कार्बन उत्सर्जन भी है, जलवायु परिवर्तन का एक कारक

जौनपुर

 07-12-2019 11:17 AM
जलवायु व ऋतु

जलवायु परिवर्तन के प्रभावों में आर्थिक, सामाजिक, स्वास्थ आदि सम्मिलित है तथा यह पृथ्वी के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी एक बहुत ही बड़ी खतरे की घंटी है। जलवायु परिवर्तन के एक कारक में कार्बन उत्सर्जन भी है जो की हमारे स्वास्थ के लिए एक खतरनाक जहर का कार्य करता है। इस लेख में हम कार्बन उत्सर्जन के बढ़ने के कारण और इसके प्रभावों के बारे में पढेंगे और साथ ही साथ यह भी की यह कैसे रोजगार के प्रतिकूल कार्य करता है।

कार्बन गैसों का उत्सर्जन खाद्य, इंधन, विनिर्मित वस्तुओं, लकड़ी, सड़कों, भवनों, गाड़ियों, कल कारखानों आदि के माध्यम से उत्सर्जित किया जाता है। इस प्रकार से निकले हुए कार्बन को कार्बन पदचिन्ह के नाम से जाना जाता है। कार्बन उत्सर्जन से ग्रीन हाउस गैसों का भी प्रभाव पृथ्वी के वायुमंडल पर पड़ता है यह कारण है की जिससे पृथ्वी का तापमान एक वेग के साथ बढता है। कार्बन के वायुमंडल में अधिकता के कारण व्यक्ति विभिन्न बीमारियों से ग्रसित हो जाता है और ऐसे माहौल जहाँ पर कार्बन की अधिकता ज्यादा है में सांस लेना तक दूभर हो जाता है।

अभी हाल ही के एक रिपोर्ट से पता चला है की भारत में कार्बन उत्सर्जन की प्रक्रिया अमेरिका और चीन से भी ज्यादा है जो की एक अत्यंत ही सोचनीय विषय है। 2018 में भारत में कार्बन उत्सर्जन की गति करीब 4.8 प्रतिशत की गति से बढ़ी है, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है की इस वृद्धि के बावजूद भी प्रति व्यक्ति उत्सर्जन यहाँ पर वैश्विक औसत के केवल 40 प्रतिशत पर कम है इस हिसाब से भारत का प्रति व्यक्ति उत्सर्जन दर 7 फीसद है और अमेरिका की उत्सर्जन दर 14 फीसद है। भारत में कोयला एक प्रमुख श्रोत है बिजली के बनाने का ऐसे में कोयले के कारण एक बड़ी संख्या में कार्बन का उत्सर्जन होता है। पेरिस क्लाइमेट अग्ग्रिमेंट के तत्वाधान में भारत ने यह निर्णय लिया है की 2030 तक इस दर को 30 फीसद तक कम कर दिया जाएगा।

जलवायु परिवर्तन का रोजगार और श्रम पर बड़ा प्रभाव देखने को मिलेगा। इस जलवायु परिवर्तन से बेरोजगारी और गरीबी बढ़ सकती है। हांलाकि ,बेरोजगारी बढ़ने के कई आंकड़े हैं लेकिन इस कार्बन उत्सर्जन और ग्रीन हाउस गैस के होने से कई ऐसे भी व्यापार हैं जो बड़ी संख्या में वृद्धि करेंगे जो की निम्नवत हैं। पुनर्चक्रण एक ऐसा उद्योग है जो की ऐसी स्थिति में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है। इस प्रकार से पुनर्चक्रण के माध्यम से जलवायु परिवर्तन की गति को धीमा किया जा सकता है ऐसे में यह एक अहम् उद्योग है। पुनर्चक्रण में कचरे में से विभिन्न वस्तुओं को अलग अलग कर के उनसे दूसरे वस्तुओं के निर्माण को ही पुनर्चक्रण कहते है। इ गाड़ियाँ दूसरी ऐसी उद्योग हैं जो की इस प्रकार के माहौल के लिए अत्यंत ही सटीक हैं। अक्षय बिजली का निर्माण करना भी एक अन्य वुयापार है जो की इस माहौल के लिए उत्तम है। इनके अलावां हवा जल आदि के भी संरक्षण आदि जैसे स्टार्टअप के लिए यह एक ऐसा मौक़ा है जिसपर कार्य किया जा सकता है और जो लोगों के लिए फायदेमंद हो सकते हैं।

सन्दर्भ:-
1.
https://en.wikipedia.org/wiki/Carbon_footprint
2. https://qz.com/india/1581665/indias-carbon-emissions-growing-faster-than-us-china-says-iea/
3. https://www.uncclearn.org/sites/default/files/inventory/wcms_122181.pdf
4. https://news.harvard.edu/gazette/story/newsplus/business-opportunities-from-climate-change/
5. https://www.inc.com/maureen-kline/climate-change-a-26-trillion-growth-opportunity.html
6. https://bit.ly/2DwH7yQ



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