रोम से प्राप्त होती है, माँ लक्ष्मी की एक प्राचीन मूर्ती?

जौनपुर

 03-02-2020 02:00 PM
द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

प्रारंभ से हिंदू धर्म में देवियों को आदरणीय स्थान दिया जाता रहा है तथा विभिन्न मान्यताओं के माध्यम से इनको पूजा भी जाता रहा है। इस हिंदू देवी समूह में ‘लक्ष्मी’ का एक प्रमुख स्थान है, जिनको हिंदू परंपरा में भाग्य, धन, शक्ति और उत्पादकता की देवी माना जाता है। इनकी पूजा हिंदू धर्म के विभनन पर्वों पर होती है, जिसमें दिवाली सर्वप्रमुख है, इसके अतरिक्त नवरात्रि, शरद पूर्णिमा, सीता अष्टमी, राधा अष्टमी आदि भी प्रमुख पर्व है। ये जगत के पालक विष्णु की पत्नी के रूप में भी पूजी जाती हैं। हिंदू उपासक लक्ष्मी को अन्य नामों से भी पूजते हैं जैसे श्री देवी, भू देवी, वैष्णवी, पद्मावती, वेदवती, वराही इत्यादि। ये देवी पार्वती और सरस्वती के साथ मिलकर त्रिदेवी की अवधारणा को भी पूर्ण करती हैं।

लक्ष्मी को विभिन्न रूपों में प्रदर्शित किया जाता है, प्रमुख रूप में कमल के ऊपर खड़े हुए या बैठे हुए दिखाया जाता है, जिनके एक हाथ में या फिर दोनो हाथों में कमल रहता है और दोनों तरफ़ कमल लिए हुए हाथी या फिर कलश से अभिषेक करते हुए हाथियों को दिखाया जाता है। प्रतीक के रूप में हाथियों को कमल का अभिषेक करते हुए प्रदर्शित किया जाता है। हिंदू धर्म के साथ-साथ यह देवी जैन और बौद्ध धर्म में भी सम्माननीय स्थान रखती हैं। इसी क्रम में लक्ष्मी की एक प्रतिमा पोम्पे (Pompeii) से प्राप्त हुयी है, जिसको पोम्पे लक्ष्मी (Pompeii Lakshmi) की संज्ञा दी जाती है। इस प्रतिमा की प्राप्ति 1938 ई. में इतालवी शोध शास्त्री अमेदीऔ मैऊरी (Amedeo Maiuri) को कासा डे क्वात्रो स्टीली (Casa dei Quattro stili) के बग़ल से हुयी जो कि पोम्पे में स्थित है। यह प्रतिमा हाथी दाँत से निर्मित एक अनुपम नमूना है। प्रतिमा शास्त्री इसकी प्राचीनता लगभग प्रथम शताब्दी तक लेकर जाते है। इस प्रतिमा को विभिन्न इतिहासकार रोम (Rome) का पूर्वी देशों के साथ व्यापार भारत तक बड़े पैमाने पर होने का सबूत मानते हैं। रोम और भारत के मध्य व्यापार समुद्र मार्ग से होता था, जिसमें सबसे प्रमुख मार्ग लाल सागर से भारत के पश्चिमी तट पर स्थित प्राचीन समय में प्रसिद्ध बंदरगाह भरूच तक आता था। यहाँ से रोमन लोगों की बस्ती भी प्राप्त हुई और साथ ही मेसोपोटमिया (Mesopotamia) सभ्यता की मुहरें भी प्राप्त होती हैं जिससे पता चलता है कि, भारत का पश्चिमी देशों के साथ सम्बंध अत्यंत प्राचीन काल से ही था।

पोम्पे लक्ष्मी की प्रतिमा पर विभिन्न इतिहासकारों एवं प्रतिमा शास्त्रियों में मतभेद हैं। एक समूह का मानना है कि यह प्रतिमा लक्ष्मी की है, वहीं दूसरा समूह मानता है कि यह प्रतिमा ‘यक्षी’ की है क्यूँकि इस प्रतिमा में लक्ष्मी के साथ दर्शाए जाने वाले अन्य प्रतीकों का अभाव है, जैसे लक्ष्मी के साथ कमल और हाथी दर्शाये जाते हैं, जो कि इस प्रतिमा में अनुपस्थित हैं। प्रतिमा उसके संकीर्ण कमरबंद और भव्य आभूषणों के अलावा लगभग नग्नावस्था में है। इस प्रतिमा के दोनों ओर बाहर की ओर मुखान्वित और सौंदर्य प्रसाधनों से भरे हुए पात्रों को पकड़े हुए दो महिला परिचारक भी समुद्भ्रत हैं। प्रतिमा में सिर के ऊपर से एक छेद है, जिसके बारे में इतिहासकारों का सिद्धांत है कि इसका उद्देश्य दर्पण के लिए हो सकता है।

संदर्भ:
1.
https://en.wikipedia.org/wiki/Pompeii_Lakshmi
2. https://www.livehistoryindia.com/forgotten-treasures/2019/01/19/the-mystery-of-pompeii-lakshmi
3. https://www.ancientworldmagazine.com/articles/indian-figurine-pompeii/
4. https://en.wikipedia.org/wiki/Yaksha
चित्र सन्दर्भ:-
1.
https://en.wikipedia.org/wiki/Pompeii_Lakshmi
2. https://en.wikipedia.org/wiki/Pompeii_Lakshmi#/media/File:Pompei_Indian_Statuette_front_and_back.jpg
3. https://en.wikipedia.org/wiki/Pompeii_Lakshmi#/media/File:Pompeii_Lakshmi_sides.jpg



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