लेवेलोइस तकनीक से बनाए गये हैं, हाल ही में प्राप्त पत्थर के उपकरण

जौनपुर

 08-11-2020 11:12 AM
मघ्यकाल के पहले : 1000 ईस्वी से 1450 ईस्वी तक
लगभग 300,000 साल पहले, अफ्रीका के कुछ हिस्सों में हमारे मानव पूर्वजों ने पत्थरों के टुकडों का उपयोग करके छोटे, नुकीले उपकरण बनाने शुरू किये जिसे उन्होंने लेवेलोइस (Levallois) तकनीक का उपयोग करके बनाया. तकनीक का नाम पेरिस के एक उपनगर, जहां इस तरह से बनाए गए उपकरण पहली बार खोजे गए थे, के नाम पर रखा गया था. तकनीक पिछले युग के बड़े, कम परिष्कृत उपकरणों का गहरा उन्नयन था, जो अफ्रीका में मध्य पाषाण (Middle Stone) युग और यूरोप और पश्चिमी एशिया में मध्य पुरापाषाण (Middle Paleolithic) युग को चिन्हित करती है. उसी समय के आसपास यूरोप में निएंडरथल (Neanderthals) ने भी इन उपकरणों का इस्तेमाल किया। वैज्ञानिकों ने सोचा था कि यह तकनीक दुनिया के अन्य हिस्सों में बहुत बाद में फैली, सम्भवतः आधुनिक मानव के अफ्रीका से बाहर चले जाने के बाद। लेकिन भारत में वैज्ञानिकों ने हाल ही में लेवलोइस तकनीक से बनाए गए हजारों पत्थर के औजारों की खोज की, जो 385,000 साल पहले के थे। ये नवीनतम निष्कर्ष जर्नल नेचर (Journal Nature) में बुधवार को प्रकाशित हुए, जो यह सुझाव देते हैं कि शोधकर्ताओं ने जैसा पहले सोचा था, उससे बहुत पहले ही लेवलोइस तकनीक दुनिया भर में फैल चुकी थी. भारतीय समूह ने इन उपकरणों को भारत के सबसे प्रसिद्ध पुरातात्विक स्थलों में से एक - अत्तिरामपक्कम (Attirampakkam) जो दक्षिणी भारत में वर्तमान चेन्नई शहर के पास स्थित है, से प्राप्त किया. स्थल की सबसे पुरानी कलाकृतियों में बड़े भुज वाली कुल्हाड़ियां और क्लीवर (Cleavers) हैं, जो 15 लाख साल पुराने हैं, और प्रारंभिक पाषाण काल की पुरानी ऐचलियन (Acheulian) संस्कृति से जुड़े हैं। हाल ही में प्राप्त उपकरण, जो 385,000 से 172,000 साल के बीच के हैं, आकार में छोटे हैं और लेवेलोइस तकनीक से स्पष्ट रूप से बनाए गए हैं. इन्हें बनाने के लिए पहले कछुए के खोल के आकार में एक प्रारंभिक पत्थर का निर्माण किया गया है, उसके बाद इसे पूर्वनिर्मित पत्थर से पीटा गया है, ताकि नुकीलें किनारों के साथ एक परत बनायी जा सके.

संदर्भ:
https://www.youtube.com/watch?v=yNsqE_jQQ8w
https://www.youtube.com/watch?v=bqRaxlQH1IE
https://www.npr.org/sections/health-shots/2018/01/31/582102242/discovery-in-india-suggests-an-early-global-spread-of-stone-age-technology


RECENT POST

  • भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और विश्व युद्ध
    उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

     22-01-2021 03:41 PM


  • पशुधन और मुर्गीपालन क्षेत्रों पर लॉकडाउन का प्रभाव
    स्तनधारी

     21-01-2021 01:53 AM


  • यदि भुगतान क्षमता के नजरिए से देखें तो भारत का यातायात जुर्माना विश्व में सबसे अधिक है
    य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला

     20-01-2021 12:15 PM


  • भारतीय नागरिकता से संबंधित कुछ विशेष पहलू
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     19-01-2021 12:36 PM


  • सदियों पुराना है सोने के प्रति भारतीयों के प्रेम का इतिहास
    सिद्धान्त I-अवधारणा माप उपकरण (कागज/घड़ी)

     18-01-2021 12:52 PM


  • जीवन का असली आनंद है, दूसरों को खुशी देना
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     17-01-2021 11:57 AM


  • सारण में ‘छनना’ के निर्माता हुए महामारी से प्रभावित
    वास्तुकला 2 कार्यालय व कार्यप्रणाली

     16-01-2021 12:34 PM


  • मन और आत्मा को शुद्ध करने का साधन हैं, इस्लामिक कला के ज्यामितीय और संग्रथित प्रतिरूप
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     15-01-2021 12:58 AM


  • एक दूसरे के साथ प्रेम और आंनद के साथ रहने का प्रतीक है, मकर संक्रांति
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     14-01-2021 12:31 PM


  • मानव विकास सूचकांक देश के विकास के स्तर पर नजर रखने के लिए अनिवार्य है
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     13-01-2021 12:26 PM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id