मानसून के साथ ही खरीफ की फसल का आगमन

जौनपुर

 29-08-2018 11:37 AM
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दक्षिणि-पश्चिम मानसून के प्रारंभ होने के साथ ही खरीफ की फसल (चावल, बाजरा, मक्का, सोयाबीन, हल्दी, मूंगफली, कपास, गन्ना आदि) की बुआई प्रारंभ हो जाती है, क्‍योंकि इस फसल के लिए तापमान और आर्द्रता की आवश्‍यकता होती है। यह मुख्‍यतः भारत, पाकिस्‍तान और बांग्‍लादेश में मानसून की स्थिति को देखते हुए क्षेत्रानुसार अलग अलग (जून-अक्‍टूबर) बोई जाती है। खरीफ शब्‍द की उत्‍पत्ति अरबी भाषा से हुयी जिसका शाब्दिक अर्थ है "पतझड़" इस फसल का विस्‍तार मुगल काल के दौरान भारत में तीव्रता से हुआ। भारत में सामान्‍यतः पतझड़ (अक्‍टूबर-नवम्‍बर) के दौरान ही खरीफ फसल की कटाई की जाती है।

खरीफ की फसल का उत्‍पादन भारत में उपलब्‍ध कृषि क्षेत्र के एक तिहाई हिस्‍से में होता है तथा इसके लिए 50-300 सेमी(Centimeter) वर्षा की आवश्‍यकता होती। किंतु भारत के कुछ क्षेत्रों में 50-200 सेमी के मध्‍य वर्षा होती है अतः अतिरिक्‍त जल की आपूर्ति सिंचाई द्वारा की जाती है। मानसून की अनियमितता के कारण भारत में खरीफ की फसल का उत्‍पादन भी अलग अलग अनुपात में होता है जिसका सूक्ष्‍म परिचय इस प्रकार है :

तमिलनाडू में वर्ष 2016-17 में कुल खाद्य उत्‍पादन 4.75 मिलियन था जो 2017-18 में बढ़कर 5.24 मिलियन हो गया तथा 2018-19 में यह 10.94 मिलियन आंका जा रहा है। वहीं पश्चिम बंगाल में खरीफ ऋतु में 70% (15 मिलियन टन) चावल उगाया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 15-20% कम था। मानसून में कमी के कारण महाराष्‍ट्र में कृषि क्षेत्र में कमी आयी है। तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के पास खरीफ की फसल के लिए कुल 4 मिलियन भूमि उपलब्‍ध है किंतु वर्षा में कमी के कारण यहां उस स्‍तर तक उत्‍पादन नहीं हो पाता है तथा सरकार द्वारा इसे बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

मानसून में देरी के कारण उत्‍तर भारत में इसकी उत्‍पादन क्षमता में विपरित प्रभाव पड़ा है इसका प्रत्‍यक्ष उदाहरण पिछले वर्ष हरियाणा, हिमांचल और उत्‍तराखण्‍ड में फसल उत्‍पादन में आयी कमी है। मानसून के प्रथम आगमन के कारण कर्नाटक (2.2 मिलियन कृषि) में खरीफ में तीव्रता आंकी गयी है, यह पिछले वर्ष से 60 प्रतिशत अधिक थी। तो वहीं गुजरात में मानसून खरीफ की फसल के लिए सहायक सिद्ध हुआ है। उत्‍तर भारत में इस बार चावल की खेती 26.3 मिलियन हेक्‍टेयर में की गयी जो पिछले वर्ष की तुलना में 4.2% कम है और दाल की खेती 11.5 मिलियन में की गयी जो 3.9% कम है।

उपरोक्‍त विवरण से आपको ज्ञात हो गया होगा मानसून खरीफ की फसल में कितनी महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाता है तथा साथ ही इसकी बुवाई पर भी गहन प्रभाव डालता है। कृषि उत्‍पादन पर पड़े प्रभाव के कारण किसानों को सहायता प्रदान करने के लिए सरकार द्वारा भी विभिन्‍न कदम उठाए जा रहे हैं जैसे खरीफ की फसल के बाजार मूल्य को बढ़ा दिया गया है।

संदर्भ :

1.https://en.wikipedia.org/wiki/Kharif_crop
2.https://www.business-standard.com/article/economy-policy/here-s-how-kharif-planting-gets-a-monsoon-booster-across-the-country-118062800011_1.html
3.https://keydifferences.com/difference-between-kharif-and-rabi-crops.html
4.https://www.livemint.com/Politics/ZyyshU1KHu3v6xBkWyTXnO/Plantation-of-Kharif-crops-picks-up-pace.html
5.https://timesofindia.indiatimes.com/business/india-business/govt-announces-new-msp-of-kharif-crops-nutri-cereals-millets-got-substantial-hike/articleshow/64854455.cms



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