खरोष्ठी लिपि का इतिहास

जौनपुर

 14-10-2019 02:43 PM
ध्वनि 2- भाषायें

प्राचीन काल के मानव को अपने विचारों को सुरक्षित रखने के लिए लिपि का आविष्कार करना पड़ा था। इसलिए हम कह सकते हैं कि लिपि ऐसे प्रतीक-चिह्नों का संयोजन है जिनके द्वारा श्रव्य भाषा को दृष्टिगोचर बनाया जाता है। सुनी या कही हुई बात केवल उसी समय और उसी स्थान पर उपयोगी होती है। किंतु लिपिबद्ध कथन या विचार काल की सीमाओं को लांघ सकते हैं। तो चलिए जानते हैं प्राचीन काल की ऐसी ही ‘खरोष्ठी लिपि’ के इतिहास के बारे में। खरोष्ठी लिपि का चौथी-तीसरी शताब्दी ई.पू. में भारत के उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रांतों में काफी प्रचलन था। खरोष्ठी को इंडो-आर्यन भाषा प्राकृत के एक रूप का प्रतिनिधित्व करने के लिए नियोजित किया गया था। वहीं उत्तरी पाकिस्तान, पूर्वी अफगानिस्तान, उत्तर पश्चिमी भारत और मध्य एशिया में इसका व्यापक लेकिन अनियमित विस्तार हुआ।

खरोष्ठी के सबसे पहले पहचाने जाने वाले उदाहरण गांधार के क्षेत्र में स्थित हैं जो अशोका अध्यादेश ((मध्य तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व) जो मानसेहरा और शाहबाज़गढ़ी के शहरों में स्थित हैं) में रिकॉर्ड (Record) किए गए हैं। भारतीय उत्तरपश्चिम के बाहर स्थित अशोक के शिलालेख ब्रह्मी लिपि में लिखे गए थे, लेकिन गांधार क्षेत्र की ओर ये शिलालेख खरोष्ठी लिपि का उपयोग करते हुए लिखे गए थे। चूंकि ब्रह्मी लिपि उत्तरपश्चिम के बाहर अधिकांश भारत में प्रख्यात थी, लेकिन खरोष्ठी इस क्षेत्र में प्रमुख रही और यहाँ अधिकांश शिलालेख खरोष्ठी में लिखे गए थे।

इसका उपयोग बैक्ट्रिया (Bactria), कुषाण साम्राज्य, सोगडिया और सिल्क रोड (Silk Road) में भी किया गया, जहाँ से मिले कुछ प्रमाण यह बताते हैं कि यह लिपि 7वीं शताब्दी तक खोतान और निया (शिनजियांग के दो शहर) दोनों शहरों में पाई जाती है। अल्पकालिक भारत-ग्रीक साम्राज्य की स्थापना के बाद गांधार में एक मुद्रा प्रणाली शुरू की गई थी, तब खरोष्ठी का उपयोग सिक्कों के शिलालेखों पर व्यापक रूप से किया गया था। सिक्कों में ग्रीक और प्राकृत दोनों में द्विभाषी शिलालेख थे, जो कभी-कभी ब्रह्मी या खरोष्ठी वर्णों के साथ लिखे जाते थे।

मार्च, 2005 में संस्करण 4.1 के प्रकाशन के साथ खरोष्ठी को यूनिकोड (Unicode) मानक में जोड़ा गया था। खरोष्ठी के लिए यूनिकोड मानक U+10A00-U+10A5F है। खरोष्ठी को ज़्यादातर दाएं से बाएं लिखा जाता है, लेकिन कुछ शिलालेख पहले से ही बाएं से दाएं दिशा को दर्शाते हैं जो बाद की दक्षिण एशियाई लिपियों के लिए सार्वभौमिक बन गई। खरोष्ठी में केवल एक स्वर शामिल होता है जो शब्दों में प्रारंभिक स्वरों के लिए उपयोग किया जाता है।

ब्रह्मी लिपि के बढ़ते प्रभाव से यह भारत के बाहर फैलती गई, और खरोष्ठी लिपि विशिष्ट स्थानों तक ही सीमित रह गई। चौथी शताब्दी ईस्वी तक, खरोष्ठी या तो विलुप्त हो गई थी या इसे अन्य क्षेत्रों में अन्य लेखन प्रणालियों द्वारा बदल दिया गया था। आज तक, कोई खरोष्ठी से उत्पन्न लिपियों की पहचान नहीं की गई है।

संदर्भ:

1.https://www.ancient.eu/Kharosthi_Script/
2.https://en.wikipedia.org/wiki/Kharosthi
3.https://www.coin-competition.eu/tag/kharosthi-inscriptions/


RECENT POST

  • पशुओं द्वारा निर्मित विश्‍व की सबसे बड़ी संरचना सोशिएबल विवर्स के घोंसले
    निवास स्थान

     24-10-2021 10:30 AM


  • इस्लामी प्रतीक रूब-अल-हिज़्ब की उत्पत्ति और धार्मिक महत्व
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     23-10-2021 05:51 PM


  • अंतरिक्ष मौसम की पृथ्वी के साथ परस्पर क्रिया और इसका पृथ्वी पर प्रभाव
    जलवायु व ऋतु

     22-10-2021 08:24 AM


  • विभिन्न संस्कृतियों में फूलों की उपयोगिता
    बागवानी के पौधे (बागान)

     21-10-2021 08:27 AM


  • लाल केले की बढ़ती लोकप्रियता महत्व तथा विशेषताएं
    साग-सब्जियाँ

     21-10-2021 05:44 AM


  • व्यवसाय‚ उद्यमिता और अप्रवासियों के बीच संबंध
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     20-10-2021 09:50 AM


  • मुहम्मद पैगंबर के जन्मदिन मौलिद के पाठ और कविताएँ
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     18-10-2021 11:35 AM


  • पूरी तरह से मांसाहारी जीव है, टार्सियर
    शारीरिक

     17-10-2021 12:06 PM


  • परमाणु ईंधन के रूप में थोरियम का बढ़ता महत्व और यह यूरेनियम से बेहतर क्यों है
    खनिज

     16-10-2021 05:32 PM


  • भारत-फारसी प्रभाव के एक लोकप्रिय व्यंजन “निहारी” की उत्पत्ति और सांस्‍कृतिक महत्व
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     15-10-2021 05:16 PM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id