आइये जानें, क्या हैं - रंग सिद्धांत?

जौनपुर

 30-08-2020 11:42 AM
द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

अगर हम प्रारंग का संधि विच्छेद करते हैं तो हमें प्रा + रंग दो शब्द प्राप्त होते हैं, जहां प्रा का अर्थ प्राथमिक (प्रारंभिक/प्राचीन) से है और रंग का आशय वर्ण से हैं। प्रारंग भारत की एकता में अनेकता के रंग को उसी तरह संदर्भित करता है, जिस तरह प्राथमिक रंग बाकी सभी रंगों को करते हैं।

प्राथमिक रंग, रंगों के वो मान (Rate) होते हैं, जिनके मिश्रण से सभी रंग बनाये जा सकते हैं। मानव दृष्टि हेतु तीन प्राथमिक वर्ण ही प्रयोग किये जाते हैं, क्योंकि ये दृष्टि त्रिक्रोमैटिक (trichromatic) होती है। प्रारंग के लोगो में प्रयुक्त किये गए रंग प्राकृतिक रंग हैं।

रंगों के प्रकार
प्राथमिक रंग -
चित्रकारी में लाल, नीला और पीला प्राथमिक रंग माने जाते हैं लेकिन भौतिकशास्त्र में प्राथमिक रंग माने जाते हैं लाल, नीला और हरा। यही कारण था कि ऑस्टवाल्ड ने अपने वर्णचक्र में लाल, पीला, हरा और नीला रंग प्राथमिक रंग के तौर पर लिए थे।
द्वितीयक रंग - ये वो रंग होते हैं जो दो या दो से अधिक प्राथमिक रंगों के मेल से बनाये जाते हैं। रंगों की इस श्रेणी में भी तीन रंग रखे गए हैं - बैंगनी, नारंगी और हरा।
टर्सरी (Tertiary) रंग - ये वो रंग होते हैं जो प्राथमिक और द्वितीयक रंगों के मेल से बनते हैं।

किसी भी रंग का ह्यू, सेचुरेशन और वैल्यू (Hue, Saturation, Value) क्या होता है ?
ह्यू (Hue)-
किसी भी शुद्ध रंग को ह्यू कहते हैं।
सेचुरेशन (Saturation) - सेचुरेशन रंग की शुद्धता का परिचायक होता है। रंग जितना चमकीला होगा उतना ही उच्च सेचुरेटेड कहलायेगा जबकि जितना फीका होगा उतना ही निम्न सेचुरेटेड होगा।
वैल्यू (Value) - रंग के हल्के और गहरेपन के मान को वैल्यू कहते हैं।

किसी भी रंग का शेड, टिंट और टोन (Shade, Tint, Tone) क्या हैं ?
शेड (Shade) -
किसी भी रंग में काले रंग को मिलाने से प्राप्त होने वाले रंग उस रंग के शेड कहलाते हैं।
टिंट (Tint) - किसी भी रंग में सफ़ेद रंग को मिलाने से प्राप्त होने वाले रंग उस रंग के टिंट कहलाते हैं।
टोन (Tone) - किसी भी रंग में स्लेटी (Grey) रंग को मिलाने से प्राप्त होने वाले रंग उस रंग के टोन कहलाते हैं।

सन्दर्भ :
https://www.youtube.com/watch?v=NPbLXRBI71k
चित्र सन्दर्भ :
चलचित्र के पश्चात प्रथम चित्र में प्रारंग का लोगो दिखाया गया है। (Prarang)
दूसरे चित्र में प्राथमिक (सबसे अंदर), द्वितीयक (दूसरी परत) और टर्सरी रंगों (सबसे बाहरी परत) को दिखाया है। (Prarang)
तीसरे चित्र में रंगों के ह्यू, सेचुरेशन और वैल्यू को दिखाया गया है। (Prarang)
अंतिम चित्र में शेड, टिंट और टोन को दिखाया गया है। (Prarang)



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