत सी नई जानकारी दी। 1761 में पादुआ (इटली) के जियोवन्नी मोर्गग्नि (Giovanni Morgagni) ने कैंसर के अध्ययन की नींव रखी। स्कॉटलैंड (Scotland) के सर्जन जॉन हंटर (John Hunter) ने बताया कि सर्जरी से कैंसर का इलाज संभव है। 1838 में जर्मनी (Germany) के जोहान्स मुलर (Johannes Muller) ने साबित किया कि कैंसर कोशिकाओं से बना है। 1860 के दशक में जर्मनी के एक दूसरे सर्जन कार्ल थियर्सच (Karl Thiersch) ने प्रमाणित किया कि प्रभावित कोशिकाओं के फैलने से कैंसर शरीर के दूसरे हिस्सों में फैलता है।
कैंसर की जांच
यदि शुरुआती दौर में कैंसर का पता चल जाए तो इसका इलाज संभव है। कैंसर की जांच के लिए सबसे पहले जॉर्ज पापनिकोलाउ (George Papanicolaou) ने पेप स्मियर (Pap test) को विकसित किया था जो स्त्रियों में होने वाले सर्वाइकल कैंसर (cervical cancer) को परखने में सक्षम था।
स्तन कैंसर की जांच के लिए 1976 में अमेरिकन कैंसर सोसाइटी ने आधुनिक मैमोग्राफी को सुझाया था। आज हर प्रकार के कैंसर की जांच संभव है और इसके लिए बहुत से तरीके हैं, जैसे- LDCT (Low dose computed tomography), MRI, colonoscopy, sigmoidoscopy इत्यादि।
कैंसर का इलाज
• सर्जरी यह कैंसर के सबसे पुराने इलाजों में से एक है। अत्याधुनिक तकनीक और एनेस्थीसिया (anaesthesia) के विकास के कारण आजकल सर्जरी ज़्यादा सटीक और प्रभावी है।
• रेडियेशन थेरेपी रेडियेशन थेरेपी में कैंसर कोशिकाओं पर अत्यधिक ऊर्जा वाली किरणों को डाल कर उन्हें नष्ट किया जाता है। इसमें X-rays, फोटॉन या किसी अन्य प्रकार की ऊर्जा का प्रयोग किया जा सकता है।
• कीमोथेरेपी कीमोथेरेपी में शरीर में उपस्थित कैंसर कोशिकाओं को दवाओं से खत्म किया जाता है। अनुसंधानों की मदद से वैज्ञानिकों ने कई ऐसी दवाओं की खोज की है जो कैंसर से लड़ने में सक्षम हैं।
कई और इलाज जैसे हार्मोन थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी भी कारगर हैं।

भारत में कैंसर का इतिहास
भारत में प्राचीन काल में कैंसर के कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिले हैं। परंतु कैंसर से मिलती-जुलती बीमारियों के इलाज यहाँ की सबसे पुरानी चिकित्सा पद्धतियों आयुर्वेद तथा सिद्ध की पांडुलिपियों में मिले हैं। भारत में कैंसर के केस 17वीं सदी से मिलते हैं। उसके बाद से ही कैंसर से ग्रसित लोगों के आंकड़े व्यवस्थित तौर पर रखे गए। 19वीं सदी तथा 20वीं सदी के शुरुआती दौर में भारत की जनसंख्या और जीवन-प्रत्याशा कम होने के कारण कैंसर से होने वाली मौतों का आंकड़ा बहुत कम था। 1960 के बाद से यह आंकड़ा तेजी से बढ़ने लगा और 21वीं सदी में तो भारत विश्व में कैंसर से होने वाली मौतों का एक बहुत बड़ा हिस्सेदार बन गया। आज हमारे देश में स्वास्थ्य सुविधाएं भले ही बेहतर हुई हैं परंतु बढ़ती जनसंख्या एवं लोगों में कैंसर के प्रति जागरूकता की कमी से इस बीमारी ने विकराल रूप धारण कर लिया है।
संदर्भ:
https://en.wikipedia.org/wiki/Cancer#History
https://ascopubs.org/doi/full/10.1200/JGO.19.00048(Burden history in India)
https://www.news-medical.net/health/Cancer-History.aspx
https://www.verywellhealth.com/the-history-of-cancer-514101
चित्र संदर्भ:
मुख्य तस्वीर स्तन कैंसर और प्रासंगिक सर्जिकल उपकरणों को दिखाती है। (विकिमीडिया)
दूसरी तस्वीर में पहला कैंसर मरीज - क्लारा जैकोबी ट्यूमर को दर्शाता है। (विकिमीडिया)
तीसरी तस्वीर में कैंसर का इलाज दिखाया गया है। (विकिमीडिया


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