क्या जौनपुर से हुई थी ख़याल गायकी की शुरुआत?

जौनपुर

 11-08-2018 11:17 PM
ध्वनि 1- स्पन्दन से ध्वनि

संगीत हम सभी को आकर्षित करता है। कहा जाता है कि संगीत में माँ सरस्वती का वास होता है। शायद ही कोई व्यक्ति होगा, जिसे संगीत पसंद न हो। प्राचीन काल में सम्पूर्ण भारत में संगीत की केवल एक पद्धति थी परंतु आज हम देखते हैं कि संगीत की दो पद्धतियां हैं। माना जाता है कि उत्तरी संगीत (हिन्‍दुस्‍तानी संगीत) पर अरब और फ़ारसी संगीत का प्रभाव पड़ा जिससे उत्तरी संगीत, दक्षिणी (कर्नाटक संगीत) संगीत से अलग हो गया।

उत्तरी संगीत या भारतीय शास्त्रीय संगीत में 7 मुख्य संरचना शैलियां हैं: ख़याल, ध्रुपद, धमार, ठुमरी, तराना, टप्पा, दादरा। कहा जाता है कि भारत में प्राचीन काल से ही ध्रुपद सबसे महान और सबसे श्रेष्ठ शैली थी, परंतु इस्लाम के विकास के दौरान भारत में संस्कृति और सभ्यता के साथ-साथ संगीत में भी परिवर्तन आये। इसी कारण 13वीं शताब्दी में ख़याल गायन शैली का जन्म हुआ। वस्तुत: यह ध्रुपद का ही एक प्रकार है। अंतर केवल इतना ही है कि ध्रुपद वास्तविक भारतीय शैली है। ख़याल में भारतीय और फारसी संगीत का मिश्रण है।

इसका आरंभ कब हुआ यह निश्चित रूप से ज्ञात नहीं है। कहा जाता है कि प्राचीन काल में अमीर खुसरो (महान फारसी संगीतकार) ने ख़याल गायकी का परिशोधन किया। लेकिन इस कहानी का कोई प्रमाण मौजूद नहीं है। कुछ लोग मानते हैं कि ख़याल गायकी 14वीं शताब्दी में जौनपुर के सुल्तान मुहम्मद शारक्वी (जो भारत के पहले मुगल शासक बाबर के समकालीन थे) के कोर्ट में विक्सित हुआ। किंतु उनके समय में इस गायकी का उतना स्पष्ट रूप नहीं था। 17वीं शताब्दी में मुगल सम्राट मुहम्मद शाह ‘रंगीले’ के समय, यह गायकी पुन: अस्तित्व में आयी। उनके ज़माने में नियामत खान (सदारंग) और फिरोज़ खान (अदारंग) नामक दो संगीतकार थे। इन संगीतकारों ने हजारों की संख्या में ख़याल की रचना की और अपने शिष्यों में उनका प्रसार किया।

चूंकि ख़याल पूरे भारत के दरबारों में विकसित हुआ, इसलिये इसकी अलग-अलग शैलीयां अलग-अलग घरानों में उभरीं। रियासतों के नाम पर तीन प्रमुख ख़याल घरानों (ग्वालियर, रामपुर और पटियाला) को मूल रूप से बढ़ावा दिया गया था। बाद में आगरा, किराना और जयपुर घराना ख़याल गायन के प्रमुख केंद्र बने। ख़याल में गायक की कल्पना का भी समावेश होता है। ख़याल दो प्रकार के होते हैं। पहला प्रकार है बड़ा ख़याल जो विलंबित लय और तिलवाड़ा, झुमरा तथा एक ताल में गाया जाता है तथा इसको गाने की गति धीमी होती है। दूसरा है छोटा ख़याल जो चपल चाल से त्रिताल, तथा एक ताल में गाया जाता है और साथ ही इसे गाने की गति भी तेज़ होती है।

अपने अधिकांश अस्तित्व में ख़याल हमेशा कुलीन संरक्षकों का संगीत रहा है। केवल 20वीं शताब्दी में अन्य समूहों ने ख़याल में महत्वपूर्ण भागीदारी प्राप्त की है। आज ख़याल, शास्त्रीय संगीत के सबसे जीवंत और विविधता से भरे रूपों में से एक है।

संदर्भ:
1.https://www.indianetzone.com/35/origin_development_khayal_indian_music.htm
2.अंग्रेज़ी पुस्तक: Bagchee, Sandeep. 2015. Nad: Understanding Raga Music, S.Chand (G/L) & Company Ltd
3.https://www.shivpreetsingh.com/2011/02/15/khayal-an-imagination-in-indian-classical-music/



RECENT POST

  • उत्तर प्रदेश सरकार का प्रतीक चिन्ह दो मछली कोरिया‚ जापान और चीन में भी है लोकप्रिय
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     06-12-2021 09:42 AM


  • स्वतंत्रता के बाद भारत छोड़कर जाने वाले ब्रिटिश सैनिकों की झलक पेश करते दुर्लभ वीडियो
    उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

     05-12-2021 08:40 AM


  • भारत से जुड़ी हुई समुद्री लुटेरों की दास्तान
    समुद्र

     03-12-2021 07:46 PM


  • किसी भी भाषा में मुहावरें आमतौर पर जीवन के वास्तविक तथ्यों को साबित करती है
    ध्वनि 2- भाषायें

     03-12-2021 10:42 AM


  • नीलगाय की समस्या अब केवल भारतीय किसान की ही नहीं बल्कि उन देशों की भी जिन्होंने इसे आयात किया
    निवास स्थान

     02-12-2021 08:44 AM


  • भारत की तुलना में जर्मनी की वोटिंग प्रक्रिया है बेहद जटिल
    उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक आधुनिक राज्य: 1947 से अब तक

     01-12-2021 08:55 AM


  • हिन्दी शब्द चाँपो औपनिवेशिक युग में भारत से ही अंग्रेजी भाषा में Shampoo बना
    ध्वनि 2- भाषायें

     30-11-2021 10:23 AM


  • जौनपुर के शारकी राजवंश के ऐतिहासिक सिक्के
    मध्यकाल 1450 ईस्वी से 1780 ईस्वी तक

     29-11-2021 08:50 AM


  • भारत ने मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता का खिताब छह बार अपने नाम किया, पहली बार 1966 में रीता फारिया ने
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     28-11-2021 12:59 PM


  • भारतीय परिवार संरचना के लाभ
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     27-11-2021 10:23 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id