कई प्रकार की छतरी, कई प्रकार की सुरक्षा

जौनपुर

 31-07-2018 12:53 PM
हथियार व खिलौने

भारत में वर्षा ऋतु जून से सितंबर तक रहती है। ये असहनीय गर्मी के बाद सभी के जीवन में उम्मीद और राहत की फुहार लेकर आती है। सभी उत्सुकता के साथ इसका इंतज़ार करते हैं। परंतु वर्षा ऋतु में मौसम का पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता है, आपको कभी भीषण धूप का सामना करना पड़ता है और कभी तेज बारिश का, ऐसे मौसम से बचने का सबसे उपयोगी उपकरण है छाता और पैरासोल, जो धूप तथा वर्षा दोनों से आपको राहत दिलाते हैं और आपकी आवश्यक सामग्री – मोबाइल, पर्स इत्यादि को पानी से बचाते हैं। मानसून आते ही बाजारों में विभिन्न रंगों, आकारों और कीमतों के छाते उपलब्ध हो जाते हैं।

छाते के आज कई प्रकार हैं। क्लासिक (classic) छतरी, पॉकेट (pocket) छतरी, स्वचालित छतरी, दुकानों में उपयोगी स्टेशनरी (stationary) छतरी, बड़े चंदवे वाली गौल्फ़ (golf) छतरी, और विभिन्न प्रकार के पैरासोल (parasol) जो धूप से बचाकर रखता है, और बाग और समुद्र तट पर उपयोगी हैं।

आप अपनी ज़रूरतों और इच्छाओं के अनुसार इन्हें खरीद सकते हैं। एक पैरासोल और छतरी के बीच मुख्य अंतर इसका आकार और उद्देश्य है। पैरासोल एक छोटी छतरी है जो आम तौर पर नाजुक और सुंदर दिखती है (परंतु समुद्र तट और आंगन के पैरासोल काफी बड़े और मजबूत होते हैं)। पैरासोल केवल सूर्य से लोगों को छाया प्रदान करने के लिए कपड़े से बने होते हैं जो जलरोधक हो भी सकते हैं या नहीं भी। छाते पैरासोल की तुलना में अधिक प्रतिरोधी और टिकाऊ होते हैं।

प्राचीन मिस्र में, सूर्य से राजसी परिवार की रक्षा के लिए पैरासोल का उपयोग किया जाता था, जो आकार में बड़े थे। यहां और चीन, अस्सिर्या, आदि देशों में वे ताड़ के पत्तों या शाखाओं से, अथवा पशुओं की खाल से बनते थे। चीन में 9वीं शताब्दी ईसा पूर्व में बहुत लोकप्रिय और महंगे कागज़ के पैरासोल (paper parasol) का निर्माण हुआ, इनकी उच्च लागत और सीमित निर्माण के कारण ये समृद्धि और प्रतिष्‍ठा के प्रतीक थे। 19वीं शताब्दी के दौरान पैरासोल यूरोपीय और अमेरिकी महिलाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हुए, ये उनकी वेशभूषा का अनिवार्य हिस्सा बन गये। वहीं दूसरी ओर प्राचीन चीन में, छाता मोम से घिसे कागज़ और बांस से बने थे और लोगों को बारिश से बचाने के लिए इनका इस्तेमाल किया जाता था।

तत्पश्चात, नई सामग्री उपलब्ध हो गई जिनके उपयोग से अधिक टिकाऊ, हल्के छाते बनाये जाने लगे। 20वीं शताब्दी के प्रारंभिक वर्षों तक, जलरोधक छतरियों ने आम जनसंख्या में अधिक से अधिक लोकप्रियता हासिल की, जिसने धीरे-धीरे अधिक मूल्य वाले पैरासोल को पुराना बना दिया।

संदर्भ:
1.https://www.leaf.tv/articles/differences-in-a-parasol-and-an-umbrella/
2.http://www.umbrellahistory.net/umbrella-types/types-of-umbrellas/
3.http://www.umbrellahistory.net/umbrella-history/parasol-history/
4.http://www.umbrellahistory.net/umbrella-types/how-umbrella-is-made/
5.https://www.independent.co.uk/extras/indybest/house-garden/best-parasols-uk-ikea-john-lewis-marks-and-spencer-a7105251.html



RECENT POST

  • भारत में दास के रूप में पहुंचे और शासकों के रूप में उभरे अफ्रीकियों की कहानी भुला दी गई
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     23-09-2020 03:33 AM


  • इस्लामिक वास्तुकला के विशिष्ट उदाहरणों में से एक है, जौनपुर की खालिस मुखलिस मस्जिद
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     22-09-2020 10:51 AM


  • भारतीय शिल्प निर्माण का अनूठा उत्पाद हैं, काली मिट्टी के बर्तन
    म्रिदभाण्ड से काँच व आभूषण

     21-09-2020 04:16 AM


  • ऐतिहासिक एलिफेंटा गुफाएं
    खदान

     20-09-2020 08:23 AM


  • व्यक्ति के बारे में कई जानकारियां हासिल कर पाने में सक्षम है, डीएनए परीक्षण (DNA Test)
    डीएनए

     19-09-2020 01:10 AM


  • बैटरियों का बैंक क्या है? क्या यहां वास्‍तव में बैटरियां मिलती है?
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     18-09-2020 02:29 AM


  • प्राचीन युद्धों के मुख्य किरदार और चतुरंग सेना के मुख्य खंड: हाथी
    हथियार व खिलौने

     17-09-2020 06:07 AM


  • खयाल गायकी
    ध्वनि 1- स्पन्दन से ध्वनि

     16-09-2020 02:18 AM


  • आखिर कितने तारे हैं ब्रह्माण्‍ड में?
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     15-09-2020 02:09 AM


  • आत्मा, मानव मृत्यु और अंतिम निर्णय से सम्बंधित है परलोक सिद्धांत
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     14-09-2020 04:19 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id