जौनपुर का करसूलनाथ मंदिर और इससे जुड़ी किंवदंतियाँ

जौनपुर

 04-06-2019 12:00 PM
वास्तुकला 1 वाह्य भवन

करसूलनाथ मंदिर जौनपुर जिले के कंधिकला नामक गाँव में सई नदी के किनारे स्थित है। यह मंदिर शिव को समर्पित है। आज करसूलनाथ मंदिर पूरे जिले में आस्था का एक प्रमुख केंद्र है। वर्तमान स्थापत्य के अनुसार यह मंदिर कदाचित नया प्रतीत होता है। परन्तु इसकी ऐतिहासिकता इसके सामने स्थित कुएं और उसमे लिखित पाषाणलेख से प्राप्त होती है। कुएं की वास्तुकला को देखकर यह अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि यह कुआं करीब 18वीं शताब्दी में बनाया गया था। इस कुएं के समीप एक और अन्य कुएं का निर्माण किया गया है, जिस पर लाल गेरू रंग से चित्रकारी भी की गयी है। यह कुआँ करीब 19वीं शताब्दी का है। कुओं की ऐतिहासिकता से यह कहा जा सकता है कि यह मंदिर ज्यादा नहीं तो 18वीं शताब्दी का माना जा सकता है।

जिस स्थान पर यह मंदिर बनाया गया है वह प्राचीन व्यापारिक मार्ग पर आता है तथा मछलीशहर और इलाहाबाद जाने का यह एकमात्र मार्ग था। आज भी यहाँ पर नाव की व्यवस्था है। जिसपर लोग सवार होकर नदी पार करते हैं। इस मंदिर के आस-पास नाविकों की एक पूरी बस्ती भी है जिनका कार्य लोगों को नदी पार कराने का है। ऐसे में इस मंदिर के प्राचीन होने के और भी महत्वपूर्ण साक्ष्य प्राप्त हो जाते हैं। इस मार्ग से मिर्जापुर और भदोही से कोल्हू भी आस-पास के क्षेत्रों में लाया जाता था।

करसूलनाथ मंदिर से सम्बंधित कई किंवदंतियाँ प्रचलित हैं। उन्हीं में से एक है इस मंदिर के निर्माण और प्राप्ति की। कहा जाता है कि एक समय यह क्षेत्र बड़ा जंगल हुआ करता था तथा आस-पास के लोग भवन निर्माण करने के लिए यहीं से बालू मंगाया करते थे। उस समय पूरे जौनपुर में ऊंटों से बालू ढोने का कार्य किया जाता था। आज भी जौनपुर में कई स्थानों पर ऊँट पाए जाते हैं। उस दौरान ऊँट से व्यक्ति यहाँ पर बालू की खुदाई करने आते थे। उसी वक्त बालू की खुदाई के दौरान शिवलिंग पर किसी का फावड़ा पड़ने के कारण शिवलिंग का ऊपरी भाग टूट गया और इस प्रकार से इस शिवलिंग का पता चला। जैसा कि यहाँ की भौगोलिक दशा की वजह से पत्थर का यहाँ पर लोप है और यहाँ पर कम मात्रा में ही पत्थर पाया जाता है तो लोगों ने इसको एक चमत्कार ही समझा और पाए हुए पत्थर को शिवलिंग का दर्जा दे दिया। उसी समय के बाद से करसूलनाथ मंदिर की स्थापना की गयी और प्रत्येक वर्ष यहाँ पर शिवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में भक्त आने लगे और भगवान का आशीर्वाद लेने लगे। विभिन्न पुरातात्त्विक अध्ययनों से यहाँ के आस-पास के क्षेत्र से कई पुरातात्त्विक स्थलों का भी पता चला है। ऐसे में यह सिद्ध होता है कि यह स्थान व्यापारिक मार्ग में आता था।

एक अन्य किवंदति के अनुसार यहाँ भरों की बस्ती थी। मिर्ज़ापुर का कोई व्यापारी अपना सामान लेकर जा रहा था। रात में वो यहाँ रुका। उसका सामान चोरी हो गया। रात में शंकर जी ने उसे स्वपन दिया तुम्हारा सामान मिल जायेगा, मेरे मंदिर का निर्माण कराओ। जंगल में खोजने पर शंकर जी का लिंग (पिण्डी) मिला। उसका सारा सामान भी मिल गया। उसने चुना पत्थर से शिव मंदिर का निर्माण करवाया। उसने एक शोने का त्रिशूल भी शिखर पर लगवाया था जिससे बाद में चोरों ने चुरा लिया। मंदिर के पास एक कुआँ है जिस पर लिखा हुआ लेख आज तक कोई पड़ नही पाया है।

सन्दर्भ:-
1. दुबे, डा. सत्यनारायण जौनपुर का गौरवशाली इतिहास 2013 शारदा पुस्तक भवन, इलाहाबाद



RECENT POST

  • समुद्र की वास्‍तविक गहराई का मापन
    समुद्री संसाधन

     18-04-2021 11:58 AM


  • शहरीकरण की दौड़ में पिछड़ते मजदूरों की मजबूरी।
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     17-04-2021 01:46 PM


  • संकटग्रस्‍त स्थिति में खड़ा महाराष्‍ट्र का राज्‍य पक्षी हरियाल
    पंछीयाँ

     16-04-2021 01:50 PM


  • मां शीतला चौकिया देवी की पूजन परंपरा
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     15-04-2021 02:03 PM


  • नगर कीर्तन की रौनक और पंच प्यारों का बलिदान बनाता है बैसाखी को महान पर्व
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     14-04-2021 01:01 PM


  • नरम खोल वाले कछुओं के लिए सुरक्षित आवास के रूप में उभर रहे हैं,पूर्वोत्तर भारत में स्थित मंदिरों के तालाब
    रेंगने वाले जीव

     13-04-2021 12:49 PM


  • इस्लाम और रमज़ान का एक महत्वपूर्ण पहलू : निय्याह
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     12-04-2021 10:00 AM


  • गोल्डन सिटी ऑफ़ राजस्थान (Golden City of Rajasthan) की एक सैर
    मरुस्थल

     11-04-2021 10:00 AM


  • शर्की सल्तनत और खलीफत
    मध्यकाल 1450 ईस्वी से 1780 ईस्वी तक

     10-04-2021 10:16 AM


  • मनुष्यों और अन्य जीवों के शरीर में अंग पुनर्जनन की क्षमता में भिन्नता
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     09-04-2021 10:01 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id