अपराध तहकीकात में उपयोगी साबित होता हुआ डीएनए फिंगरप्रिंटिंग

जौनपुर

 11-12-2018 11:34 AM
डीएनए

किसी भी व्यक्ति के जैविक अंशो जैसे- रक्त, बाल, लार, शुक्राणु या दूसरे कोशिका-स्नोत, सभी से एक ही प्रकार के डीएनए (DNA) प्राप्त होता है। डीएनए वह रसायन है जो प्रत्येक व्यक्ति को उसकी एक विशिष्ट पहचान प्रदान करता है। कभी भी दो व्यक्तियों का डीएनए एक सा नही होता है और आयु के साथ व्यक्ति के डी एन ए में कोई बदलाव भी नहीं आता है। अतः जन्म से मृत्यु तक डीएनए एक सा ही रहता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए डीएनए फिंगरप्रिंटिंग (Fingerprinting) विकास सबसे पहले 1984 में ब्रिटिश लीसेस्टर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक एलेक जेफ्फ्रेस ने किया था।

भारत में डीएनए फिंगरप्रिंटिंग का जनक डॉक्टर लालजी सिंह (5 जुलाई 1947 – 10 दिसम्बर 2017) को कहा जाता है। डॉक्टर लालजी सिंह ने भारत में पहली बार क्राइम इन्वेस्टिगेशन के लिए साल 1988 में डीएनए फिंगरप्रिंटिंग का इस्तेमाल किया। उत्तर प्रदेश के जौनपुर के रहने वाले लालजी सिंह हैदराबाद में 'कोशिकीय एवं आणविक जीवविज्ञान केन्द्र' (Centre for Cellular and Molecular Biology (CCMB)) के भूतपूर्व निदेशक थे। वे यहां पर 1998-2009 तक निदेशक रहे। 70 वर्ष आयु में दिल का दौरा पड़ने से लालजी सिंह का निधन हो गया था। वे भारत के नामी जीवविज्ञानिकों में से एक थे। लिंग निर्धारण का आणविक आधार, डीएनए फिंगरप्रिंटिंग, वन्यजीव संरक्षण, मानव जीनोम एवं प्राचीन डीएनए अध्ययन आदि में भी उनकी विशेष रुचि थी।

डीएनए प्रोफाइलिंग (DNA Profiling) या डीएनए फिंगरप्रिंटिंग पद्धति में किसी व्यक्ति के डीएनए की पहचान की जाती है। जब इसे इजात किया गया था तो उस समय इसमें विशिष्ट डीएनए क्रम का प्रयोग होता था, जिसे माइक्रोसेटेलाइट (microsatellite) कहा जाता है। माइक्रोसेटेलाइट डीएनए के छोटे टुकड़े होते हैं। परंतु इसमें विधि में कुछ अपवाद भी थे। वर्तमान में डीएनए प्रोफाइलिंग की कई विधियां मौजूद हैं जैसे:

डीएनए निष्कासन:
जब रक्त या लार आदि नमूनों से प्राप्त डीएनए को लेते हैं, तो डीएनए का केवल एक छोटा सा हिस्सा ही प्रयोग के लिये निकाला जाता है।

रेस्ट्रिक्शन फ्रेगमेंट लेंथ पॉलीमोरफ़िज्म (Restriction fragment length polymorphism (RFLP)) विश्लेषण:
यह डीएनए फिंगरप्रिंटिंग की पहली विधि है इसी में कोशिकाओं से डीएनए एकत्र किया जाता है और प्रतिबंध एंजाइम का उपयोग करके डीएनए को छोटे टुकड़ों में काटा जाता है।

पॉलीमरेज चेन रिएक्शन (Polymerase chain reaction-PCR):
यह प्रक्रिया 1983 में कैरी म्युलिस द्वारा विकसित की गई थी इस प्रक्रिया में किसी डीएनए सेगमेण्ट की एकाधिक प्रतिरूप तैयार किये जाते है। इसमें किसी विशिष्ट डीएनए प्रतिकृति की जैविक प्रक्रिया की नकल की जाती है, जिससे मूल डीएनए सेगमेण्ट के कई प्रतिरूप तैयार हो जाते है।

शॉर्ट टंडेम रिपीट (Short tandem repeats-STR):
क्योंकि दो लोगों में डीएनए की इकाइयों की अलग-अलग संख्या होती है, इसलिए एसटीआर का उपयोग उन दोनों क्तियों के बीच भेदभाव करने के लिए किया जाता है। इस पद्धति में किसी व्यक्ति के जैविक अंशो जैसे- रक्त, बाल, लार, वीर्य या दूसरे कोशिका-स्नोतों के द्वारा उसके डीएनए की पहचान की जाती है।

एमप्लीफाइड फ्रेगमेंट लेंथ पॉलीमोरफ़िज्म (Amplified fragment length polymorphism- AmpFLP):
यह तकनीक आरएफएलपी विश्लेषण से भी अधिक तेज है और इसमें भी डीएनए के नमूने को बढ़ाने के लिए पीसीआर का इस्तेमाल किया गया था। यहां प्रक्रिया विभिन्न एलीलों को अलग करने के लिए वेरिएबल नंबर टंडेम रिपीट (variable number tandem repeat (VNTR)) पॉलीमोरफ़िज्म पर निर्भर होती है।

उपरोक्त विधियों का डीएनए प्रोफाइलिंग या डीएनए फिंगरप्रिंटिंग पद्धति में प्रमुखतः से उपयोग किया जाता है परंतु इसके आलावा Y-गुणसूत्र विश्लेषण (Y-chromosome analysis), डीएनए पारिवारिक संबंध विश्लेषण, माइटोकॉन्ड्रिअल विश्लेषण (Mitochondrial analysis) का उपयोग भी डीएनए फिंगरप्रिंटिंग पद्धति में किया जाता है।

डीएनए फिंगरप्रिंटिंग तकनीक का उपयोग आपराधिक मामलों की गुत्थियां सुलझाने के लिए विशेष रूप से किया जाता है। इसके साथ ही मातृत्व, पितृत्व या व्यक्तिगत पहचान को निर्धारित करने के लिए भी इसका प्रयोग होता है। वर्तमान में एक व्यक्ति की पहचान ढूंढने के तरीकों में डीएनए फिंगरप्रिंटिंग सबसे बेहतर मानी जाती है। यह एक सशक्त तकनीक है, जो निम्नलिखित क्षेत्रों में प्रयोग में लायी जा सकती है:-

1. अपराधिक मामलों की जाँच:
भारत की न्याय व्यवस्था ने डीएनए फिंगरप्रिंटिंग को ठोस साक्ष्य के रूप में माना जाता है। इसके द्वारा रक्त, बाल, मृत शरीर के अवशेष, दांत या हड्डी के टुकड़े आदि के माध्यम से वैयक्तिक स्तर पर पहचान की जा सकती है। अतः यह विधि हत्या, बलात्कार, गैरकानूनी कृत्यों, जैविक साक्ष्यों के आधार पर वास्तविक अपराधी की पहचान इत्यादि मामलों में अत्यंत आवश्यक मानी जाती है।

2. पारिवारिक मामलों की जाँच:
बच्चे के वास्तविक माता पिता निर्धारण में, पैत्रक संपत्ति आदि के दावों से निपटने के लिए, दीवानी मुकदमों में माता-पिता की सकारात्मक पहचान में डीएनए फिंगरप्रिंटिंग अत्यंत आवश्यक है। क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति में माता-पिता दोनों के डीएनए मौजूद हैं, अतः डीएनए की छाप के आधार पर बच्चे के वास्तविक माता पिता के निर्धारण की पुष्टि की जा सकती है।

3. प्रतिरक्षा प्रलेख में:
सेना आदि संगठनों में डीएनए फिंगरप्रिंटिंग के रिकार्ड रखे जाते हैं ताकि जरूरत पड़ने पर व्यक्तियों की पहचान की जा सके।

4. चिकित्सा एवं स्वास्थ्य जाँच:
वंशानुगत बीमारियों को पहचानने में तथा उनके लिए चिकित्सा पद्यति विकसित करने के लिये यह तकनीक अत्यंत आवश्यक है, यहां तक की गर्भ-धारण से पूर्व या गर्भ के दौरान, इस विधि द्वारा आनिवांशिक रोगों एवं अंतर्जात त्रुटियों की जानकारी प्राप्त की जा सकती है और समय रहते इन्हे ठीक भी किया जा सकता है।

5. कृषि एवं बागवानी:
कृषि एवं बागवानी के क्षेत्र में आनुवंशिक रूप से उत्तम बीजों का परीक्षण डीएनए फिंगर प्रिंटिंग के द्वारा किया जा सकता है। यह अधिक उत्तम जातियों के विकास में सहायक सिद्ध हो सकता है। इसका उपयोग उन पौधों की पहचान के लिए भी किया जा सकता है, जिनमें चिकित्सीय गुण होने की संभावना हो।

भारत में डीएनए परीक्षण भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) 1872 और आपराधिक प्रक्रिया संहिता (Criminal Procedure Code) 1973 के तहत शामिल नहीं है। परंतु वर्तमान में भारत में पॉलीमरेज चेन रिएक्शन (polymerase chain reaction) और शॉर्ट टंडेम रिपीट (short tandem repeats) पर आधारित डीएनए प्रोफाइलिंग का उपयोग काफी हो रहा है, ये तकनीक बहुत विश्वसनीय हैं और विभिन्न देशों में भी प्रचलित हैं। परंतु इस तकनीक की भी एक सीमा है इसका उपयोग उन आपराधिक मामलों में नहीं किया जा सकता है जहां जुड़वां लोग मामले से संबंधित हो, क्योंकि जुड़वां व्यक्तिओं में एकसमान ही डीएनए अनुक्रम होते हैं। ऐसे मामले में जहां उनमें से एक ने अपराध किया है, दोनों को सजा नहीं दी जा सकती है। इसलिये ऐसे मामलों में फिंगरप्रिंट द्वारा अपराधी की पहचान की जाती है।

संदर्भ:
1.https://en.wikipedia.org/wiki/DNA_profiling
2.https://www.thebalance.com/what-is-dna-fingerprinting-and-how-is-it-used-375554
3.https://www.downtoearth.org.in/news/science-technology/father-of-indian-dna-fingerprinting-passes-away-59324
4.https://blog.ipleaders.in/use-dna-fingerprinting-indian-criminal-law/
5.https://en.wikipedia.org/wiki/Lalji_Singh



RECENT POST

  • भारत के हितों में गुटनिरपेक्ष आंदोलन का पुनरुद्धार और प्रभावशीलता
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     08-07-2020 06:48 PM


  • भारत में नवपाषाण स्वास्थ्य बदलाव
    सभ्यताः 10000 ईसापूर्व से 2000 ईसापूर्व

     08-07-2020 07:44 PM


  • सूफीवाद पर सबसे प्राचीन फारसी ग्रंथ : कासफ़-उल-महज़ोब
    ध्वनि 2- भाषायें

     07-07-2020 04:55 PM


  • जौनपुर की अद्भुत मृदा
    भूमि प्रकार (खेतिहर व बंजर)

     06-07-2020 03:37 PM


  • आईएसएस को आपकी छत से देखा जा सकता है
    य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला

     04-07-2020 07:22 PM


  • भारत के दलदल जंगल
    जंगल

     03-07-2020 03:16 PM


  • शाश्वत प्रतीक्षा का प्रतीक है नंदी (बैल)
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     03-07-2020 11:09 AM


  • शिल्पकारों के कलात्मक उत्साह को दर्शाती है पेपर मेशे (Paper mache) हस्तकला
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     01-07-2020 11:53 AM


  • इत्र उद्योग में जौनपुर का गुलाब
    गंध- ख़ुशबू व इत्र

     01-07-2020 01:18 PM


  • अंतरिक्ष की निरंतर निगरानी के महत्व को रेखांकित करते हैं, क्षुद्रग्रह हमले
    खनिज

     30-06-2020 06:59 PM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.