नाट्यशास्त्र में मिलता है, नृत्य, नाट्य और हस्त मुद्राओं का समन्वय

जौनपुर

 30-04-2020 04:30 AM
द्रिश्य 2- अभिनय कला

नृत्य मनुष्य की सबसे महत्वपूर्ण भाव कलाओं में से एक है। इसका इतिहास उस काल तक जाता है, जब मनुष्य खुद भी पूर्ण विकसित नहीं हुआ था। दुनिया भर से प्राप्त प्राचीन पाषाणकालीन चित्रों में नृत्य के प्रमाण हमें दिखाई देते हैं। जिसमें कि लामबंद तरीके से लोग नृत्य करते हुए चित्रित किये गये हैं। इन चित्रों को समझने का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु है उसमें प्रदर्शित हाथों की मुद्राएँ। नृत्य एक प्रकार से प्रतीकों और मुद्राओं के आधार पर ही पूर्ण रूप से व्यवस्थित होता है। जब हम भारतीय नृत्य परंपरा की बात करते हैं तो उसमे सीधे तौर पर हमें हाथों के ही आकार प्रकार दिखाई देते हैं। हाथों द्वारा किये गए प्रतीक, मुद्रा कहलाते हैं। मुद्रा एक संस्कृत भाषा का शब्द है जिसका अर्थ संकेत या मुहर होता है।

प्राचीन भारतीय नृत्यशास्त्र में प्रतीकात्मक हस्त मुद्राओं का बड़े ही विषद रूप से वर्णन किया गया है। हस्त मुद्राओं में हाथ, अँगुलियों और तालू के विभिन्न प्रकार के आकार प्रकार से ही करने से मुद्रा का निर्माण होता है। प्राचीन भारत में यज्ञ आदि विधियों आदि को करने में विभिन्न प्रकार की हस्त मुद्राओं का अवलोकन किया जाता था और यह एक कारण है कि भारत में हस्त मुद्राओं का समुचित विकास हो पाना संभव हो सका। रंगमंचों आदि में प्रस्तुति के दौरान भी हाथों की मुद्राओं का एक बड़ा ही अनुपम योगदान होता है। उदाहरण के रूप में कत्थक आदि नृत्य में हाथों की मुद्राओं का अत्यंत ही महत्व होता है। हस्त मुद्राएँ मात्र नृत्य में नहीं बल्कि देवी देवताओं के प्रतिमाशास्त्र में भी एक अत्यंत ही महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करती हैं जैसा कि हम बौद्ध प्रतिमाशास्त्र में देख सकते हैं।

हस्त मुद्राओं का योगदान, योग और मार्सल आर्ट (Martial Art) में भी देखा जाता है। यह मुद्रा ही है जिसके सहारे विभिन्न धार्मिक प्रतिमाओं या संकेतों को समझने में आसानी होती है। यदि योग की ही बात करें तो प्राणायाम में भी हस्त मुद्राओं का एक अहम् योगदान होता है। बुद्ध की भी मुद्राओं के आधार पर ही पहचान हो पाती है जिसमें ज्ञान मुद्रा, ध्यान मुद्रा आदि सम्मिलित हैं। यदि हिन्दू धर्म में भगवान विष्णु की बात करें तो उनके हाथों हाथों में विभिन्न आयुधों के आधार पर उनके विभिन्न रूपों की पहचान हो पाती है। बौद्ध मुद्राओं की बात करें तो इसमें अभय मुद्रा, भूमि स्पर्श मुद्रा, बोध्यांगी मुद्रा, धम्मचक्र प्रवर्तन मुद्रा, ध्यान मुद्रा, वरद मुद्रा, वज्र मुद्रा, वित्रक मुद्रा, ज्ञान मुद्रा, करण मुद्रा आदि हैं। इन सभी मुद्राओं में हाथों की स्थिति के सहारे ही बुद्ध के विभिन्न रूपों को प्रस्तुत किया जाता है। जिस ग्रन्थ में सबसे ज्यादा संदर्भित मुद्राओं का अंकन किया गया है वह है भरत मुनि द्वारा रचित नाट्यशास्त्र। नाट्यशास्त्र में कुल 24 हस्त मुद्राओं का वर्णन किया गया है जिसे हम विभिन्न नृत्य कलाओं में देखते हैं। वहीँ नंदिकेश्वर रचित अभिनव दर्पण में कुल 28 मुद्राओं का वर्णन किया गया है।

अब जब हम नृत्य की बात करते हैं तो भारत में विभिन्न प्रकार की नृत्य परम्पराएँ प्रचलित हैं जिनमें नृत्य की विभिन्न मुद्राओं का वर्णन किया गया है। भरतनाट्यम में कुल 28 से 32 मुद्राओं का वर्णन देखने को मिलता है तो कत्थककलि में 24 मुद्राओं का, ओडिसी में हमें 20 हस्त मुद्राओं का प्रयोग देखने को मिलता है। नाट्य शास्त्र की यदि बात करें तो यहाँ पर नाट्य का तारतम्य है अभिनय से तथा इसे ब्रह्मा से जोड़ा जाता है, नाट्य को पांचवे वेद की संज्ञा दी जाती है। यह मान्यता है कि ब्रह्मा ने ही महर्षि भरत को नाट्य की शिक्षा दी थी और उस शिक्षा की व्याख्या भरत मुनि ने अपनी पुस्तक नाट्यशास्त्र में की है। नाट्य शास्त्र में कुल 36 अध्यायों का वर्णन देखने को मिलता है जो कि नृत्य के समस्त प्रकारों का वर्णन प्रस्तुत करते हैं। हमें नाट्यशास्त्र में रसों का योग भी देखने को मिलता है जैसे श्रृंगार रस, हास्य रस, करुण रस, रौद्र रस, वीर रस, भयानक रस, विभित्स रस, अद्भुत रस और शांत रस आदि।

विभिन्न रसों का संयोजन हस्त मुद्राओं के जरिये देखने को मिलता है जैसे तोता मुद्रा, कमल के पुष्प के खिलने की मुद्रा, सिंह मुद्रा, पताका, त्रि पताका, मयूर, अराल, शिखर, सूची, चन्द्रकला, पद्मकोश, शर्पशिर्ष, पद्म, चतुर, हंशपक्ष, त्रिशूल आदि। इन तमाम वर्णित मुद्राओं के आधार पर ही पूरे समाज का वर्णन किया जाता है। नृत्य और नाट्य दोनों ही इस समाज की एक अत्यंत ही महत्वपूर्ण धुरी हैं जो कि समस्त समाज को मुद्राओं के रूप में प्रस्तुत करने का कार्य करती हैं।

चित्र(सन्दर्भ):
1.
मुख्य चित्र में नाट्य के दौरान नृत्य और हस्तमुद्राओं की सम्मिलित अवस्था दिखाई दे रही है।, Facebook
2. द्वितीय चित्र में पौराणिक गुफा चित्र में नृत्य का दृश्य है।, Wikiwand
3. तृतीय चित्र में नाट्य की वभिन्न विधाओं की प्रस्तुति दिखाई दे रही है।, Prarang
4. चतुर्थ चित्र में नृत्य और हस्त मुद्रा के प्रदर्शन के दौरान नर्तकी को दिखाया गया है।, Youtube
5. अंतिम चित्र में प्राणायाम का कलात्मक दृश्य है।

संदर्भ:
1.
https://en.wikipedia.org/wiki/Mudra
2. https://disco.teak.fi/asia/bharata-and-his-natyashastra/
3. http://shakti.e-monsite.com/en/pages/useful-links/mudra.html
4. https://en.wikipedia.org/wiki/List_of_mudras_(dance)



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