क्षमतानुसार दान देने पर केंद्रित है, पीटर सिंगर का विचार प्रयोग ‘द लाइफ यू कैन सेव’

जौनपुर

 10-08-2020 06:45 PM
विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

दर्शन मानव जीवन का एक अहम हिस्सा है, लेकिन अगर इसमें विचार प्रयोग (Thought Experiment) न हो तो यह लगभग निराशाजनक प्रतीत होता है। इस बात पर व्यापक सहमति है कि विचार प्रयोग दर्शन और प्राकृतिक विज्ञान दोनों में एक केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। दार्शनिक विचार प्रयोगों का उपयोग करना अत्यधिक पसंद करते हैं, और इसलिए ऐसे कई विचार प्रयोग में हैं, जो हर चीज पर आपके समक्ष सवाल खड़े करते हैं। विचार प्रयोग बौद्धिक उपकरण बॉक्स (Box) के सबसे महत्वपूर्ण उपकरणों में से एक हैं। कई विषयों में व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले विचार प्रयोग जटिल स्थितियों का पता लगाने, प्रश्नों को उठाने, जटिल विचारों को समझने, तथा उसके योग्य संदर्भ रखने की अनुमति देते हैं। इन विचार प्रयोगों में अनभिज्ञता का आवरण (The Veil of Ignorance), अनुभवी मशीन (The Experience Machine), मैरी का कमरा (Mary's Room), स्वैम्पमैन (Swampman) आदि हैं। द लाइफ यू कैन सेव (The Life You Can Save) भी इन्हीं विचार प्रयोगों में से एक है। यह प्रयोग 2009 में प्रसिद्ध उपयोगितावादी विचारक पीटर सिंगर (Peter Singer) द्वारा लिखा गया था। उनके विचार को इस प्रकार से समझने का प्रयास करते हैं। मान लेते हैं कि अपने काम पर जाने के लिए आपको हर दिन एक तालाब से होकर गुजरना होता है। एक सुबह आप देखते हैं कि एक छोटा बच्चा तालाब में गिर गया है और रो रहा है। आपको ऐसा प्रतीत होता है कि वह पानी में डूब सकता है। आप लंबे और मजबूत हैं, इसलिए आप आसानी से बच्चे को बाहर निकाल सकते हैं। हालाँकि, बच्चे को बचाते हुए आपको कोई शारीरिक नुकसान नहीं होगा, लेकिन आपके द्वारा पहना 10,000 का सूट (Suit) गंदा हो जायेगा और इसे बदलने के लिए आपको घर जाना होगा। इस प्रकार आपको अपने काम के लिए देरी हो सकती है।
इस स्थिति में, क्या बच्चे को बचाने का आपका नैतिक दायित्व है? अवश्य ही आपका उत्तर 'हां' होगा। अब मान लीजिए कि आपसे पूर्व अन्य लोग भी बच्चे को बचाने में सक्षम थे लेकिन उन्होंने नहीं बचाया। तो क्या अब आप भी बच्चे को बचाने के लिए नैतिक रूप से बाध्य नहीं हैं? आपका उत्तर होगा कि हम इस परिस्थिति में भी बच्चे को बचाने के लिए नैतिक रूप से बाध्य हैं। आइए अब कल्पना करें कि स्थिति में कुछ अनिश्चितता है। आप जानते हैं कि यदि आप बचाव का प्रयास करते हैं, तो आपको कोई नुकसान नहीं होने वाला है, लेकिन आप यह सुनिश्चित नहीं कर सकते कि आपका प्रयास सफल होगा या नहीं। अब इस स्थिति में क्या आप अभी भी नैतिक रूप से बाध्य हैं? आपका जवाब अभी भी 'हां' होगा। अब मूल परिदृश्य में एक और बदलाव पर विचार करते हैं। मान लीजिए तालाब एक पार्क के पास है तथा आप अपने कार्य-स्थल पर मोटर साइकिल से जाते हैं। आपको पता है कि पार्क के आस-पास मोटर साइकिल चोरों का एक गिरोह मौजूद है और आपके पास अपनी मोटर साइकिल को लॉक (Lock) करने का समय नहीं है। आप जानते हैं कि यदि बच्चे को बचाने के लिए आप इसे ऐसे ही छोड़ देते हैं, तो वह चोरी हो जायेगी। आपकी मोटर साइकिल पुरानी है, तथा यह आपके लिए अब कोई विशेष महत्त्व नहीं रखती। तो क्या अब भी आप बच्चे को बचाने के लिए नैतिक रूप से बाध्य हैं? आपका उत्तर अभी भी 'हां' होगा। किन्तु अब एक और स्थिति की कल्पना करते हैं। क्या इस बात से आपको कोई फर्क पडेगा अगर बच्चा दूर किसी स्थान का हो लेकिन मौत के खतरे में है, और आपके पास समान रूप से साधन हैं कि आप उसे बचा सकें, बिना किसी बड़ी लागत और बिना खुद को नुकसान पंहुचाये। इस स्थिति में भी आप बच्चे को बचाने के लिए नैतिक रूप से बाध्य होंगे।

अब आप ये बताइये कि क्या आप अपनी एक कमीज की खरीदारी या रेस्तरां में एक समय के भोजन को त्यागकर उन पैसों को नैतिक रूप से एक विदेशी सहायता संस्था को दान देने के लिए बाध्य हैं? यदि कोई व्यक्ति एक विज्ञापन में देखता है कि, रुपये 10000 डॉलर (Dollar) के दान से गरीबी से जूझ रहे गांव में एक बच्चे की जान को बचाया जा सकता है और यदि वह व्यक्ति इस दान को वैध पाता है तथा यह दान करने में सक्षम है, तो क्या व्यक्ति नैतिक रूप से उस बच्चे को बचाने के लिए 10000 डॉलर का दान करने के लिए बाध्य है? यह अभ्यास बताता है कि यदि किसी भी महत्वपूर्ण चीज को त्यागे बिना आप किसी डूबते हुए बच्चे को बचाने के लिए नैतिक रूप से बाध्य है या यह आपका दायित्व है, तो एक विदेशी संस्था की सहायता के लिए छोटा सा दान करना (यदि आप सक्षम हैं तो) भी आपका नैतिक दायित्व है। पीटर सिंगर इस पुस्तक में तर्क देते हैं कि संपन्न देशों के नागरिक अनैतिक व्यवहार कर रहे हैं, क्योंकि वे विकासशील देशों में मौजूद गरीबी को समाप्त करने के लिए मदद नहीं करते। पुस्तक दान देने पर केंद्रित है, और दार्शनिक विचारों पर चर्चा करती है, दान देने के लिए व्यावहारिक और मनोवैज्ञानिक बाधाओं का वर्णन करती है। यह पुस्तक 1971 के अंत में उस स्थिति से प्रेरित है, जब बांग्लादेश में हजारों लोग भोजन, आश्रय और चिकित्सा देखभाल की कमी से मर रहे थे। लेखक ने पहला तर्क दिया है कि वे लोग जो अनावश्यक मृत्यु और पीड़ा को रोकने के लिए आर्थिक रूप से सक्षम हैं, उनका कर्तव्य है कि वह वे मदद के लिए आगे आयें। दूसरा ये कि यह नैतिक दायित्व न केवल उन लोगों के लिए हो जिन्हें हम जानते हैं, बल्कि उन लोगों के लिए भी हो जो हमसे दूर हैं या जिन्हें हम नहीं जानते। इस प्रकार से यह एक मौलिक तर्क है। यदि अधिक संपन्न लोग विकासशील देशों में गरीब लोगों की मदद करने की आवश्यकता को महसूस करेंगे तो वे लोग खुद पर कम पैसा खर्च करेंगे और दूसरों को अधिक देंगे, इस प्रकार हमारा जीवन, हमारा समाज और हमारी दुनिया मौलिक रूप से बदल जाएगी। उनका यह कार्य बहुत प्रभावी सिद्ध हुआ और उन्होंने दुनिया के जीवन को बेहतर बनाने के लिए बहुत अमीर लोगों सहित लोगों को धन की विशाल राशि दान करने के लिए राजी किया ताकि गरीब लोगों के जीवन को सुधारा जा सके। उन्होंने द लाइफ यू सेव (The Life You Save), गिव वेल (Give Well), गिविंग व्हाट वी कैन (Giving What We Can), 80,000 आवर्स (80,000 Hours) और एनिमल चैरिटी इवैल्यूएटर्स (Animal Charity Evaluators) सहित कई संस्थाओं की एक सरणी बनाने में मदद की।

सन्दर्भ:
https://www.philosophyexperiments.com/singer/
https://en.wikipedia.org/wiki/The_Life_You_Can_Save
https://medium.com/@marcgunther/the-life-you-can-save-846612e3b095
https://bigthink.com/scotty-hendricks/seven-thought-experiments-thatll-make-you-question-everything

चित्र सन्दर्भ:
पहले चित्र में जीवन आप बचा सकते हैं का चित्रण है। (youtube)
दूसरा चित्र डूबते आदमी को बचाते हुए दिखा रहा है। (freepik)


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