युवाओं और समाज पर प्रौद्योगिकी के प्रभाव का भय है जुवेनोइया

जौनपुर

 17-08-2020 03:33 AM
सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

हर पीढ़ी अपने आपको पहली वाली पीढ़ी तथा आने वाली पीढ़ी की तुलना में अधिक बुद्धिमान और समझदार मानती है। इस भावना को जुवेनोइया (Juvenoia) नाम दिया गया है। प्रत्येक दिन लेखों, पत्रों और इंटरनेट पोस्टों (Internet Posts) की विस्तृत श्रृंखला प्रकाशित होती है, जो बीते हुए कल और आज की तुलना करती है, जो कि व्यंगात्मक और गंभीर तौर पर आश्चर्यजनक है। हम आने वाले दिनों के बच्चों के बारे में पर्याप्त नहीं जान सकते हैं और न ही ये जान सकते हैं कि पुराने दिनों में बच्चे इनसे कितने अलग और अच्छे थे। पीढ़ीगत लेबल (Label) मानव इतिहास को देखने के लिए क्रमबद्ध और विचारशील रूप प्रदान करता है। उनके पास एक आनंदायक संदिग्ध प्रवृत्ति भी है। बच्चे एक प्रजाति का भविष्य हैं, इसलिए यह मान लेना उचित है कि प्रकृति एक प्रजाति में विशेषताओं का चयन करेगी जिससे कि वयस्क सदस्य उस माध्यम को प्राथमिकता देंगे जिससे वे स्वयं उभरे थे। आखिरकार, माता-पिता, परिभाषा के अनुसार, प्रजातियों के लिए एक प्रजनन सफलता थे। उन्होंने नए सदस्य बनाए। इसलिए जो भी विकल्प और प्रभाव उन्हें उस मुकाम तक लाए, वह काफी अच्छे रहे होंगे। इससे कोई भी विचलन समस्या हो सकती है। इसलिए युवाओं के बारे में चिंता करना स्वाभाविक होता है। जुवेनोइया युवाओं और समाज पर प्रौद्योगिकी के प्रभाव का भय है। यह हर पीढ़ी में मौजूद है, चाहे वह समाज की नैतिकता पर ऑटोमोबाइल (Automobile) या रॉक एंड रॉल (Rock and Roll) के प्रभावों पर तर्क-वितर्क के रूप में हो या सामाजिकरण के लिए युवाओं की क्षमता पर पुस्तकों के प्रभाव के रूप में। ये सभी अतिसुरक्षात्मक माता-पिता के निराधार भय की तरह लगते हैं, लेकिन उन बहस के आधुनिक समकक्ष स्मार्टफोन (Smartphone) पर भारी चिंता के रूप में देखे जा सकते हैं। अतीत में, सभी तकनीकी विकास ने बच्चों को कम या ज्यादा अशक्त छोड़ दिया। ऑटोमोबाइल और पुस्तकों को अंततः समाज में शामिल किया गया जबकि अन्य रुझान दूर हो गये। अब ये रुझान या तो पुरानी पीढ़ियों के लिए पुरानी यादों के स्रोत के रूप में काम करते हैं या युवा लोगों के लिए विंटेज एक्सेसरी (Vintage Accessory) के रूप में।
हालांकि, स्मार्टफोन इस प्रवृत्ति के अपवाद हैं। एक परीक्षण में जब लोगों से उनके स्मार्टफोन ले लिये गये तब उनमें अस्वस्थता के लक्षण देखे गये। इन लक्षणों में रक्तचाप में वृद्धि और हृदय गति में वृद्धि आदि देखी गयी, इसके साथ ही भावनात्मक रूप से भी उनको नुकसान हुआ। अध्ययन में यह भी पाया गया कि प्रतिभागियों ने संज्ञानात्मक कार्यों में भी बुरा प्रदर्शन किया। पिछले पांच वर्षों में किशोरों पर सोशल मीडिया (Social Media) के प्रभाव से अक्सर गंभीर किशोर अवसाद और आत्महत्याओं के बढ़ते मामलों के लिए स्मार्टफोन को दोषी ठहराया जाता है। हालाँकि, एक तर्क यह भी दिया जाता है कि स्मार्टफ़ोन समस्याओं का असली कारण नहीं हैं बल्कि यह कारण सोशल मीडिया है। स्मार्टफोन की बहुमुखी प्रतिभा का सुझाव है कि इसका मुख्य कारण फोन नहीं बल्कि उनका दुरूपयोग है।
प्रौद्योगिकी और तकनीकों के निर्माणकर्ता इनके अंधेरे पक्ष को जानते हैं, भले ही आम जनता को यह पूरी तरह से पता हो या नहीं। अपने बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए, माता-पिता को अपने फैसले का अनुकरण करना चाहिए। स्मार्टफोन के हानिकारक प्रभावों से बचने की कुंजी संतुलन है। वैसे तो स्मार्टफ़ोन के दुष्प्रभाव हो सकते हैं, फिर भी इनका लाभ भी बहुत अधिक है और संतुलन के माध्यम से इन पर अंकुश लगाया जा सकता है। एक अध्ययन में पाया गया कि प्रति दिन तीन घंटे की बजाय एक घंटे के लिए फोन का उपयोग करने से आत्महत्या के विचारों का जोखिम लगभग आधा हो जाता है। लोग हमेशा अगली पीढ़ी के बारे में चिंतित रहते हैं। हालांकि, उनके लगभग सभी डर निराधार साबित होते हैं। जुवेनोइया से सम्बंधित एक शब्द एपिबीफोबिया (Ephebiphobia) भी है जो युवाओं के डर को संदर्भित करता है। पहले इसे किशोरों के डर के रूप में वर्णित किया गया था किंतु आज इस घटना को युवा लोगों के त्रुटिपूर्ण, अतिरंजित और सनसनीखेज लक्षण के रूप में पहचाना जाता है। युवाओं के डर का अध्ययन समाजशास्त्र और युवा अध्ययन में होता है।

संदर्भ:
https://sites.google.com/site/vsaucetranscripts/scripts/juvenoia
https://en.wikipedia.org/wiki/Ephebiphobia
http://mocostudent.org/2018/05/juvenoia-an-unfounded-fear/

चित्र सन्दर्भ :
मुख्य चित्र में जुवेनोइया से प्रभावित एक युवती को दिखाया गया है। (Freepik)
दूसरे चित्र में एक भयभीत युवा दिखाई गयी है, जो जुवेनोइया का सांकेतिक चित्रण है। (Peakpx)
तीसरे चित्र में बच्चों को उनकी कक्षा के अंदर दिखाया गया है। (Flickr)



RECENT POST

  • पानी में तैरने, हवा में उड़ने, और बिल को खोदने के लिए सांपों ने किए हैं, अपने शरीर में कुछ सूक्ष्म परिवर्तन
    व्यवहारिक

     13-06-2021 11:42 AM


  • प्रथम और द्वितीय विश्वयुद्ध ने दिया भारतीय स्वतंत्रता में महत्वपूर्ण योगदान
    उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

     12-06-2021 11:21 AM


  • जापान के आधुनिकीकरण का मुख्य प्रतीक है. दांची शैली में बने घर
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     11-06-2021 09:44 AM


  • पर्यावरण में अमार्जक की भूमिका निभाते गिद्धों कि वर्तमान स्थिति
    पंछीयाँ

     10-06-2021 10:04 AM


  • कला. संकट के समय एक प्रेरणा का स्रोत है
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     09-06-2021 09:59 AM


  • अपार संपदा के भण्‍डार और बहुद्देश्‍यों की पूर्ति के कारक हमारे महासागर
    समुद्र

     08-06-2021 08:41 AM


  • जैव विविधता को बनाए रखने के लिए आवश्यक है. पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण
    जलवायु व ऋतु

     07-06-2021 09:35 AM


  • इस बार दिखाई देगा वलयाकार या रिंग ऑफ फायर सूर्य ग्रहण
    आधुनिक राज्य: 1947 से अब तक

     06-06-2021 11:34 AM


  • 5G नेटवर्क के आगमन से कितना बदल जायेगा जीवन?
    संचार एवं संचार यन्त्र वास्तुकला 2 कार्यालय व कार्यप्रणाली

     05-06-2021 10:32 AM


  • जल संकट और महामारी किसानों के लिए दोहरी समस्या
    नदियाँभूमि प्रकार (खेतिहर व बंजर)

     04-06-2021 07:14 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id