मुस्लिम देश इंडोनेशिया की डाक टिकटों में रामायण की छाप

जौनपुर

 14-05-2019 11:00 AM
द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

हिंदू महाकाव्य रामायण दक्षिण पूर्व के कई एशियाई देशों में समान रूप से प्रतिष्ठित है। जैसे कि इंडोनेशिया में, यहां के लोगों का मनाना है कि भगवान राम भारत की जगह उनके पूर्वजों के साथ अधिक समीप हैं। इंडोनेशिया के लगभग 87.2% निवासी मुसलमान हैं, फिर भी उनकी संस्कृति पर रामायण की गहरी छाप है। दरअसल रामकथा यहां की सांस्कृतिक विरासत का एक अभिन्न हिस्सा है। रामायण के साथ जुड़ी अपनी इस सांस्कृतिक पहचान के साथ यह देश बहुत ही सहज है। जिसका पता यहां के अनेकों डाक टिकटों को देख कर लग जाता है जो कि रामायण के पात्रों और कहानी पर आधारित हैं।

इंडोनेशिया दुनिया का चौथा सबसे अधिक आबादी वाला देश है। यहां का डाक प्रशासन औपचारिक रूप से 27 सितंबर 1945 को स्थापित किया गया था, लेकिन 1 अप्रैल 1864 को पहली बार ‘डच ईस्ट इंडीज स्टैम्प’ (Dutch East Indies stamp) जारी किये गए थे जिसके साथ साथ इंडोनेशियाई टिकटों का इतिहास शुरू हुआ था। इंडोनेशियाई टिकटों के इतिहास को पांच व्यापक अवधियों में विभाजित किया जा सकता है:
1. डच ईस्ट जोश ट्विगर (The Dutch East Josh Twigger): इस अवधी के दौरान डाक टिकट में नीदरलैंड के राजा विलेम III की तस्वीर दिखाई गई थी। 1920 तक यहां के डाक टिकटों के डिज़ाइन में केवल राजा और रानी के चित्र दिखाए जाते थे।
2. जापानी आधिपत्य: 1943 में जापानी कब्जे के दौरान कई टिकटों को जारी किया गया जो कि पारंपरिक घर, नर्तक, मंदिर और चावल के क्षेत्र के दृश्यों पर आधारित थे।
3. स्वतंत्रता संग्राम: इंडोनेशिया की स्वतंत्रता की घोषणा के बाद, 1946 में स्वतंत्रता के उपलक्ष्य में एक उग्र सांड को दर्शाने वाला डाक टिकट जारी किया गया था। उस समय में यहां की टिकटों पर जकार्ता, बानदुंग, पालेमबांग और योग्यकर्ता जैसे क्षेत्र दिखाई देते थे।
4. आजादी की शुरुआत: आजादी के बाद 1954 में, यहां पहला आधुनिक प्रिंटर (Printer) जिसका नाम पर्टजेटाकन केबाजोरान (Pertjetakan Kebajoran) था, खोला गया, जो स्वदेशी डाक टिकटों की प्रिंटिंग के अध्याय को शुरू करता है। इन टिकटों पर ज्यादातर स्थानीय डिज़ाइनर दिखाई दिये थे।
5. नया क्रम और वर्तमान: अपनी पहली पंचवर्षीय योजना के समय में, सरकार ने कई अलग-अलग विषयों पर डाक टिकट जारी किए। इन्ही में से एक था 1962 में जारी किया गया एशियाई खेल IV का टिकट जिसमें आप भगवान राम को अपने दिव्य धनुष के साथ देख सकते हैं। तब से लेकर अब तक न जाने कितने रामायण पर आधारित टिकट इंडोनेशिया में जारी किये जा चुके हैं। 24 जनवरी 2016 में जारी किये गये एक डाक टिकट में हनुमान को लंका जलाते हुए भी दिखाया गया है।

इस देश में समय समय पर भगवान राम, देवी सीता, हनुमान, जटायू और रावण आदि पर आधारित डाक टिकटों को जारी किया गया है। रामायण को यहां 'काकाविन रामायण' कहा जाता है जोकि प्राचीन जावा और बाली की ‘कावी’ लेखन शैली में लिखा एक विख्यात काव्य है और यह संस्कृत रामायण का ही एक रूप है। ऐसा माना जाता है कि इसे मध्य जावा में लगभग 870 ईस्वी के दौरान लिखा गया था, तब यहां मेदांग राजवंश का शासन था। साहित्यिक विद्वानों का कहना है कि 6ठी और 7वीं शताब्दी ईस्वी के बीच लिखित इस काकाविन रामायण का स्रोत भारतीय कवि भट्टी द्वारा संस्कृत कविता ‘रावणवध’ या ‘भट्टीकाव्य’ रहा होगा। क्योंकि काकाविन रामायण का पहला भाग भट्टीकाव्य का सटीक अनुवादन करता है। परंतु फिर भी भारत और इंडोनेशिया की रामायण में थोड़ा अंतर है:
भारतीय प्राचीन सांस्कृतिक रामायण के रचियता आदिकवि ऋषि वाल्मिकी हैं, तो वहीं इंडोनेशियाई रामायण ऋषि कंबन द्वारा लिखित रामायण का श्रीलंकाई संस्करण है जिसका शीर्षक है, ‘रामवतारम्’ और इसे तमिल में लिखा गया था।
भारतीय रामायण में सीता को एक नरम स्वभाव वाली और सुंदर महिला के रूप में चित्रित किया गया है जबकि इंडोनेशियाई रामायण में उन्हें साहसिक, मजबूत और शक्तिशाली दिखाया गया है। रामवतारम् में, सीता कई मायनों में द्रौपदी के समान है।
भारतीय रामायण तमिल संस्करण की तुलना में शांतिपूर्ण और कम हिंसक है।
वाल्मीकि की भारतीय रामायण में, लक्ष्मण को सूर्पणखा की नाक काटते दिखाया गया है क्योंकि वह राम से विवाह करना चाहती थी और सीता को मारने की योजना बना रही थी। जबकि तमिल संस्करण में देवों और असुरों के साथ-साथ देवियों और असुरियों के बीच की लड़ाई का भी उल्लेख है। जिसमें सीता ने सूर्पणखा को लड़ाई में पराजित किया और उसकी नाक काट कर वापस रावण के पास भेज दिया।

संदर्भ:
1. https://topyaps.com/ramayana-stamps-from-southeast-asia/
2. https://bit.ly/2YulTdh
3. https://en.wikipedia.org/wiki/Kakawin_Ramayana
4. https://en.wikipedia.org/wiki/Postage_stamps_and_postal_history_of_Indonesia



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